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गुजरात ने लागू किया गरीबों को आरक्षण का कानून, टाली लोक सेवा आयोग की परीक्षा

Mon, 14 Jan 2019 10:15 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 14 Jan 2019 10:15 AM IST
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General Quota: Gujarat becomes the first state to implement reservation from today
विजय रुपाणी - फोटो : Facebook

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद गरीबों को आरक्षण देने वाला विधेयक कानून बन गया है। रविवार को गुजरात देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने आर्थिक रूप से पिछड़े गरीबों (ईडब्ल्यूएस) को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में दिए जाने वाले 10 फीसदी आरक्षण को लागू करने की घोषणा कर दी है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने ट्वीट के जरिए दी।

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सरकार ने इस मामले में अभी कोई सर्कुलर जारी नहीं किया है। मुख्यमंत्री के बाद गुजरात लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष दिनेश दास ने ट्वीट कर कहा कि 20 जनवरी को होने वाले लोक सेवा आयोग की परीक्षा को टाल दिया गया है। दास ने ट्वीट कर कहा, गुजरात लोक सेवा आयोग 20 जनवरी, 2019 को आयोजित होने वाली सभी प्रारंभिक परीक्षाओं को टालता है क्योंकि आडब्ल्यूएस आरक्षण को लागू किया जा रहा है। आगे की जानकारी का ऐलान आयोग समय-समय पर कर देगा।
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लोक सेवा परीक्षा पर रुपाणी ने कहा कि 10 फीसदी कोटा उन सभी भर्तियों में लागू किया जाएगा जहां विज्ञापन प्रकाशित हुए हैं लेकिन पहले चरण की परीक्षा होना अभी बाकी है। सरकार ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि जारी प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है और 10 फीसदी का अतिरिक्त आरक्षण लागू करने के बाद इसे शुरू किया जाएगा।  
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बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर तबके को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी विशेष प्रावधान को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना में कहा गया कि संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। 

संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम के जरिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया गया है। इसके जरिए एक प्रावधान जोड़ा गया है जो राज्य को नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर किसी तबके की तरक्की के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है। यह विशेष प्रावधान निजी शैक्षणिक संस्थानों सहित शिक्षण संस्थानों, चाहे सरकार द्वारा सहायता प्राप्त हो या न हो, में उनके दाखिले से जुड़ा है।

 

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