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टीआरएस के लिए मुफ्त साड़ी योजना बन सकती है गेम चेंजर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Updated Sun, 02 Dec 2018 05:16 AM IST
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के चंद्रशेखर राव
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तेलंगाना में विधानसभा चुनाव को लेकर हर दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर दांवपेंच चल रहा है लेकिन सिरसिला का बुनकर समुदाय राज्य सरकार की मुफ्त साड़ी वितरण योजना के भविष्य को लेकर चिंतित है। यह योजना राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने शुरू की थी।
ऐसे में अगर उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सत्ता में नहीं आती है तो योजना चालू रहेगी या नहीं, इसे लेकर बुनकर काफी परेशान हैं। दरअसल इस योजना ने इन बुनकरों को आजीविका के संकट से बाहर निकाला और आय बढ़ाने में काफी मदद की। ऐसे में यह योजना टीआरएस के लिए चुनाव में गेम चेंजर भी साबित हो सकती है।
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ऐसे में अगर उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सत्ता में नहीं आती है तो योजना चालू रहेगी या नहीं, इसे लेकर बुनकर काफी परेशान हैं। दरअसल इस योजना ने इन बुनकरों को आजीविका के संकट से बाहर निकाला और आय बढ़ाने में काफी मदद की। ऐसे में यह योजना टीआरएस के लिए चुनाव में गेम चेंजर भी साबित हो सकती है।
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सिरसिला के बुनकरों को टीआरएस की सत्ता में वापसी की उम्मीद
सिरसिला सीट से राव के पुत्र केटी रामाराव मैदान में हैं। टीआरएस की मुफ्त साड़ी की योजना ने इस इलाके में साड़ी बनाने के काम को काफी बढ़ावा दिया। माइंड केयर और काउंसिलिंग सेंटर के पुन्नम चंद्र ने बताया कि 2013 तक यहां एक साल में करीब 90-100 बुनकर आत्महत्या कर लेते थे।
लेकिन जागरूकता शिविरों, परामर्श प्रयासों और सरकार की योजनाओं की वजह से परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया कि पावरलूम बुनकरों ने ज्यादा कमाई के मकसद से अपने शुरुआती दो करघों को बढ़ाकर 16 करघे तक कर लिया था। इससे साड़ियों का उत्पादन तो बढ़ा लेकिन उन्हें कोई बाजार नहीं मिला और वे कर्ज जाल में फंस गए।
लेकिन जागरूकता शिविरों, परामर्श प्रयासों और सरकार की योजनाओं की वजह से परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया कि पावरलूम बुनकरों ने ज्यादा कमाई के मकसद से अपने शुरुआती दो करघों को बढ़ाकर 16 करघे तक कर लिया था। इससे साड़ियों का उत्पादन तो बढ़ा लेकिन उन्हें कोई बाजार नहीं मिला और वे कर्ज जाल में फंस गए।
इस सीट से कार्यवाहक मुख्यमंत्री राव के बेटे केटीआर हैं मैदान में
टीआरएस सरकार ने इस योजना के पहले साल 2017 में एक करोड़ साड़ियां हर जाति, समुदाय और धर्म की महिलाओं में राशन की दुकानों के जरिए बांटीं। इस साल भी सरकार की 95 लाख साड़ियां बांटने की योजना है और उत्पादन के ऑर्डर दे दिए गए हैं। एक टेक्सटाइल इकाई के मालिक वेल्दांदी नारायण ने बताया कि यदि योजना बंद कर दी गई तो हमें अपना बिजनेस बंद करना पड़ेगा।
सरकार की मुफ्त साड़ी योजना की वजह से बुनकरों की कमाई 8000-9000 रुपये से बढ़कर 14000-16000 रुपये प्रतिमाह हो गई। साथ ही बुनकरों की खुदकुशी के मामले भी कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि टीआरएस सरकार ही दोबारा सत्ता में आए ताकि यह योजना जारी रहे और बुनकरों को फायदा होते रहे।
सरकार की मुफ्त साड़ी योजना की वजह से बुनकरों की कमाई 8000-9000 रुपये से बढ़कर 14000-16000 रुपये प्रतिमाह हो गई। साथ ही बुनकरों की खुदकुशी के मामले भी कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि टीआरएस सरकार ही दोबारा सत्ता में आए ताकि यह योजना जारी रहे और बुनकरों को फायदा होते रहे।