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SC Update: जबरन धर्म परिवर्तन को सुप्रीम कोर्ट ने बताया संविधान के खिलाफ, इस मुद्दे पर केंद्र से जांच को कहा

Mon, 05 Dec 2022 10:55 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 05 Dec 2022 10:55 PM IST
सार

वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका में धोखाधड़ी और डरा-धमकाकर होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। याचिका में कहा है कि अगर इन पर रोक नहीं लगाई गई, तो जल्द ही भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे।

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Forced religious conversion against Constitution Supreme Court update news in hindi
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर समय-समय पर कानून बनाकर इस पर लगाम लगाने की मांग की जाती रही है। इस बीच, सोमवार को शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जबरन धर्न परिवर्तन को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है। इतना ही नहीं ये संविधान के खिलाफ भी है। 

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दरअसल, वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका में धोखाधड़ी और डरा-धमकाकर होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। याचिका में कहा है कि अगर इन पर रोक नहीं लगाई गई, तो जल्द ही भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे। मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र ने अदालत को बताया कि वह इस तरह के माध्यम से धर्म परिवर्तन पर राज्यों से जानकारी एकत्र कर रहा है।
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जस्टिस एम आर शाह और सी टी रविकुमार की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मुद्दे पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा कि वैधानिक शासन यह निर्धारित करेगा कि विश्वास में कुछ बदलाव के कारण कोई व्यक्ति परिवर्तित हो रहा है या नहीं। 
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इस पर पीठ ने कहा कि 'इसे विरोध के रूप में न लें। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। आखिरकार यह हमारे संविधान के खिलाफ है। जब हर कोई भारत में रहता है, तो उन्हें भारत की संस्कृति के अनुसार कार्य करना पड़ता है।' शीर्ष अदालत अब इस मामले की सुनवाई 12 दिसंबर को करेगी।

Forced religious conversion against Constitution Supreme Court update news in hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

मृतक अंग प्रत्यारोपण के नियमों में एकरूपता की कमी की जांच करे केंद्र
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार यानी आज सुनवाई करते हुए केंद्र से उस याचिका पर विचार करने को कहा जिसमें सभी राज्यों में मृतक अंगों के प्रत्यारोपण से संबंधित नियमों में एकरूपता की मांग की गई है। गिफ्ट ऑफ लाइफ एडवेंचर फाउंडेशन नामक संस्था ने यह याचिका दायर की है। याचिका में मानव अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के विनियमन और निगरानी या 2014 के केंद्रीय नियमों के अनुरूप विभिन्न राज्यों में नियमों में एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकारों को उचित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। इस याचिका पर चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सुनवाई करके हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण नियम, 2014 के साथ राज्यों में मृतक अंग प्रत्यारोपण के नियमों में एकरूपता की कमी की जांच तेजी से करे।  
 

EWS आरक्षण पर केंद्र का फैसला बरकरार रखने के आदेश में डीएमके की पुनर्विचार याचिका

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

डीएमके ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर केंद्र का फैसला बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर सोमवार को शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। डीएमके ने अपनी पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की भी मांग की है। 

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 3:2 के बहुमत से संविधान के 103वें संशोधन अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा था। यह शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण प्रदान करता है। ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने वाले संशोधन को 7 नवंबर को बरकरार रखा गया था। डीएमके ने दलील दी कि इस फैसले का असर 133 करोड़ भारतीयों पर होगा। 

ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल स्थापित करने पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से जवाब मांगा

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आरटीआई - फोटो : FILE PHOTO

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी 25 उच्च न्यायालय रजिस्ट्रियों को ऑनलाइन आरटीआई (सूचना का अधिकार) पोर्टल स्थापित करने की मांग करने वाली याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान याचिकाकर्ता एनजीओ प्रवासी लीगल सेल द्वारा सूचित किया गया कि 25 उच्च न्यायालयों में से केवल नौ ने ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल स्थापित करने की मांग वाली याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया है।

एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा है कि ऑनलाइन सुविधाओं की कमी से लोगों को परेशानी हो रही है क्योंकि उन्हें आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना मांगने के लिए आवेदन दाखिल करने के लिए शारीरिक रूप से उच्च न्यायालयों में आना पड़ता है।

इस पर पीठ ने कहा कि जिन उच्च न्यायालयों ने ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल्स की प्रस्तावित स्थापना पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है, वे तीन सप्ताह की अवधि के भीतर सकारात्मक रूप से ऐसा करेंगे।
 

इन मामलों में कल होगी सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार देने की मांग करने याचिका पर कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसके अलावा शीर्ष अदालत में कल यानी मंगलवार को सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के दायरे में लाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने की याचिका पर भी सुनवाई करेगा।

 34 महिला सैन्य अधिकारियों को पदोन्नति देने के लिए केंद्र ने क्या कदम उठाए : सुप्रीम कोर्ट

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सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

34 महिला सैन्य अधिकारियों को पदोन्नति देने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने पूछा है कि केंद्र ने इस संबंध में अब तक क्या कदम उठाए हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने  साल 2020 में इन सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया था। 

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ को केंद्र और सशस्त्र बलों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर बालासुब्रमण्यम ने बताया कि 22 नवंबर को इस अदालत के समक्ष पिछली सुनवाई के बाद से किसी भी अधिकारी को पदोन्नत नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछली सुनवाई पर दिए गए बयान के बाद से किसी को पदोन्नत नहीं किया गया है। इस पर पीठ ने कहा कि हम इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय हो। साथ ही कहा कि हम चाहते हैं कि आप हमें बताएं कि आप इन महिला अधिकारियों की याचिका पर क्या करने जा रहे हैं। इसके बाद पीठ ने महिला अधिकारियों की याचिका पर आगे की सुनवाई नौ दिसंबर के लिए तय कर दी।

 

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