राज्यसभा में चेहरे बदलेंगे, पर सदन के स्वरूप में मामूली फेरबदल
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अप्रैल में राज्यसभा के लिए जिन राज्यों में मतदान होंगे, उनमें अधिकतर गैर भाजपा शासित राज्य हैं। लेकिन इन राज्यों में भाजपा और सहयोगी दलों के विधायकों की संख्या सदन के वर्तमान स्वरूप पर कोई बड़ा असर नहीं डालेगी।
विपक्षी दलों और कांग्रेस को ये चुनाव कुछ राहत दे सकते हैं। कांग्रेस के सामने चुनौती राज्यों से नए सदस्यों को उच्च सदन पहुंचाने की है। पार्टी को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में खाली हो रहीं आठ सीटों में पांच पर जीत की उम्मीद।
रिटायर होने वाले सदस्यों में सर्वाधिक महाराष्ट्र से
अप्रैल को रिटायर होने वाले 51 सदस्यों में सर्वाधिक 7 महाराष्ट्र से, तमिलनाडु से 6 और बिहार व पश्चिम बंगाल से 5-5 सदस्य हैं। वहीं गुजरात, आंध्रप्रदेश से चार-चार और ओडिशा, राजस्थान, मध्यप्रदेश से तीन-तीन नए सदस्य चुने जाएंगे। झारखंड, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से दो-दो और असम, हरियाणा, मणिपुर, मेघालय व हिमाचल प्रदेश से एक-एक सदस्य चुना जाएगा।
वहीं साल के अंत में 25 नवंबर को यूपी से एक साथ 11 सदस्य रिटायर होंगे। जून में भी पांच सदस्य रिटायर हो रहे हैं, जिनमें एक आंध्रप्रदेश और चार कर्नाटक से होंगे, वहीं जुलाई में मिजोरम से एक सीट खाली होगी।
दो केंद्रीय मंत्रियों व उपसभापति का भी खत्म हो रहा कार्यकाल
इस साल राज्यसभा से रिटायर होने वाले सदस्यों में भाजपा के 19 और कांग्रेस के 17 सदस्य शामिल हैं। रिटायर होने वाले प्रमुख नेताओं में उपसभापति हरिवंश के साथ बिहार के जदयू के तीन सदस्य शामिल हैं। महाराष्ट्र से आरपीआई के नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले अप्रैल में और हरदीप सिंह पुरी नवंबर में रिटायर होंगे।