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West Asia: 'पश्चिम एशिया संघर्ष हमारी पीढ़ी का सबसे गंभीर संकट', पूर्व उप-एनएसए ने बताए इसके खतरे

Thu, 12 Mar 2026 02:37 AM IST
Nitin Gautam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 12 Mar 2026 02:37 AM IST
सार

भारत के पूर्व डिप्टी एनएसए ने कहा कि जब रूस, चीन और यूरोप जैसे बड़े देश भी पश्चिम एशिया संकट पर अपेक्षाकृत शांत हैं, तब भारत के लिए सीमित विकल्प ही मौजूद हैं। उन्होंने कहा, 'आपको बस तूफान गुजरने का इंतजार करना होगा और उसके बाद अपने काम पर लौटना होगा।'

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Ex-DyNSA Pankaj Saran on West Asia said Most serious crisis we have faced in living memory
पंकज सरन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने बुधवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को भारत के लिए अपनी पीढ़ी का सबसे गंभीर संकट बताया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में भारत को फिलहाल तूफान गुजरने का इंतजार करना होगा और उसके बाद ही सामान्य गतिविधियों की ओर लौटना संभव होगा। दिल्ली में एक बातचीत में सरन ने कहा कि यह संघर्ष दुनिया में मौजूद शक्ति के असमान ढांचे की याद दिलाता है और यह भी दिखाता है कि नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था लगभग समाप्त हो चुकी है।
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सरन बोले- ये हमारी पीढ़ी का सबसे गंभीर संकट
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह हमारी पीढ़ी का सबसे गंभीर संकट है। कई मायनों में यह यूक्रेन युद्ध से भी ज्यादा गंभीर है, क्योंकि यह हमारे दरवाजे पर है। इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, मानव संसाधन, विदेशों से आने वाले धन और क्षेत्र में हमारे भू-राजनीतिक विकल्पों पर पड़ता है।' सरन ने बताया कि पश्चिम एशिया पिछले 25 वर्षों से लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है—चाहे वह अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लीबिया, यमन, सूडान या गाजा का संकट हो।
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पश्चिम एशिया संकट का किसी के पास कोई जवाब नहीं
सरन ने कहा कि यह क्षेत्र ऊर्जा, कट्टरपंथ, आतंकवाद, इस्राइल के क्षेत्रीय प्रभाव और अमेरिका की वैश्विक शक्ति के जटिल मेल से बना एक बेहद खतरनाक मिश्रण बन गया है। पंकज सरन ने कहा, 'आज स्थिति यह है कि पूरी दुनिया—रूस, चीन और यूरोप समेत—देख रही है कि आगे क्या होगा। किसी के पास भी स्पष्ट जवाब नहीं है कि यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा।' भारत की संभावित भूमिका पर पूछे जाने पर सरन ने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं के बारे में यथार्थवादी रहना होगा। उन्होंने कहा कि जब रूस, चीन और यूरोप जैसे बड़े देश भी इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत शांत हैं, तब भारत के लिए सीमित विकल्प ही मौजूद हैं। उन्होंने कहा, 'आपको बस तूफान गुजरने का इंतजार करना होगा और उसके बाद अपने काम पर लौटना होगा।'
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सरन बंगलूरू स्थित थिंक-टैंक Synergia द्वारा दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। यह सम्मेलन 11 से 13 मार्च तक चलेगा। सम्मेलन में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद, पूर्व रक्षा मंत्री मरिया दीदी और भारत व पड़ोसी देशों के कई रणनीतिक विशेषज्ञ भी शामिल हुए।


अब वैश्विक व्यवस्था में कोई नियम नहीं बचे
अपने संबोधन में सरन ने कहा कि आज दुनिया ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां व्यवहारिक रूप से कोई नियम नहीं बचे हैं और जो नियम हैं, उन्हें तोड़ने वाली वैश्विक महाशक्तियां ही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के पास बहुत सीमित विकल्प हैं और उनकी संप्रभुता भी कई मायनों में सीमित हो जाती है।  पंकज सरन ने कहा, 'हमें वैश्विक झटकों से खुद को बचाने के लिए देश के भीतर और अधिक मजबूत होना होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब राष्ट्रीय रणनीति के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है और दुनिया तेजी से बदल रही है। सरन ने कहा, जिस अमेरिका-नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के तहत दुनिया लगभग 80 वर्षों तक चली, उसी व्यवस्था को अब खुद अमेरिका बदल रहा है।


 
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