मुंबई में लॉकडाउन की उड़ी धज्जियां,विनय दुबे नाम का शख्स गिरफ्तार, बांद्रा स्टेशन पहुंचे मजदूरों पर भी एफआईआर
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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बांद्रा में मंगलवार को लोगों ने लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा दी। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के नियमों को धता बताते हुए हजारों प्रवासी मजदूर जमा हो गए। इसी तरह ठाणे के मुंब्रा में भी मजदूर सड़क पर आए। मजदूरों की भारी भीड़ इकट्ठा होने के मामले में नवी मुंबई पुलिस ने विनय दुबे नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह 18 अप्रैल को मजदूरों के बड़े विरोध प्रदर्शन की धमकी दे रहा था।
दरअसल, विनय दुबे नाम का एक व्यक्ति 'चलो घर की ओर' कैंपेन चला रहा था। उसने अपने फेसबुक पर शेयर किए गए पोस्ट में बांद्रा में होने की बात कही थी। लॉकडाउन के बीच विनय दुबे पर भीड़ को गुमराह करने का आरोप है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा-188 और महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
A man, Vinay Dubey has been detained by Navi Mumbai Police in Airoli for threatening a huge protest by migrant labourers in Kurla, Mumbai on 18th April. He has been handed over to Mumbai Police: Navi Mumbai Police #Maharashtra
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 14, 2020
प्रवासी मजदूर लॉकडाउन खत्म होने की उम्मीद में पहुंचे थे बांद्रा व मुंब्रा स्टेशन
दरअसल उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री लॉकडाउन समाप्त करने की घोषणा कर सकते हैं। इस उम्मीद में वह अपने घर जाने के लिए स्टेशन पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं मानने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस के अनुसार ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों के प्रवासी कामगार हैं। वे अपने घर जाने की इजाजत मांग रहे थे। मंगलवार को शाम करीब 4:30 बजे बांद्रा पश्चिम स्टेशन के पास लोग जमा हुए। इनमें ज्यादातर लोग एक विशेष समुदाय से ताल्लुक रखने वाले यूपी और बिहार के थे। वे मेल या एक्सप्रेस ट्रेन चालू करने की मांग कर रहे थे।
मुंबई में लॉकडाउन के उल्लंघन में 5600 के खिलाफ केस
पुलिस ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले में 20 मार्च से अब तक 5,600 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सरकारी आदेश के उल्लंघन के जुर्म में 4220 लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्हें जमानत दे दी गई। 1130 आरोपियों को कोट में पेश होने का नोटिस देकर छोड़ दिया गया, जबकि 259 अब तक फरार हैं। सार्वजनिक स्थलों पर गैरकानूनी तौर पर एकत्र होने के खिलाफ 2,271 मामले दर्ज किए गए हैं।
एक मैसेज से फैली अफवाह और हजारों लोग बांद्रा स्टेशन पर आ धमके
मंगलवार को मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास मजदूरों की भीड़ कैसे इकट्ठा हुई। यह जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक एक मैसेज लोगों के मोबाइल पर आया और लोग जामा मस्जिद पर इकट्ठा हुए। उसके बाद बांद्रा रेलवे स्टेशन पर आ धमके। मजदूरों को यह मैसेज कहां से आया और किसने भेजा, इसकी जांच की जा रही है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि इतने लोगों की भीड़ एक साथ कैसे इकट्ठा हुई। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
लॉकडाउन की उड़ी धज्जियां, बांद्रा की घटना पर क्या बोले जिम्मेदार...
गृहमंत्री शाह ने की सीएम उद्धव से बात
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुंबई की घटना पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की। उन्होंने लॉकडाउन तोड़कर इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बांद्रा इलाके में जमा होने पर चिंता जताई। अधिकारियों ने बताया कि अमित शाह ने उद्धव से कहा कि इस तरह की घटना से कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई कमजोर होगी। प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
उधर इस घटना पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि बांद्रा स्टेशन से मजदूरों को हटा दिया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूर खाना और शेल्टर नहीं चाहते, वे दरअसल अपने-अपने घर जाना चाहते हैं। उन्होंने सूरत का हवाल देते हुए कहा कि वहां हाल में कुछ मजदूरों ने दंगा किया था। केंद्र सरकार उन्हें घर पहुंचाने को लेकर फैसला नहीं ले पाई। जिस दिन से ट्रेनों को बंद किया गया है उसी दिन से राज्य ने ट्रेनों को 24 तक चलाने का अनुरोध किया था, जिससे मजदूर अपने घर वापस जा सकें।
खाना खत्म, इसलिए सड़क पर आए मजदूर : सोमैया
भाजपा नेता किरीट सोमैया न कहा कि प्रवासी मजदूरों को खाने के लाले पड़े हैं और सरकार उन्हें खाना नहीं दे पा रही है। रोज कमाने और खाने वाले लोगों के सामने यह बड़ी समस्या है, इसलिए लोग सड़क पर उतरे।
मजदूरों का सड़क पर उतरना गंभीर घटना
बांद्रा में हजारों मजदूरों का सड़क पर उतरना गंभीर घटना है। यह व्यथित करने वाला है। परप्रांतीय मजदूरों के रहने और खाने की व्यवस्था करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इसमें कोताही को लेकर कई दिनों से राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं, लेकिन सरकार ने कोई उपाय नहीं किया।
- देवेंद्र फडणवीस, विपक्ष के नेता
बांद्रा में जो हुआ, वह होना ही था, क्योंकि उन्हें खाने को मिल नहीं रहा है। गांव लौटने से मना किया जा रहा है। आखिर कब तक दड़बे में बंद रहेंगे। सरकारी राहत सिर्फ कागजी आंकडे़ हैं। कोई भी सरकार कितने लोगों को मुफ्त खाना खिला सकती है और कब तक। क्या कोई और विकल्प नहीं है?
- संजय निरुपम, कांग्रेस नेता
बांद्रा रेलवे स्टेशन के बाहर सैकड़ों प्रवासी मजदूर इस उम्मीद में एकत्र हुए थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम संबोधन में राज्य की सीमा खोलने की घोषणा कर सकते हैं। मजदूरों को लगा कि वह अब अपने घर लौट सकते हैं। हालांकि अब वहां स्थिति नियंत्रण में है।
-अनिल देशमुख, गृहमंत्री महाराष्ट्र