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एम्स के पूर्व निदेशक बोले, गुजर गई कोरोना की सुनामी, अब बाजार खोलना बिल्कुल सही

Mon, 18 May 2020 08:23 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 18 May 2020 08:23 PM IST
सार

  • कोरोना का संक्रमण अपेक्षा के अनुरूप भयावह साबित नहीं हुआ, देश की युवा आबादी के कारण मिला लाभ
  • जून-जुलाई में संक्रमण बढ़ने पर भी इलाज में सक्षम होगा देश

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Former AIIMS Director said, Impact of coronavirus slow down
कोरोना की जांच के लिए नमूने एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI (File)

विस्तार

एम्स के पूर्व निदेशक एमसी मिश्रा ने कहा है कि दिल्ली के बाजारों को खोलने का अरविंद केजरीवाल सरकार का फैसला बिल्कुल सही है। आज कोरोना संक्रमण की स्थिति ऐसी है जहां बाजार खोले जाने पर अगर संक्रमण बढ़ता भी है तो संक्रमित लोगों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था की जा सकती है।
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ऐसी स्थिति में सरकार बाजारों को खोलने का खतरा उठा सकती है। उन्होंने कहा कि देश में जिस कोविड की सुनामी की उम्मीद की जा रही थी, वह थम गई है। अब भारत में कोरोना उतना भयावह रूप में कभी सामने नहीं आ सकेगा, जिसकी कल्पना की जा रही थी।
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जून-जुलाई में संक्रमण कुछ बढ़ सकता है, लेकिन अब यह ज्यादा खतरनाक नहीं रहेगा। कुछ संक्रमण के साथ यह हमेशा बना रहेगा और हमें इसके साथ आगे चलना चाहिए।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), दिल्ली के पूर्व निदेशक एमसी मिश्रा ने अमरउजाला डॉट काम से विशेष बातचीत में बताया कि कोरोना की शुरुआत में इससे चार से पांच करोड़ लोगों के संक्रमित होने का अनुमान लगाया जा रहा था।
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लेकिन अब तक का अनुभव बताता है कि यह उतना आक्रामक नहीं साबित हुआ है। संक्रमण की स्थिति बढ़ने पर भी इलाज की पर्याप्त सुविधा लॉकडाउन के दौरान की जा चुकी है। इसलिए अब बाजारों को खोलने का फैसला सही कहा जा सकता है।

क्यों नहीं आक्रामक हुआ कोरोना

भारत में कोरोना अपेक्षा के अनुरूप आक्रामक क्यों नहीं हुआ? इस सवाल के जवाब में डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा कि हमें अपनी युवा आबादी का लाभ मिला है। हमारी 65 फीसदी आबादी 35-40 वर्ष के उम्र के बीच का है।

यह वर्ग कोरोना के मामलों में सबसे कम प्रभावित होता है। जबकि यूरोपीय देशों में आबादी के ज्यादा उम्र का होने के कारण उन्हें इसका नुकसान हुआ है।

हमारे देश में युवाओं में माइल्ड स्तर के केस ज्यादा आए हैं, जो बिना किसी विशेष इलाज के सही हो रहे हैं। ऐसे लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत तक नहीं पड़ रही है। केवल गर्म पानी पीने और थोड़ी सावधानी रखने से भी लोग ठीक हो जा रहे हैं।

लगभग 90 फीसदी लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है। ऐसे में अब कुछ केसों के लिए पूरी आबादी को बंद रखने का फैसला ज्यादा समय तक नहीं अपनाया जा सकता। मजदूरों-श्रमिकों के हितों का ध्यान रखते हुए अर्थव्यव्यवस्था को खोलने का फैसला लेना बहुत आवश्यक था, इसलिए सरकार ने बिल्कुल सही फैसला लिया है।

कैसे बचेंगे

अब कोरोना संक्रमण से कैसे बचा जा सकता है? इस सवाल पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि हमें यह मानकर चलना होगा कि हम स्वयं कोरोना संक्रमित हैं या सामने वाला व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है।

ऐसा करने के दौरान हमें उससे पर्याप्त शारीरिक दूरी रखनी होगी। हाथ धुलने होंगे और चीजों के लेनदेन में सावधानी रखनी होगी। जब तक कोरोना की वैक्सीन का विकास नहीं हो जाता, केवल यही एक तरीका हमें कोरोना से बचा सकता है।

रेड जोंस को रोककर रखें

डॉक्टर एमसी मिश्रा ने कहा कि आज हम जानते हैं कि हमें संक्रमण किससे हो रहा है और किस एरिया में सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हैं।

हमें ऐसे कंटेनमेंट या रेड एरिया को पूरी तरह सील करके रखना चाहिए, बाकी पूरे एरिया को सावधानी का पालन करते हुए खोल देना चाहिए। इससे हम रेड जोंस में ज्यादा व्यापक स्वास्थ्य सेवा दे पाएंगे और बाकी लोगों को भी बचा सकेंगे।

 

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