{"_id":"58e38bc94f1c1bdc315b4d22","slug":"evm-protests-and-support-of-evm-let-s-complete-story-of-evm","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ईवीएम का विरोध और ईवीएम का समर्थन, जाने ईवीएम की पूरी कहानी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
ईवीएम का विरोध और ईवीएम का समर्थन, जाने ईवीएम की पूरी कहानी
प्रदीप कुमार / बीबीसी हिंदी.कॉम
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्यप्रदेश के भिंड जिले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान किसी भी बटन को दबाने पर वीवीपैट पर्चा भारतीय जनता पार्टी का निकलने के बाद जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटा दिया गया है। चुनाव आयोग ने भी इस मामले की पूरी जानकारी राज्य की निर्वाचन अधिकारी सेलिना सिंह से मांगी थी। इसके बाद ये कार्रवाई हुई है। सेलिना सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि मशीनें ठीक से कैलिब्रेट नहीं हुई थीं, इसलिए ऐसा मामला सामने आया।
मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर आगामी नौ अप्रैल को चुनाव होने हैं। इन सीटों पर उन ईवीएम मशीनों के जरिए चुनाव कराया जाएगा जिनमें वीवीपैट लगे हुए होंगे, यानी वो पेपर जिससे वोट डालने वाले को पता चलता है कि उसका वोट किसे गया है। उधर इस मामले की जांच करने पहुंची चुनाव आयोग की टीम ने भी मशीन में खराबी पाई है। भोपाल में मीडिया के सामने इन अधिकारियों ने ये भी बताया है कि इस मशीन का इस्तेमाल यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कानपुर में किया गया था।
हालांकि इस विवाद ने एक बार फिर से ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस को हवा दे दी है। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे के तुरंत बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने ईवीएम की भूमिका पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा था कि अगर किसी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं तो उसकी जांच कराई जानी चाहिए। पंजाब विधानसभा के नतीजों पर आम आदमी पार्टी ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे जिन्हें रविवार को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर आगामी नौ अप्रैल को चुनाव होने हैं। इन सीटों पर उन ईवीएम मशीनों के जरिए चुनाव कराया जाएगा जिनमें वीवीपैट लगे हुए होंगे, यानी वो पेपर जिससे वोट डालने वाले को पता चलता है कि उसका वोट किसे गया है। उधर इस मामले की जांच करने पहुंची चुनाव आयोग की टीम ने भी मशीन में खराबी पाई है। भोपाल में मीडिया के सामने इन अधिकारियों ने ये भी बताया है कि इस मशीन का इस्तेमाल यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कानपुर में किया गया था।
विज्ञापन
हालांकि इस विवाद ने एक बार फिर से ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस को हवा दे दी है। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे के तुरंत बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने ईवीएम की भूमिका पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा था कि अगर किसी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं तो उसकी जांच कराई जानी चाहिए। पंजाब विधानसभा के नतीजों पर आम आदमी पार्टी ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे जिन्हें रविवार को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया।
विज्ञापन
भाजपा ने 2009 में विरोध किया
भारतीय जनता पार्टी इन दिनों ईवीएम के इस्तेमाल का समर्थन कर रही है, लेकिन वह इसका विरोध करने वाली सबसे पहली राजनीतिक पार्टी थी। 2009 में जब भारतीय जनता पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा, तब पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने सबसे पहले ईवीएम पर सवाल उठाए थे।
इसके बाद पार्टी ने भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों, कई गैर सरकारी संगठनों और अपने थिंक टैंक की मदद से ईवीएम मशीन के साथ होने वाली छेड़छाड़ और धोखाधड़ी को लेकर पूरे देश में अभियान चलाया। भारतीय जनता पार्टी इन दिनों ईवीएम के इस्तेमाल का समर्थन कर रही है, लेकिन वह इसका विरोध करने वाली सबसे पहली राजनीतिक पार्टी थी।
2009 में जब भारतीय जनता पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा, तब पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने सबसे पहले ईवीएम पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी ने भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों, कई गैर सरकारी संगठनों और अपने थिंक टैंक की मदद से ईवीएम मशीन के साथ होने वाली छेड़छाड़ और धोखाधड़ी को लेकर पूरे देश में अभियान चलाया।
इसके बाद पार्टी ने भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों, कई गैर सरकारी संगठनों और अपने थिंक टैंक की मदद से ईवीएम मशीन के साथ होने वाली छेड़छाड़ और धोखाधड़ी को लेकर पूरे देश में अभियान चलाया। भारतीय जनता पार्टी इन दिनों ईवीएम के इस्तेमाल का समर्थन कर रही है, लेकिन वह इसका विरोध करने वाली सबसे पहली राजनीतिक पार्टी थी।
2009 में जब भारतीय जनता पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा, तब पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने सबसे पहले ईवीएम पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी ने भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों, कई गैर सरकारी संगठनों और अपने थिंक टैंक की मदद से ईवीएम मशीन के साथ होने वाली छेड़छाड़ और धोखाधड़ी को लेकर पूरे देश में अभियान चलाया।
भाजपा नेताओं ने किताब में उठाए सवाल
इस किताब की प्रस्तावना लाल कृष्ण आडवाणी ने लिखी और इसमें आंध्र प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री एन चंद्राबाबू नायडू का संदेश भी प्रकाशित है। इतना ही नहीं पुस्तक में वोटिंग सिस्टम के एक्सपर्ट स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड डिल ने भी बताया है कि ईवीएम का इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने किताब की शुरुआत में लिखा है- "मशीनों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है, भारत में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन इसका अपवाद नहीं है।
ऐसे कई उदाहरण हैं जब एक उम्मीदवार को दिया वोट दूसरे उम्मीदवार को मिल गया है या फिर उम्मीदवारों को वो मत भी मिले हैं जो कभी डाले ही नहीं गए।" किताब का चौथा अध्याय ऐसे तमाम उदाहरणों से भरा है। लेकिन अब मौजूदा विवाद के बाद इस मुद्दे पर जीवीएल नरसिम्हा राव कोई प्रतिक्रिया देना नहीं चाहते हैं। हालांकि वे ये जरूर कहते हैं कि "ईवीएम का विरोध कर रही पार्टियों को चुनाव आयोग ने जवाब दे दिया है।"
जीवीएल नरसिम्हाराव ने अपनी किताब में 2010 के ही उस मामले का जिक्र विस्तार से किया है जिसमें हैदराबाद के टेक एक्सपर्ट हरि प्रसाद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी के दो रिसर्चरों के साथ मिलकर ईवीएम को हैक करने का दावा किया था। इस प्रोजेक्ट में शामिल प्रोफेसर जे एलेक्स हाल्डरमैन ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि मोबाइल फोन से संदेश भेजकर वे ईवीएम मशीन के नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे कई उदाहरण हैं जब एक उम्मीदवार को दिया वोट दूसरे उम्मीदवार को मिल गया है या फिर उम्मीदवारों को वो मत भी मिले हैं जो कभी डाले ही नहीं गए।" किताब का चौथा अध्याय ऐसे तमाम उदाहरणों से भरा है। लेकिन अब मौजूदा विवाद के बाद इस मुद्दे पर जीवीएल नरसिम्हा राव कोई प्रतिक्रिया देना नहीं चाहते हैं। हालांकि वे ये जरूर कहते हैं कि "ईवीएम का विरोध कर रही पार्टियों को चुनाव आयोग ने जवाब दे दिया है।"
जीवीएल नरसिम्हाराव ने अपनी किताब में 2010 के ही उस मामले का जिक्र विस्तार से किया है जिसमें हैदराबाद के टेक एक्सपर्ट हरि प्रसाद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी के दो रिसर्चरों के साथ मिलकर ईवीएम को हैक करने का दावा किया था। इस प्रोजेक्ट में शामिल प्रोफेसर जे एलेक्स हाल्डरमैन ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि मोबाइल फोन से संदेश भेजकर वे ईवीएम मशीन के नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।
'होलसेल फ्रॉड संभव'
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी ईवीएम के इस्तेमाल का जोर शोर से विरोध करते रहे हैं। उन्होंने 2009 के चुनावी नतीजे के बाद सार्वजनिक तौर पर ये आरोप लगाया था कि 90 ऐसी सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की है जो असंभव है। स्वामी के मुताबिक ईवीएम के जरिए वोटों का 'होलसेल फ्रॉड' संभव है।
वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल कहते हैं, "जिन लोगों ने सबसे ज्यादा विरोध किया है वो आज चुप हैं। अपनी सुविधा के हिसाब से लोगों ने इसका विरोध किया और अब दूसरों के विरोध को खारिज कर रहे हैं।" वैसे भारत में ईवीएम के प्रयोग पर सबसे पहले सवाल दिल्ली हाई कोर्ट में वरिष्ठ वकील प्राण नाथ लेखी (बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी के पिता) ने 2004 में ही उठाया था।
कांग्रेस ने भी उठाया सवाल
2009 के आम चुनावों में जब बीजेपी के नेता ईवीएम पर सवाल उठा रहे थे, ठीक उसी वक्त ओडिशा कांग्रेस के नेता जेबी पटनायक ने भी राज्य विधानसभा में बीजू जनता दल की जीत की वजह ईवीएम को ठहराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद कांग्रेस के नेता और असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने भी ईवीएम पर सवाल उठाए थे और कहा था कि बीजेपी की जीत की वजह ईवीएम है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि भारत में जब तक पार्टियां चुनाव नहीं हारने लगतीं तब तक उन्हें ईवीएम मशीन से कोई शिकायत नहीं होती।
वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल कहते हैं, "जिन लोगों ने सबसे ज्यादा विरोध किया है वो आज चुप हैं। अपनी सुविधा के हिसाब से लोगों ने इसका विरोध किया और अब दूसरों के विरोध को खारिज कर रहे हैं।" वैसे भारत में ईवीएम के प्रयोग पर सबसे पहले सवाल दिल्ली हाई कोर्ट में वरिष्ठ वकील प्राण नाथ लेखी (बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी के पिता) ने 2004 में ही उठाया था।
कांग्रेस ने भी उठाया सवाल
2009 के आम चुनावों में जब बीजेपी के नेता ईवीएम पर सवाल उठा रहे थे, ठीक उसी वक्त ओडिशा कांग्रेस के नेता जेबी पटनायक ने भी राज्य विधानसभा में बीजू जनता दल की जीत की वजह ईवीएम को ठहराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद कांग्रेस के नेता और असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने भी ईवीएम पर सवाल उठाए थे और कहा था कि बीजेपी की जीत की वजह ईवीएम है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि भारत में जब तक पार्टियां चुनाव नहीं हारने लगतीं तब तक उन्हें ईवीएम मशीन से कोई शिकायत नहीं होती।
जब लालू और ममता ने किया विरोध
लेकिन ये कहना भी पूरी तरह सच नहीं है। भारत में ईवीएम का विरोध वो नेता भी कर रहे हैं, या फिर पूर्व में कर चुके हैं, जिन्होंने चुनाव में जोरदार कामयाबी हासिल की है। इसमें राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं। ये दोनों नेता ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं।
ये अलग बात है कि इन्हें अलग चुनावों में बहुमत भी मिला है। इन दोनों के अलावा दिल्ली में जोरदार जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को बैन किए जाने की मांग कर रहे हैं।
पहले तो ये कहा जा रहा था वीवीपैट लगाने के बाद ईवीएम मशीन के साथ किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं होगी लेकिन मध्य प्रदेश के मामले के बाद वीवीपैट के साथ भी ईवीएम संदेह के घेरे में आ चुकी है।
ये अलग बात है कि इन्हें अलग चुनावों में बहुमत भी मिला है। इन दोनों के अलावा दिल्ली में जोरदार जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को बैन किए जाने की मांग कर रहे हैं।
पहले तो ये कहा जा रहा था वीवीपैट लगाने के बाद ईवीएम मशीन के साथ किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं होगी लेकिन मध्य प्रदेश के मामले के बाद वीवीपैट के साथ भी ईवीएम संदेह के घेरे में आ चुकी है।
संदेह के बाद क्या होगा?
वैसे चुनाव आयोग समय समय पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को आधुनिक बनाने की दिशा में काम करता रहा है। हाल ही में पांच राज्यों में होने वाले चुनाव से ठीक पहले भी चुनाव आयोग ने ईवीएम को आधुनिक बनाने के लिए टेंडर मंगाए थे। वैसे ये जानना दिलचस्प है कि भारत में 2004 के आम चुनावों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल पूरे देश में हुआ है और उसके बाद किसी सीट पर कभी भी वोटों की दोबारा गिनती नहीं हुई है।
अगर किसी सूरत में इसकी नौबत आए, तो ये संभव ही नहीं होगा। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल तर्कसंगत नहीं मानते। उनका कहना है, "मौजूदा समय में भारत का प्रत्येक राजनीतिक दल कभी ना कभी ईवीएम का विरोध कर चुका है।
ऐसे में संसद की संयुक्त संसदीय समिति को ईवीएम के इस्तेमाल की जांच करनी चाहिए।" वैसे बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की स्थिति में भारत की चुनावी प्रक्रिया लंबी भी होगी और खर्च भी बढ़ेगा। लेकिन दुनिया भर के विकसित देशों में बैलेट पेपर से ही चुनाव कराए जाते हैं, उस अमीरका में भी जहां ईवीएम पहली बार बना था।
अगर किसी सूरत में इसकी नौबत आए, तो ये संभव ही नहीं होगा। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल तर्कसंगत नहीं मानते। उनका कहना है, "मौजूदा समय में भारत का प्रत्येक राजनीतिक दल कभी ना कभी ईवीएम का विरोध कर चुका है।
ऐसे में संसद की संयुक्त संसदीय समिति को ईवीएम के इस्तेमाल की जांच करनी चाहिए।" वैसे बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की स्थिति में भारत की चुनावी प्रक्रिया लंबी भी होगी और खर्च भी बढ़ेगा। लेकिन दुनिया भर के विकसित देशों में बैलेट पेपर से ही चुनाव कराए जाते हैं, उस अमीरका में भी जहां ईवीएम पहली बार बना था।