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नकली करेंसी पर चोट करने में कामयाब रही नोटबंदी, अब घटने लगे हैं मामले

Fri, 08 Nov 2019 04:03 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Nov 2019 04:03 PM IST
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Fake currency flow slowing in india after demonetization in India 2016
बरामद जाली नोट। - फोटो : अमर उजाला

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2016 में आज ही के दिन यानी आठ नवंबर को लागू हुई नोटबंदी के बाद से लेकर अब तक विपक्ष यह कहकर केंद्र सरकार पर हमले बोल रहा है कि नोटबंदी एक आपदा थी। इसने देश की अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी। खैर, जो भी हो, लेकिन नोटबंदी के बाद नकली करेंसी के प्रवाह पर काफी हद तक लगाम लगी है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है। इसके मुताबिक, नकली करेंसी पर चोट करने में नोटबंदी कामयाब रही है। अब नकली करेंसी के मामले और आरोपियों की संख्या घटने लगी है।


साल 2016 में कुल 24.61 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई। इसके अगले साल 28 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोट जब्त हुए। अब बारी आती है 2018 की। इस दौरान कुल 17.75 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई। 2019 में पहले छह माह के आंकड़े देखें तो कुल 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी पकड़ी गई है।

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नोटबंदी के दौरान 24.61 करोड़ की नकली करेंसी जब्त

बता दें कि 2016 में जब नोटबंदी लागू हुई तो यह माना गया था कि देश में अब नकली करेंसी का प्रवाह बंद हो जाएगा। नोटबंदी के अगले साल भले ही नकली करेंसी के मामलों में इजाफा देखने को मिला, लेकिन उसके बाद ये मामले घटने शुरू हो गए। एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि नोटबंदी लागू होने के अगले ही साल नकली करेंसी में अच्छा खासा इजाफा हो गया था। जिस साल नोटबंदी लागू हुई, उस दौरान 24.61 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त हुई थी।

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विभिन्न एजेंसियों एवं राज्यों के पुलिस बल ने इस बाबत 1398 मामले दर्ज किए और 1376 आरोपियों को गिरफ्तार किया। अगले साल यानी 2017 में यह उम्मीद थी कि नकली करेंसी का ग्राफ अब बहुत नीचे चला जाएगा, लेकिन परिणाम इसके विपरित आया। जानकारों का कहना है कि 2017 में नकली करेंसी का ज्यादा प्रवाह नहीं हुआ। इस दौरान ज्यादातर वही नकली करेंसी बाहर आई, जिसे आरोपियों ने कहीं न कहीं दबा रखा था। सालभर में 28 करोड़ रुपये के मूल्य के नकली नोट जब्त किए गए। ऐसे नोटों की कुल संख्या साढ़े तीन लाख से अधिक थी।

2018 में नकली करेंसी का ग्राफ नीचे आया

2017 में 28 करोड़ रुपये के मूल्य के नकली नोट जब्त किए गए। गुजरात में नौ करोड़ आठ लाख रुपये के नकली नोट, दिल्ली में छह करोड़ 78 लाख रुपये, उत्तर प्रदेश में दो करोड़ 86 लाख रुपये, पश्चिम बंगाल में एक करोड़ 93 लाख रुपये और केरल में एक करोड़ 30 लाख रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई। इस संबंध में 978 मामले दर्ज करने के अलावा 1046 आरोपी जेल में पहुंचा दिए गए। 2018 में नकली करेंसी का प्रवाह कम हुआ। नतीजा, ऐसे मामलों की संख्या घट गई। सालभर में 17.75 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई, 884 मामले दर्ज हुए और 969 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

2019 में 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त

यदि 2019 की बात करें तो पहले छह माह के दौरान कुल 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई, 254 सौ मामले दर्ज हुए और 357 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अगर इस रिपोर्ट की तुलना गत वर्ष के पहले छह माह से करें, तो नकली करेंसी का ग्राफ साठ-सत्तर फीसदी तक गिर गया है। पिछले दो वर्षों के दौरान नकली करेंसी को लेकर विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां, जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और राज्यों के पुलिस विभाग काफी सक्रिय रहे हैं।

नकली करेंसी में भेद करना आसान नहीं

एनआईए के एक अधिकारी का कहना है कि नकली नोटों की गुणवत्ता इतनी ज्यादा उच्च होती है कि उन्हें आसानी से नहीं पहचाना जा सकता। विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों ने नकली करेंसी के मामले में 370 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं। आरोपियों से की गई पूछताछ में पता चला है कि पिछले कई वर्षों से नकली नोटों में भारतीय करेंसी वाले तमाम सुरक्षा भेद डाले गए हैं। इन्हें केवल तकनीकी बारीकियों को समझने वाले बैंक कर्मचारी या फिर जांच एजेंसियां ही पकड़ पाती हैं। आम लोग आसानी से इस करेंसी को नहीं पहचान पाते।

दिल्ली नकली करेंसी का केंद्र बनी

दिल्ली या दूसरे राज्यों में जितनी भी नकली करेंसी पकड़ी गई है, वह पाकिस्तान की उच्च गुणवत्ता वाली प्रेस में छपी हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तो पहले ही अपनी जांच रिपोर्ट में कह चुकी है कि नकली नोट बनाने के लिए जिस स्याही का इस्तेमाल किया गया है, उसका इस्तेमाल पाकिस्तानी करेंसी छापने के लिए किया जाता है। दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में बने आत्मनिर्भर आपराधिक नेटवर्क के जरिए ये नकली करेंसी हमारे देश में पहुंचाई जाती है। वहीं दिल्ली नकली करेंसी का केंद्र बन चुकी है।

प्रियंका गांधी ने साधा केंद्र पर निशाना

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि आठ नवंबर, 2016 को आज के दिन यह तुगलकी फरमान जारी हुआ था। तीन साल बीत गए हैं, लेकिन नोटबंदी का परिणाम पूरा देश भुगत रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था चौपट है, रोजगार खत्म, न आतंकवाद रुका, न जाली नोटो का कारोबार, फिर कौन है जिम्मेदार।



सरकार और इसके नीम हकीमों के किए गए सभी दावे कि 'नोटबंदी सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज' है, एक-एक कर फेल हो गए। नोटबंदी एक आपदा थी, जिसने हमारी अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी। नोटबंदी की तीसरी बरसी पर अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने देश की अर्थव्यवस्था के आउटलुक को नेगेटिव बता कर फिर साबित कर दिया कि नोटबंदी, 'मानव निर्मित एक भयावह आपदा थी' सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान, मौन क्यों हैं।

 

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