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गोवा के ये मंत्री बोले- PUBG एक राक्षस बन चुका है, इसे रोकने के लिए कानून बने
Mon, 11 Feb 2019 12:52 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 11 Feb 2019 12:52 PM IST
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गोवा के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रोहन खाउंटे ने ऑनलाइन खेल 'प्लेयर अननोन बैटलग्राउंड्स' (PUBG) को एक राक्षस बताया है और कहा कि राज्य में इस पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए जाने की जरूरत है।
पोरवोरिम में रविवार को एक सरकारी कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान खाउंटे ने कहा कि यह खेल हर घर में 'राक्षस का रूप ले चुका है और छात्र इसे खेलने में व्यस्त हैं तथा अपनी पढ़ाई पर उनका ध्यान नहीं है।'
खाउंटे ने कहा, 'पबजी पर रोक लगाने वाले राज्यों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है लेकिन कानून बनाया जाना चाहिए ताकि सुनिश्चित हो सके कि गोवा में इस पर प्रतिबंध है।' उन्होंने कहा कि पाबंदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को ही कोई फैसला लेना चाहिए।
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बता दें कि जनवरी में गुजरात के शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिए थे कि प्राइमरी स्कूलों में पबजी पर पाबंदी लगाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। कई यूजर्स को एक साथ खेलने की सुविधा देने वाले ऑनलाइन गेम प्लेयर अननोन्स बैटलग्राउंड्स का शॉर्ट फॉर्म पबजी है।
वहीं दिल्ली सरकार के दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (डीसीपीसीआर) ने सभी स्कूलों को भेजे नोट भेज कर उन्हें आगाह किया कि पबजी, फोर्टनाइट, हिटमैन और पोकेमोन गो जैसे ऑनलाइन और वीडियो गेम बच्चों के लिए खतरनाक हैं। ये बच्चोंके जीवन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
इतना ही नहीं इन ऑनलाइन गेम्स ने एम्स में बाल मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। इनमें पबजी के ही हर सप्ताह चार से पांच नए मरीज पहुंच रहे हैं। गेम की लत में डूबे मरीजों की उम्र 8 से 22 साल तक के बीच है।
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पोरवोरिम में रविवार को एक सरकारी कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान खाउंटे ने कहा कि यह खेल हर घर में 'राक्षस का रूप ले चुका है और छात्र इसे खेलने में व्यस्त हैं तथा अपनी पढ़ाई पर उनका ध्यान नहीं है।'
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खाउंटे ने कहा, 'पबजी पर रोक लगाने वाले राज्यों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है लेकिन कानून बनाया जाना चाहिए ताकि सुनिश्चित हो सके कि गोवा में इस पर प्रतिबंध है।' उन्होंने कहा कि पाबंदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को ही कोई फैसला लेना चाहिए।
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बता दें कि जनवरी में गुजरात के शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिए थे कि प्राइमरी स्कूलों में पबजी पर पाबंदी लगाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। कई यूजर्स को एक साथ खेलने की सुविधा देने वाले ऑनलाइन गेम प्लेयर अननोन्स बैटलग्राउंड्स का शॉर्ट फॉर्म पबजी है।
वहीं दिल्ली सरकार के दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (डीसीपीसीआर) ने सभी स्कूलों को भेजे नोट भेज कर उन्हें आगाह किया कि पबजी, फोर्टनाइट, हिटमैन और पोकेमोन गो जैसे ऑनलाइन और वीडियो गेम बच्चों के लिए खतरनाक हैं। ये बच्चोंके जीवन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
इतना ही नहीं इन ऑनलाइन गेम्स ने एम्स में बाल मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। इनमें पबजी के ही हर सप्ताह चार से पांच नए मरीज पहुंच रहे हैं। गेम की लत में डूबे मरीजों की उम्र 8 से 22 साल तक के बीच है।