नोटबंदी की वजह से लोगों ने खर्चे में की कटौती
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पुराने नोट बंद करने के सरकार के फैसले के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी-लंबी लाइन देखी जा रही हैं। जहां कई लोगों ने इस फैसले पर गहरी नाराजगी दिखाई तो कई लोगों ने इसका समर्थन किया। ऐसे में हमने अपने अपने फेसबुक पेज पर पाठकों से जानना चाहा कि उनके अनुभव कैसे रहे? हमें बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं मिलीं। कुछ फैसले के समर्थन में जबकि कुछ विरोध में। इनमें से कुछ लोगों के अनुभव हम यहां शेयर कर रहे हैं। आप भी इस लिंक पर क्लिक करके अपनी राय हमारे फेसबुक पेज पर रख सकते हैं।
देव कुमार: मैं इस वक्त यात्रा कर रहा हूं और मुझे इतनी मुश्किलें पेश आ रही हैं कि पूछिए मत। होटल वाले, रेस्त्रां वाले पुराने नोट नहीं ले रहे हैं। होटल में रूम नहीं मिल रहा है। रेल के टिकट काउंटर पर 135 रुपए की टिकट थी, उसे 500 का नोट दिया तो उसने कहा कि चेंज नहीं है। मजबूरी में पैसे छोड़ने पड़े। मोदी जी को मैं सपोर्ट करता हूं लेकिन इतना बड़ा फैसला लेने से पहले तैयारी तो कर लेते।
पीयूष कुमार: अभी मैं चंडीगढ़ में हूं, कहीं भी लंबी लाइन नहीं देखी। कुछ एटीएम पर 10 लोग हैं। हमारा मीडिया दिल्ली को ही इंडिया मान लेता है। उनके रिपोर्टर सिर्फ दिल्ली में ही हैं और वो दिल्ली की न्यूज देकर मान लेते है कि पूरा भारत समा गया उसमें।
फेसबुक डिबेट
आनंद लोढ़ा: जिंदगी में इतनी शांति और स्थिरता कभी महसूस नहीं हुई जितनी आजकल हो रही है। न कुछ खरीदने की इच्छा न कहीं जाने की इच्छा।
सफदर अली: सुबह सात बजे घर से निकला, पांच बजे घर पहुंचा दो हजार रुपए के दो नोट लेकर। जो कि ना होने के बराबर हैं। अब कोई सामान खरीदूं तो लोग चेंज देने को तैयार नहीं हैं। देश लगभग इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है।
शिखा शुक्ला: मैं तो इस दौर में थोड़ी सी कंजूस हो गई हूं। बचा-बचा कर खर्च कर रही हूं। नोटबंदी जिंदाबाद।
दीपएक एसके: दो घंटे लाइन में लगकर पुराने नोट बदलवा कर आया हूं। एक हफ्ते से मैंने बजट कंट्रोल किया है। ईमानदार लोग चुपचाप जाकर धैर्य के साथ नोट बदलवा रहे हैं। बाकी लोग फैसले की आलोचना कर रहे हैं।