फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   george fernandes was a veteran journalist, said once ''Sansad Veshya hai''

'संसद वेश्या है' कहने वाले क्रांतिकारी पत्रकार भी थे जॉर्ज फर्नांडिस, जहां गए, वहीं छोड़ी अमिट छाप

Tue, 29 Jan 2019 05:39 PM IST
Nilesh Kumar अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Tue, 29 Jan 2019 05:39 PM IST
विज्ञापन
george fernandes was a veteran journalist, said once ''Sansad Veshya hai''
George Fernandes - फोटो : PTI

दक्षिण भारत के मंगलौर में एक ईसाई परिवार में पैदा हुए जॉर्ज फर्नांडिस मुंबई आए तो थे एक पादरी बनने, लेकिन किस्मत ने उन्हें भारत के उन चंद नेताओं में से एक बना दिया जिन्होंने जाति-धर्म और संप्रदाय को मीलों पीछे छोड़ दिया। मुंबई में एक पार्षद बनने से शुरु हुई उनकी राजनीतिक यात्रा नौ बार सांसद बनने के साथ ही केंद्रीय रक्षामंत्री बनने तक जारी रही। 

विज्ञापन


उन्होंने आज के राजग के स्वरुप लेने में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ बड़ी भूमिका निभाई। 'प्रतिपक्ष' या 'द अदर साइड' नाम के उनके अखबार ने सत्ता के खिलाफ ऐसा बिगुल बजाया था जिसे आज भी पत्रकारिता के आदर्श के रुप में याद किया जाता है। 
विज्ञापन


राजनीति में धनबलियों की बढ़ती भूमिका से नाराज जॉर्ज फर्नांडिस ने इसी अखबार में लिखा था कि 'संसद वेश्या है'। इस बयान पर काफी विवाद हुआ था और अखबार पर कार्रवाई की मांग हुई थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जॉर्ज फर्नांडिस के संघर्ष के दिनों के साथी रहे रघु ठाकुर ने अमर उजाला को बताया कि जब वे मुंबई में रोजगार की तलाश कर रहे थे, उसी समय उनकी मुलाकात एक मजदूर नेता से हुई। यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरु हुई और उनकी मुलाकात राममनोहर लोहिया से हुई। 

लोहिया और मधुलिमये से मुलाकात के बाद वे पूरी तरह समाजवादी राजनीति के रंग में रंग गए। उत्तरप्रदेश के राज्यपाल रामनाईक भी उस समय पार्षद हुआ करते थे जब जॉर्ज फर्नांडिस मुंबई में पार्षद थे। 

लोहिया ने दी थी एमपी चुनाव लड़ने की सलाह

1967 में राममनोहर लोहिया ने जॉर्ज फर्नांडिस को लोकसभा का चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने राजनीति के दिग्गज एसके पाटिल के सामने चुनाव लड़ा और विजयी रहे। 1973 में वे एनआरएमयू के अध्यक्ष चुने गए। 

इसके बाद वे रेलवे कर्मचारियों के बड़े संगठन ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन के अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद जार्ज ने रेलवे के सभी छोटे-बड़े संगठन को मिलाकर एक कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई। 8 मई 1974 को रेलवे के इतिहास में जो हड़ताल हुई उसकी आज तक मिसाल दी जाती है। 

इंदिरा गांधी जैसे दिग्गज प्रधानमंत्री के रहते हुए उन्होंने 14 दिनों तक पूरे देश में रेलवे का पहिया ठप करा दिया था। माना जाता है कि उस समय रेलवे के तीन लाख से अधिक कर्मचारियों ने इस हड़ताल में भाग लिया था। उस समय सरकार ने जॉर्ज फर्नांडिस सहित सभी नेताओं को जेल में डाल दिया था। 

अपने ससुराल से भूमिगत हुए थे फर्नांडिस

रघु ठाकुर ने बताया कि आपातकाल की घोषणा के समय जॉर्ज फर्नांडिस उड़ीसा के गोपालपुर में थे। यहां उनकी ससुराल थी। वहीं से वे भूमिगत हो गए। इसके बाद ही उन्होंने बड़ौदा कांड की पटकथा लिखी थी। मुरारजी देसाई की सरकार हो या अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार, जॉर्ज फर्नांडिस ने अपने शानदार काम से एक इतिहास लिखा।



रक्षामंत्री रहते हुए सेना के जवानों के साथ बर्फीले इलाकों में सैनिकों की तकलीफ समझने के बाद ही उन्होंने रक्षासचिव को इन इलाकों का दौरा करने का आदेश जारी किया था। जिससे वे सैनिकों की समस्याएं समझ सकें। कोंकड़ रेलवे पूरी तरह से जॉर्ज फर्नांडिस का ही ब्रेन चाइल्ड कहा जाता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed