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यादें: भाई की ससुराल में शहबाला बनकर आए थे अटल, गोरखपुर से था खास रिश्ता

Fri, 17 Aug 2018 04:13 AM IST
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर Updated Fri, 17 Aug 2018 04:13 AM IST
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Former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee had special relationship with Gorakhpur
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की यादें गोरखपुर से भी जुड़ी हुई हैं।

भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गोरखपुर से खास रिश्ता था। 1940 में उनके बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी की शादी अलीनगर के दिवंगत पंडित मथुरा प्रसाद दीक्षित की बेटी रामेश्वरी उर्फ बिट्टन से हुई थी। शादी में किशोर अटल शहबाला बने थे और वे पहली बार गोरखपुर आए थे। इसके बाद यहां आने का सिलसिला जारी रहा। अंतिम बार वे वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद दिवंगत राज नरायन पासवान के समर्थन में चुनावी सभा करने बड़हलगंज आए थे। 

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अलीनगर के माली टोला के कृष्णा सदन में प्रेम बिहारी वाजपेयी की ससुराल है। इस घर में आज भी 1972 में अटल बिहारी बाजपेयी के साथ खींची गई पंडित मथुरा प्रसाद दीक्षित की फोटो टंगी हुई है। मथुरा प्रसाद दीक्षित के दो पुत्र कैलाश नारायण दीक्षित व सूर्यनारायण दीक्षित उम्र में अटल से थोडे़ छोटे थे पर उनकी खूब पटती थी। मां के निधन के बाद राजनीतिक व्यस्तता में जब भी वक्त निकलता अटल अक्सर गोरखपुर आते थे। कृष्णा सदन से उनकी बहुत सारी यादें है। यहां रहने वाले उनके रिश्तेदार पहले की कहानियां सुनाते नहीं अघाते। भाई की सास फूलमती उनका ख्याल मां की तरह रखती थीं। 
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बेसन की सब्जी, दूध बहुत पसंद था
रिश्ते में पूर्व प्रधानमंत्री अटल के भतीजे संजीव दीक्षित (दिवंगत कैलाश दीक्षित के बेटे) बताते हैं, जब भी फूफा जी (अटल) आते थे तो उनके पसंद की बेसन की सब्जी जरूर बनवाई जाती थी। उन्हें दूध भी बहुत पसंद था। रात को दूध पीए बगैर नहीं सोते थे। संजीव अटल बिहारी की हाजिरजवाबी का भी एक संस्मरण सुनाते है। बताया कि, 1972 में फूलमती देवी के ब्रह्मभोज में शरीक होने आए थे। रेलवे गेस्ट हाउस में ठहरे थे। रात में जब उसने कहा गया कि आपको गेस्ट पहुंचा देते हैं तो बड़े जोर से हंसे, बोले हम पहुंचे हुए हैं, पहुंच जाएंगे। अंतिम बार उन्हें तीन साल पहले देखा था, वे एकटक कुछ देर तक निहारते रहे। इशारों से बताया कि पहचान गए हैं पर कुछ बोल नहीं सके। उन्हें देखकर आंखों में आंसू आ गए थे।  
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सरोज का पैर टूट गया, पता है 
रिश्तेदारों की फिक्र उन्हें बहुत थी। संजीव दीक्षित एक वाकया सुनाते हुए भाव विभोर हो गए। चुनाव प्रचार में एक बार अटल जी घर आए थे, बोले सरोज (इलाहाबाद वाली बुआ) का पैर टूट गया है। मालूम है। किसी को पता नहीं था, सुनकर सभी को आश्चर्य हुआ। हमें पता नहीं चला, जबकि वे व्यस्तता के बाद भी सबकी खबर रखते थे। अलीनगर के नागेंद्र सैनी बताते हैं, जब भी वे यहां आते थे तो हम मिलने जाते थे। एक बार नहीं पहुंचे, तो पूछने लगे। कुछ देर बाद जब देखा तो बोले, का हाल बा। सब ठीक है ना।  


रात में निकल जाते थे टहलने
भाजपा के अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद वे तीन दिन लखनऊ में कैलाश दीक्षित के घर दारुलशफा (बी-78) में रुके थे। कैलाश के पुत्र संजीव कहते हैं, पिता जी के साथ टहलने निकल जाते थे। शाम को चाट और ठंडाई पीने जाते थे, उन्हें पता था कि अच्छी दुकान कहां है। खाने-पीने के बहुत शौकीन थे। 

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