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पूर्व महिला खिलाड़ी ने बयां किया दर्द, क्या-क्या होता है उनके साथ?
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 22 Jun 2016 09:20 AM IST
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- फोटो : getty
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भारतीय फुटबाल टीम की पूर्व कप्तान सोना चौधरी का कहना है कि ‘गेम इन गेम’ की विक्टिम वो खुद नहीं हैं। किताब मैंने लिखी है इसका मतलब ये नहीं कि उसकी भुक्तभोगी मैं हूं। मैंने हर उस महिला खिलाड़ी को होने वाली दिक्कतें बयां करने की कोशिश की है जिन्हें खेल की दुनिया में मुकाम हासिल करने के लिए बहुत कुछ झेलना पड़ता है।
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मेरी किताब के सिर्फ एक हिस्से के बारे में ही बात हो रही है, जबकि मैंने दूसरे मसले भी उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किताब में यौन उत्पीड़न से इतर मुद्दे भी उठाए गए हैं, उस पर कोई बात नहीं करता। खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षित कोच नहीं हैं, मनोवैज्ञानिक काउंसलर, फिजियोथेरेपिस्ट नहीं हैं। इन सब पर भी खुलकर लिखा है लेकिन इन मुद्दों पर तो बात ही नहीं हो रही..।’
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बीएचयू में मंगलवार को एक कार्यक्रम में शिरकत करने आईं सोना चौधरी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि मेरी इस किताब के आने के बाद नेताओं ने भी टिप्पणियां कीं। कहते हैं सोना के साथ बहुत बुरा हुआ। मुझे सुझाव दिए कि मैं पुलिस में रिपोर्ट कराऊं।
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अगर उन्हें मुझसे इतनी ही सहानुभूति है तो वो करें कार्रवाई। मैंने तो 123 पेज की अपनी ‘रिपोर्ट’ लिख ही दी है। मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली सोना कहती हैं कि इस किताब को लिखने का मकसद मेरा बस इतना था कि आज के और भविष्य के खिलाड़ियों को एक बेहतर माहौल मिल सके।
लोग इस दुनिया की हकीकत से वाकिफ हों और उसके लिए सरकार, राजनेता कुछ काम करें। उन्होंने बताया कि वो बच्चों और महिलाओं के उत्थान के लिए भी काम कर रही हैं।