सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसान आत्महत्या पर गलत दिशा में है सरकार
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किसानों की खुदकुशी के मामले में केंद्र सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की व्यवस्था करने की बजाए सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी किसान खुदकुशी जैसा बड़ा कदम उठाने पर मजबूर न हो।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार से कहा कि कि ऐसी योजनाएं बनाई जानी चाहिए जिससे किसान खुदकुशी जैसा बड़ा कदम उठाने को मजबूर न हो। पीठ ने सरकार से कहा, हमें लगता है कि आप गलत दिशा में जा रहे हैं।
किसान कर्ज लेते हैं लेकिन उसे चुका नहीं पाते। लिहाजा वे खुदकुशी कर लेते हैं और आप उनके परिवारवालों को मुआवजा देते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि पीड़ित परिवार को मुआवजा देना समाधान नहीं है बल्कि खुदकुशी को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए।
जमीनी स्तर पर किसानों की स्थिति बहुत खराब
पीठ ने सरकार से कहा कि योजना इस बात को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए कि आखिरकार किसान खुदकुशी क्यों कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि कोशिश होनी चाहिए कि खुदकुशी को पूरी तरह रोका जाए। इस पर सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिंहा ने पीठ से कहा कि सरकार की ओर से कई नई योजनाएं लेकर आ रही है।
इनके जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी व्यक्ति कर्ज न अदा करने की स्थिति में खुदकुशी जैसा कदम उठाने पर मजबूर न हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नहीं है कि वित्तीय कारणों के कारण ही सभी किसान खुदकुशी करते हैं। कई और दुखद कारणों की वजह से भी वे खुदकुशी करते हैं।
वहीं याचिकाकर्ता एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि कई समितियों की सिफारिशोंऔर प्रस्तावों के बावजूद किसानों की अनदेखी हो रही है। पीठ ने यह भी कहा कि जमीनी स्तर पर किसानों की स्थिति बहुत खराब है। उन्हें परेशानी से जूझना पड़ा रहा है।
पीठ ने कहा अगर फसल सरप्लस है, लेकिन उन्हें अच्छे पैसे नहीं मिल पाते। यह गंभीर विषय है। इस मसले पर वर्षों से बहस हो रही है। पीठ ने सरकार को इस संबंध में कुछ करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से एक-एक कर समस्याओं का निदान किया जाएगा। अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।