फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies

जनरल डायर ने 30 सेकंड में कहा फायर और बिछवा दीं 379 लाशें

Thu, 13 Apr 2017 11:53 AM IST
रेहान फ़ज़ल / बीबीसी संवाददाता
रेहान फ़ज़ल / बीबीसी संवाददाता Updated Thu, 13 Apr 2017 11:53 AM IST
विज्ञापन
General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
ब्रिगेडियर जनरल रेजिनॉल्ड डायर
13 अप्रैल, 1919 को शाम साढ़े पांच बजे अमृतसर की सड़कों से होते हुए दो बख्तरबंद गाड़ियाँ जालियाँवाला बाग के पास एक पतली गली के सामने रुकीं। गाड़ियाँ आगे नहीं जा सकती थीं क्योंकि वहाँ पर सिर्फ दो लोगों के एक साथ गुजरने की ही जगह थी।
विज्ञापन


एक गाड़ी पर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनॉल्ड डायर अपने ब्रिगेडियर मेजर मॉर्गन ब्रिग्स और अपने दो ब्रिटिश अंगरक्षकों सार्जेंट एंडरसन और पिजी के साथ सवार थे। गाड़ी से उतरते ही उन्होंने राइफलों से लैस 25 गोरखा और 25 बलूच सैनिकों को अपने पीछे आने के आदेश दिए।
विज्ञापन


सिर्फ खुखरी लिए हुए 40 सैनिकों को बाहर ही खड़े रहने के लिए कहा गया। इससे पहले जब वो हाल बाजार के सामने से गुजर रहे थे तो उनके मन में चल रहा था कि अगले कुछ मिनटों में वो क्या कदम उठाने वाले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पहले ही कर लिया था तय

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
ब्रिगेडियर जनरल रेजिनॉल्ड डायर
डायर ने हंटर कमेटी को बताया था, "जैसे ही मैं अपनी कार में बैठा मैंने तय कर लिया था कि अगर मेरे आदेशों का पालन नहीं हुआ तो मैं बिना हिचक गोली चलवा दूँगा।" डायर ने बाग में घुसते ही मेजर ब्रिग्स से पूछा, "आपके अंदाज में कितने लोग इस समय यहाँ मौजूद हैं?" ब्रिग्स ने जवाब दिया, "करीब पाँच हजार।"

बाद में उन्होंने पंजाब के मुख्य सचिव जेपी टॉमसन को बताया कि गोली चलाने का फैसला लेने में उन्हें 'मात्र तीन सेकेंड' लगे। उस समय मंच पर एक बैक क्लर्क बृज बैकाल अपनी नज्म 'फरियाद' पढ़ रहे थे। उसी समय एक विमान भी बहुत नीची उड़ान भरते हुए सभा का ऊपर से जायजा ले रहा था।

सैनिकों को देखते ही कुछ लोग वहाँ से उठने लगे। तभी सभा के एक आयोजक हंसराज ने चिल्ला कर कहा, "अंग्रेज गोली नहीं चलाएंगे और अगर चलाएंगे भी, तो गोलियाँ खाली होंगी।" लेकिन इससे लोगों का डर कम नहीं हुआ और उन्होंने भागना शुरू कर दिया।

संकरी गली में फंसे लोग

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
जलियांवाला बाग में इसी रास्ते से डायर और उनके सैनिक घुसे थे
डायर ने बिना किसी चेतावनी के, वहाँ पहुंचने के 30 सेकेंड के भीतर, चिल्ला कर आदेश दिया, 'फायर।' हंटर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टेन क्रैंम्पटन ने उस आदेश को दोहराया और सैनिकों ने गोली चलानी शुरू कर दी। लोग डर कर हर दिशा में भागने लगे, लेकिन उन्हें बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं मिला। सारे लोग संकरी गलियों के प्रवेश द्वार पर जमा होकर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।

डायर के सैनिकों ने इन्हीं को अपनी निशाना बनाया। लाशें गिरने लगीं। बहुत से लोग भगदड़ में दब कर मारे गए। कई जगह एक के ऊपर एक, दस से बारह शवों का अंबार लगता चला गया। कई लोगों ने दीवार चढ़ कर भागने की कोशिश की और सैनिकों की गोलियों का निशाना बने। भीड़ में मौजूद कुछ पूर्व सैनिकों ने चिल्ला कर लोगों से लेट जाने के लिए कहा। लेकिन ऐसा करने वालों को भी पहले से लेट कर पोजीशन लिए गोरखाओं ने नहीं बख्शा।

दौड़ दौड़ कर हुक्म दे रहे थे डायर

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
एबटाबाद (अब पाकिस्तान में) में तैनाती के दौरान अपनी कार के साथ जनरल डायर
नाइजल कोलेट अपनी किताब 'द बूचर ऑफ अमृतसर' में लिखते हैं, "कभी कभी गोलियाँ चलना रुकतीं, वो इसलिए क्योंकि सैनिकों को अपनी रायफलें फिर से लोड करनी होतीं। डायर खुद दौड़ दौड़ कर उस तरफ फायरिंग करने का हुक्म दे रहे थे जहाँ ज्यादा लोग जमा हो रहे थे।" बाद में सार्जेंट एंडरसन ने जो कि जनरल डायर के बिल्कुल बगल में खड़े थे,

हंटर कमेटी को बताया, "जब गोलीबारी शुरू हुई तो पहले तो लगा कि पूरी की पूरी भीड़ जमीन पर धराशाई हो गई है। फिर हमने कुछ लोगों को ऊँची दीवारों पर चढ़ने की कोशिश करते देखा। थोड़ी देर में मैंने कैप्टेन ब्रिग्स के चेहरे की तरफ देखा। मुझे ऐसा लगा कि उन्हें काफी दर्द महसूस हो रहा था।"

उनके अनुसार, "वो जनरल की कोहनी को पकड़े हुए थे। भारतीय सैनिकों का फायर कंट्रोल और अनुशासन उच्च कोटि का था। फायरिंग का इंचार्ज अफसर जनरल डायर पर अपनी नजर बनाए हुए था और फायर करने और रोकने का आदेश दे रहा था, जिसका सैनिक पूरी तरह से पालन कर रहे थे।"

सारी गोलियां खत्म कर दीं

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
भारत से ब्रिटेन वापस लौटने के बाद साउथेम्प्टन बंदरगाह पर उतरते हुए जनरल डायर
बाद में जब उस ऑपरेशन में मौजूद दो गोरखा सैनिकों से एक आईसीएस अधिकारी जेम्स पेडी ने उनके अनुभवों के बारे में पूछा तो उनका कहना था, "साहब जब तक गोलियाँ चलीं, बहुत अच्छा रहा। हमने अपने पास एक भी गोली बचा कर नहीं रखी।"

(टाइम्स लिटरेरी सप्लिमेंट, 19 मार्च, 1964)। गोलियों की बौछार के बीच कुछ लोगों ने एक कुएं की आड़ लेने की कोशिश की। बहुत से लोग कुएं में कूद कर पानी में डूब गए। डायर उन लोगों को निशाना बनाने के आदेश दे रहे थे जो, 'बेहतर निशाना' बन सकते थे और जो पीपल के पेड़ के तने की आड़ लेने की कोशिश कर रहे थे।

गिरधारी लाल ने, जो पास के एक घर से दूरबीन से सारा दृश्य देख रहे थे, हंटर कमेटी को बताया, "बाग का कोई भी ऐसा कोना नहीं था जहाँ गोलियाँ न बरस रही हों। बहुत से लोग तो भागते हुए लोगों के पैरों से कुचल कर मारे गए।"

आदेश के बाद भी नहीं बंद हुई फायरिंग

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
जलियाँवाला बाग स्मारक स्थल
फायरिंग में फंसे लोगों में मौलवी गुलाम जिलानी भी थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस जाँच समिति को बताया, "मैं दीवार की तरफ दौड़ा और मरे और घायल पड़े लोगों के अंबार पर गिर पड़ा। मेरे ऊपर भी कुछ लोग गिरे।" उन्होंने बताया, "मेरे ऊपर गिरने वाले कुछ लोगों को गोलियाँ लगीं और वो मारे गए। मेरे ऊपर घायल और मरे हुए लोगों का ढेर लग गया था। मेरा दम घुटा जा रहा था।

मुझे लग रहा था कि मैं भी मरने वाला हूँ।" फायरिंग दस मिनटों तक जारी रही। लोगों के चीखने की आवाज इतनी तेज थी कि डायर और उसके साथियों ने बाद में हंटर कमेटी को बताया कि उन्हें सैनिकों से फायरिंग रुकवाने में बहुत मुश्किल आई क्योंकि उनकी आवाज उन तक पहुंच ही नहीं पा रही थी।

बाद में पुलिस इंस्पेक्टर रेहिल और जोवाहर लाल ने हंटर कमेटी के सामने गवाही देते हुए कहा, "सारी हवा में लोगों के भागने की वजह से पैदा हुई धूल और खून ही खून था। किसी की आँख में गोली लगी थी तो किसी की अंतड़ियाँ बाहर आ गई थीं। हम इस नरसंहार को और देख नहीं पाए और बाग से बाहर चले आए।"

डायर ने और फायर करने को कहा

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 2013 में जलियाँवाला बाग स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि दी थी
1964 में 'टाइम्स लिटरेरी सप्लिमेंट' में सार्जेंट एंडरसेन का एक पत्र छपा जिसमें बताया गया कि रिलोडिंग के दौरान हुए विराम के दौरान एक अफसर प्लोमर ने डायर से कहा, "हमने भीड़ को ऐसा सबक सिखाया है जिसे वो जिंदगी भर नहीं भूलेगी..."

डायर ने अंतत: फायरिंग तब रोकी जब उन्हें लगा कि सैनिकों के पास बहुत कम गोलियाँ बची हैं। लॉर्ड हेली पेपर्स में इस बात का जिक्र है कि एक समय ऐसा आया कि जनरल डायर ने पलट कर अपने एक साथी से पूछा, "तुम्हें लगता है कि अब काफी हो गया है?" फिर वो खुद ही बोले, "नहीं हमें चार राउंड और चलाने चाहिए।"

फायरिंग के बाद डायर चले गए

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
जलियाँवाला बाग की दीवार पर गोलियों के निशान
फायरिंग रोकने के बाद डायर अपनी गाड़ी तक पैदल चल कर गए और उसी रास्ते से रामबाग वापस चले गए जिस रास्ते से वो जालियाँ वाला बाग आए थे। वो न तो नुक्सान देखने के लिए रुके और न ही उन्होंने घायलों के इलाज की कोई व्यवस्था की। हंटर रिपोर्ट में बताया गया कि जब डायर से इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था, "घायलों को देखना मेरा काम नहीं था।

अस्पताल खुले हुए थे और वहाँ डाक्टर मौजूद थे। घायलों को मदद के लिए वहाँ जाना चाहिए था।" जब गोलियों के खोखों को गिना गया तो उनकी संख्या 1,650 पाई गई। हंटर रिपोर्ट के अनुसार, डायर ने अनुमान लगाया कि करीब 200 से 300 लोग मारे गए होंगे, लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि मरने वालों की संख्या 400 से 500 के बीच रही होगी।

बच्चे भी मरे पड़े थे

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
एक पिकनिक के दौरान जनरल डायर अपनी पत्नी एनी और भतीजी एलिस के साथ
इस बरबादी का दृश्य बाग से सटे हुए कई घरों में रहने वाले लोगों ने देखा उनमें से एक थे पेशे से कसाई मोहम्मद इस्माइल, जो उस समय अपने घर की छत पर खड़े थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस जाँच समिति को बताया, "गोरखाओं के जाने के बाद मैं बाग में अपने मामा के लड़के को ढूंढने निकला। हर तरफ लाशें बिखरी हुई थीं।

मेरे हिसाब से करीब 1,500 लोग मारे गए थे।" उन्होंने कहा, "रियाजुल हसन के घर के दोनों कोनों पर कुएं के पास बहुत ज्यादा लाशें थीं। मैंने देखा कुछ बच्चे भी मरे पड़े थे। मंडी से आया खैरुद्दीन तेली भी मरा पड़ा था। उसके हाथ में उसका छह या सात महीने का बच्चा था।"

घायल मरने के लिए छोड़ दिये गए

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
सरदार प्रताप सिंह ने भी कांग्रेस जाँच समिति को दी गई गवाही में बताया, "जब में बाग में घुसा तो एक मरते हुए शख्स ने मुझसे पानी मांगा। जब मैंने एक गड्ढ़े से पानी निकालना चाहा तो मैंने वहाँ कई लाशें तैरते हुए देखीं। कुछ जिंदा लोग भी वहाँ छिपे हुए थे। उन्होंने मुझसे पूछा, 'क्या सैनिक चले गए?', जब मैंने उनको बताया कि वो गए तो वो बाहर निकले और भागने लगे।" आठ बजे के बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया।

अगली सुबह तक घायल बिना किसा डाक्टरी मदद के वहीं पड़े रहे। मानव रक्त की गंध पा कर कुछ आवारा कुत्ते जालियाँवाला बाग पहुंच गए और पूरी रात उन्होंने इधर उधर पड़े शवों को खाया। सुबह होते ही शवों को हटाने का काम शुरू हुआ। हंटर कमेटी ने बाद में माना कि इस फायरिंग में कुल 379 लोग मारे गए, जिनमें 337 पुरुष और 41 बच्चे थे।

उसका अनुमान था कि घायलों की संख्या मरने वालों से तीन गुना अधिक रही होगी। जब डायर, मॉर्गन और इरविन ने रात साढ़े दस और आधी रात के बीच शहर का दौरा किया तो शहर पूरी तरह से शाँत था। हाँ बाग में घायल लोग धीरे धीरे दम तोड़ रहे थे, लेकिन पूरे शहर में एक मनहूस सन्नाटा छाया हुआ था।
 

नेहरू की आत्मकथा में है जिक्र

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
जवाहरलाल नेहरू
बाद में नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा, "1919 के आखिर में मैं रात की ट्रेन से अमृतसर से दिल्ली आ रहा था। सुबह मुझे पता चला कि मेरे कूपे के सारे यात्री अंग्रेज फौजी अफसर थे। उनमें से एक आदमी बढ़चढ़ कर अपनी बहादुरी के किस्से बयान कर रहा था। थोड़ी देर में ही मुझे पता चल गया कि वो जालियाँवाला बाग वाला जनरल डायर था।"

वो आगे लिखते हैं, "वो बता रहा था कि कैसे उसने पूरे विद्रोही शहर को राख के ढेर में बदल दिया था। शायद वो हंटर कमेटी के सामने गवाही देने के बाद लाहौर से दिल्ली लौट रहा था। दिल्ली स्टेशन पर वो गुलाबी धारियों का पायजामा और ड्रेसिंग गाउन पहने उतर गया था।"

हंटर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद वायसराय की एक्जिक्यूटिव काउंसिल ने उसकी समीक्षा की और पाया कि डायर की करतूत का किसी भी तरह बचाव नहीं किया जा सकता। जनरल डायर को कोई सजा तो नहीं दी गई, लेकिन उनको समय से दो साल पहले रिटायर कर दिया गया। उनसे ये भी कहा गया कि भारत में वो अब कोई काम नहीं कर पाएंगे।
 

उधम सिंह का बदला

General Dyer said in 30 seconds Fire and Stole 379 bodies
उधम सिंह, जिन्होंने पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर ओ डायर की ब्रिटेन जाकर हत्या की थी.
20 अप्रैल, 1920 को वो इंग्लैंड के लिए रवाना हुए, जहाँ सात साल बाद 23 जुलाई, 1927 को उनका निधन हो गया। नरसंहार के बाद, संगरूर जिले के सुनाम गाँव में जन्मे एक युवा व्यक्ति ने इसका बदला लेने की शपथ ली। उस युवा ऊधम सिंह को वो शपथ पूरा करने में 21 साल लग गए। 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल की एक सभा में उसने अपनी पिस्टल से एक के बाद एक छह फायर किए।

दो गोलियाँ वहाँ मौजूद एक शख्स को लगीं। वो वहीं पर गिर गया और फिर कभी नहीं उठा। उसका नाम था सर माइकल ओ डायर। वो जालियाँवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर था और उसने जनरल डायर द्वारा करवाई गई फायरिंग को एक सही कदम बताया था।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed