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आम बजट के साथ रेल बजट: विजन 2019 को ही रफ्तार देगा रेलवे
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Feb 2017 04:35 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पहली बार आम बजट के साथ रेल बजट पेश होने के कारण रेलवे की योजनाओं से अवगत होने का मौका आम लोगों को नहीं मिल सकेगा। परंपरागत तरीके से रेलवे मंत्रालय भी अपने योजनाओं को बजट के बाद जानकारी नहीं दे पाएगा। तीन फरवरी को ही पिंक बुक आने पर पता चलेगा कि रेलवे के किस प्रोजेक्ट को कितनी रफ्तार मिलेगी।
रेलवे मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सरकार के तरफ से आवंटित बजट से रेलवे सुरक्षा, संरक्षा, सुविधा और संकट को ध्यान में रख योजनाओं को अंजाम देगा। इसके अलावा विजन 2019 को अंजाम दिया जाएगा। इसके लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये की मांग रेलवे मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के सामने रखीं। पिछले साल 40 हजार करोड़ रुपये रेलवे को मिले थे।
रेलवे अपने विजन 2019 के तहत मिशन रफ्तार की योजनाओं को क्रियांवयन के लिए विशेष कदम उठाएगा, जिसमें रेलवे ट्रैक बदलने, हाई स्पीड से चलने वाले एलएचबी कोच तैयार करेगा। मिशन रफ्तार के तहत रेलवे का पूरा फोकस ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने को लेकर रहेगा। जहां-जहां बोटल नेक की स्थिति है यानी जिस स्टेशन पर ट्रेनों की हेवी ट्रैफिक होती है वहां जाम की समस्या खत्म करना।
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मुख्य रूप से इलाहाबाद, कानपुर, गाजियाबाद, मुगलसराय में बॉटल नेक की समस्या खत्म करने पर रेलवे का फोकस रहेगा। क्योंकि रेलवे का का मानना है कि इन स्टेशनों पर कम से कम 20-30 मिनट तक ट्रेनों को पास करने में वक्त लग जाता है। इसके साथ ही पैसेंजर ट्रेन की गति बढ़ाने के लिए रेलवे ने इसे मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (मेमू) ट्रेन में बदलेगा। मालगाड़ी की स्पीड बढ़ाने के लिए दो लोको के साथ चलाया जाएगा।
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रेलवे मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सरकार के तरफ से आवंटित बजट से रेलवे सुरक्षा, संरक्षा, सुविधा और संकट को ध्यान में रख योजनाओं को अंजाम देगा। इसके अलावा विजन 2019 को अंजाम दिया जाएगा। इसके लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये की मांग रेलवे मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के सामने रखीं। पिछले साल 40 हजार करोड़ रुपये रेलवे को मिले थे।
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रेलवे अपने विजन 2019 के तहत मिशन रफ्तार की योजनाओं को क्रियांवयन के लिए विशेष कदम उठाएगा, जिसमें रेलवे ट्रैक बदलने, हाई स्पीड से चलने वाले एलएचबी कोच तैयार करेगा। मिशन रफ्तार के तहत रेलवे का पूरा फोकस ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने को लेकर रहेगा। जहां-जहां बोटल नेक की स्थिति है यानी जिस स्टेशन पर ट्रेनों की हेवी ट्रैफिक होती है वहां जाम की समस्या खत्म करना।
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मुख्य रूप से इलाहाबाद, कानपुर, गाजियाबाद, मुगलसराय में बॉटल नेक की समस्या खत्म करने पर रेलवे का फोकस रहेगा। क्योंकि रेलवे का का मानना है कि इन स्टेशनों पर कम से कम 20-30 मिनट तक ट्रेनों को पास करने में वक्त लग जाता है। इसके साथ ही पैसेंजर ट्रेन की गति बढ़ाने के लिए रेलवे ने इसे मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (मेमू) ट्रेन में बदलेगा। मालगाड़ी की स्पीड बढ़ाने के लिए दो लोको के साथ चलाया जाएगा।
ट्रेन
- फोटो : File Photo
मिशन रफ्तार के तहत कॉरीडोर बनाकर ट्रेन की स्पीड बढ़ाने की कवायद भी होगी। 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से ट्रेनों को चलाने केलिए कॉरिडोर बनाया जाएगा। जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूट होगा। पहला कॉरीडोर दिल्ली-इलाहाबाद केलिए तैयार किया जाएगा। दिल्ली-कानपुर रूट पर भी 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की औसत रफ्तार से ट्रेन चलाई जा सकेगी।
मिशन 2019 के तहत जीरो एक्सीडेंट रेल बनाने की कवायद की जाएगी। इसके लिए राष्टï्रीय रेल सुरक्षा कोष में अगले पांच साल के लिए 1 लाख करोड़ रुपए फंड की घोषणा की जा सकती है। डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर के काम को जल्द पूरा करने के लिए फंड मिलेगा। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को भी मजबूती दी जा सकती है।