आतंकवाद किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं, यही समय की मांग: सुषमा स्वराज
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को रायसीना डायलॉग कार्यक्रम के दौरान कहा कि आतंकवाद के मौजूदा खतरे से कोई भी देश सुरक्षित नहीं है। यह सुनिश्चित किया जाना समय की मांग है कि आतंकवाद और उसका इस्तेमाल करने वालों को कतई बर्दाशत न किया जाए।
विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद में अटूट आस्था के जरिए भारत ना केवल अपने लिए, बल्कि विश्वभर के लोगों के लिए न्याय, अवसरों और समृद्धि की बात करता है। हमारे लिए, परिवर्तन केवल घरेलू एजेंडा नहीं बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण है।
स्वराज ने विश्व के समक्ष पेश होने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों पर कहा कि इसमें सबसे पहले आतंकवाद आता है। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद पर गंभीरता से बात की, जिसके बाद कई वैश्विक मंचों पर इसे कानून एवं व्यवस्था के मुद्दे के तौर पर देखा गया।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज कोई भी बड़ा या छोटा देश मौजूदा खतरों विशेषकर राष्ट्रों द्वारा समर्थित एवं प्रायोजित आतंकवाद से सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल युग में कट्टरपंथी विचारों में वृद्धि के चलते आतंकवाद द्वारा उत्पन्न चुनौती और बढ़ गई हैं।
आतंकवाद पर चर्चा के लिए भारत ने 1996 में ही रखा था प्रस्ताव
स्वराज ने कहा कि भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा था कि अंतररष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक सम्मेलन आयोजित किया जाए लेकिन आज भी यह केवल मसौदा बना हुआ है क्योंकि सभी राष्ट्र आतंकवाद की एक आम परिभाषा पर सहमत नहीं हो पाए हैं।
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना समय की मांग है कि आतंकवाद और सुविधा के अनुसार उसका इस्तेमाल करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सामूहिक विनाश के लिए हथियारों का प्रसार और जलवायु परिवर्तन को भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए मुख्य चुनौती बताया।