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वकीलों की हिरासत से इंटरनेट बंदी तक: बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका; आखिर क्या है मामला?

Mon, 12 Oct 2026 01:33 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 12 Oct 2026 01:33 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने 10 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के पास वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने, सड़कों पर बैरिकेडिंग, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद करने के खिलाफ याचिका दाखिल की है। एससीबीए ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट, धारा 163 BNSS के आदेश की प्रति, CCTV और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा अदालतों तक वकीलों और आम लोगों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है।

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From detention of lawyers to internet shutdown Bar Association files petition in Supreme Court what is matter
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के आसपास वकीलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और हिरासत में लिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने 10 अक्टूबर 2026 की घटना को लेकर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है। एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने, हिरासत के कारणों का खुलासा करने और अदालतों तक वकीलों व आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है। याचिका में इंटरनेट सेवाएं बंद करने, सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद करने और सड़कों पर बैरिकेडिंग का मुद्दा भी उठाया गया है।

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वकीलों को जबरन गाड़ियों में बैठाने का आरोप
एससीबीए के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के पास पुलिस ने कई वकीलों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरन पुलिस की गाड़ियों में बैठाकर ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में वरिष्ठ अधिवक्ता, महिला वकील और बुजुर्ग भी शामिल थे। याचिका में कहा गया है कि कई वकीलों को हिरासत में लेने की वजह तक नहीं बताई गई। एसोसिएशन को घटना के वीडियो मिले थे और हस्तक्षेप के बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को छोड़ दिया गया।
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पुलिस से कार्रवाई का ब्योरा मांगने की अपील
एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से पुलिस को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने की मांग की है। इसमें हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, हिरासत का कानूनी आधार और अवधि, कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की पहचान, बल प्रयोग और पुलिस अधिकारियों को दिए गए निर्देशों की जानकारी मांगी गई है। एससीबीए चाहती है कि यह स्पष्ट हो कि कार्रवाई किसके आदेश पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
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धारा 163 के तहत प्रतिबंधों पर सवाल
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए गए हैं। एससीबीए का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और आसपास की अन्य अदालतों की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग के कारण वकीलों और मुकदमे से जुड़े लोगों को परेशानी हो रही है। एसोसिएशन ने संबंधित आदेश की पूरी प्रति, प्रतिबंध लगाने के कारण, लागू क्षेत्र, अवधि और शर्तें अदालत में पेश करने की मांग की है। साथ ही, प्रतिबंधों की जरूरत और उनके दायरे की समीक्षा करने की अपील की है।

इंटरनेट बंदी और मेट्रो स्टेशन बंद करने पर आपत्ति
एससीबीए ने इंटरनेट सेवाएं बंद करने और सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन को बंद करने पर भी चिंता जताई है। याचिका में दावा किया गया है कि ये कदम भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श किए बिना उठाए गए। एसोसिएशन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए, जिनसे अदालतों में कामकाज और लोगों की आवाजाही प्रभावित हो।

सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और रास्ते खोलने की मांग
एससीबीए ने घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, उपलब्ध बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, हिरासत के दस्तावेज, पुलिस के आदेश और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग की है। एसोसिएशन चाहती है कि अदालत के निर्देश पर ये रिकॉर्ड पेश किए जाएं, ताकि घटना से जुड़े तथ्य सामने आ सकें। याचिका में सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट और राउज एवेन्यू कोर्ट तक पहुंच आसान बनाने के लिए उचित रास्ते और स्पष्ट निर्देश तय करने की मांग भी की गई है। वकीलों के चैंबर और प्रभावित रिहायशी इलाकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के साथ उन वकीलों के लिए भी राहत मांगी गई है, जो प्रतिबंधों के कारण अदालत नहीं पहुंच पा रहे हैं।


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हड़ताल के समर्थन में नहीं है एससीबीए
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि एससीबीए  वकीलों की हड़ताल, अदालतों के बहिष्कार या कामकाज से दूर रहने का समर्थन नहीं करता। एसोसिएशन की मांग है कि वकीलों को बिना अनुचित बाधा के अपना पेशेवर काम करने दिया जाए। याचिका का मसौदा अधिवक्ता रीपक कंसल ने तैयार किया है और इसे एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बागेल ने दाखिल किया है।

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