खुफिया एजेंसी से कम नहीं है किसान आंदोलन की 'सेंट्रल इंटेलिजेंस', सीसीटीवी से तेज हैं इनकी आंखें...
सेंट्रल इंटेलिजेंस में वरिष्ठ पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। सेना और दूसरी नौकरियों से सेवानिवृत्त लोगों को निगरानी के काम में लगाया गया है...
सेंट्रल इंटेलिजेंस में वरिष्ठ पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। सेना और दूसरी नौकरियों से सेवानिवृत्त लोगों को निगरानी के काम में लगाया गया है...
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दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन को शुरू हुए 19 दिन हो चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। सरकार की तरफ से आंदोलन को कमजोर करने और उसे तोड़ने की कोशिशें लगातार जारी हैं। किसानों के शांतिपूर्वक आंदोलन को हिंसा की भेंट चढ़ाने के दर्जनों प्रयास हो चुके हैं, मगर किसानों ने किसी के उकसावे में आकर कानून व्यवस्था खराब करने जैसा कोई काम नहीं किया।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत कहते हैं, सरकारी खुफिया एजेंसी से कम नहीं है किसान आंदोलन की 'सेंट्रल इंटेलिजेंस'। भले ही हमारे पास सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, लेकिन किसान की आंखें उससे भी ज्यादा दूर का और साफ देख लेती हैं। दिल्ली की सीमा पर जहां भी किसान आंदोलन चल रहा है, वहां के हालात शांतिपूर्वक रहें, इसके लिए हमने 'सेंट्रल इंटेलिजेंस' टीम गठित कर रखी हैं। इसमें वरिष्ठ पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। सेना और दूसरी नौकरियों से सेवानिवृत्त लोगों को इंटेलिजेंस के काम में लगाया गया है। युवाओं की इसमें बड़ी भूमिका है।
राकेश टिकैत बताते हैं, जब यह आंदोलन चला, तभी से ही इसे तोड़ने और किसानों को गुमराह करने के प्रयास शुरू हो गए थे। आंदोलन में शामिल युवाओं को उकसाया गया, मगर वे किसी बहकावे में नहीं आए। इसके बाद हमने टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर समेत अन्य जगहों पर जमा हुए किसानों को सचेत कर दिया।
निगरानी के लिए हर एक आंदोलन स्थल पर टीम गठित कर दी गई। वहां पर सरकारी खुफिया तंत्र ने तो पहले से ही डेरा डाल रखा था। आंदोलन स्थल के चप्पे-चप्पे पर खुफिया तंत्र के लोग मौजूद थे। वे किसानों के बीच ही बैठे रहते हैं। हमारी बातें सुनकर सरकार को रिपोर्ट देते हैं। कई अच्छे लोग भी मिलते हैं। वे अपना परिचय देते वक्त इधर-उधर की नहीं करते। साफ कह देते हैं कि वे खुफिया महकमे से हैं। हम भी उन्हें अपने साथ बैठाते हैं, वे खाना भी वहीं खाते हैं।
बतौर राकेश टिकैत, हमने अपनी सेंट्रल इंटेलिजेंस को सक्रिय कर रखा है। आंदोलन स्थल के चारों तरफ हमारी टीम लगी रहती हैं। कौन किस जत्थे का सदस्य है, क्या वह निजी क्षमता में आंदोलन स्थल पर आया है, आदि सवाल पूछ लेते हैं। वहां ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिलता, जो अनजान हो। अगर ऐसा कोई मिलता भी है, तो उसकी पहचान पूछ ली जाती है। उसके आसपास के गांव के किसानों का नाम बताने के लिए कहा जाता है।
गाजीपुर बॉर्डर पर कुछ गलत लोग आंदोलन में घुसने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें पहचान कर बाहर निकाला गया। युवा साथी दिन रात ड्यूटी देकर आंदोलन स्थल पर इंटेलिजेंस इनपुट जुटाते हैं। वे लोग अपने मोबाइल कैमरों में आंदोलन स्थल के छोटे-छोटे वीडियो बना लेते हैं। बाद में उनका विश्लेषण कर यह देखते हैं कि तस्वीरों में कोई ऐसा संदिग्ध व्यक्ति तो नहीं है।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह कहते हैं, अभी तक आंदोलन में कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है, इसका मतलब हमारा निगरानी तंत्र अच्छे से काम कर रहा है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, सरकार ने आंदोलन को तोड़ने का हर संभव प्रयास किया है। जहां भी किसानों के प्रदर्शन चल रहे हैं, वहां सेंट्रल इंटेलिजेंस की इकाई गठित की गई है।
हमारे वरिष्ठ सदस्य रोजाना प्रदर्शन स्थल की रिपोर्ट पर चर्चा करते हैं। रात के समय आंदोलन स्थल पर नजर रखने के लिए विशेष टीम बनाई गई हैं। इन टीमों के सदस्य एक पल के लिए भी नींद नहीं लेते, वे सारी रात जागते रहते हैं। हर सेक्टर में 10 से 12 लोग होते हैं। इन्हें कुछ गलत लगता है तो ये तुरंत अपने वरिष्ठ सदस्यों को जाकर बता देते हैं।