मोदी ने G-20 के मंच से पाक को घेरा, बोले- एक दक्षिण एशियाई देश फैला रहा आतंक
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मोदी ने यहां जी-20 देशों के समापन सत्र के दौरान कहा कि वे चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाए और मिलकर तत्काल कार्रवाई करे। आतंक के प्रायोजकों को पुरस्कृत करने के बजाय उन पर प्रतिबंध लगाए जाएं और उन्हें अलग-थलग कर दिया जाए।
मोदी ने कहा कि आतंकियों को मिल रहे पैसे का रास्ता रोकने की जी-20 सम्मेलन की पहल की भारत प्रशंसा करता है। उन्होंने जोर दिया कि सभी देश फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के तय मानकों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि हिंसा और आतंक की बढ़ती ताकतों ने गंभीर चुनौती पैदा कर दी है। कुछ देश इसे अपनी सरकारी नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन भारत की नीति, आतंक को कतई बर्दाश्त नहीं करना है। हमारे लिए एक आतंकी सिर्फ आतंकी है।
मोदी ने एक दिन पहले ही ब्रिक्स देशों के सदस्यों से मुलाकात कर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट प्रयास करने की अपील की थी। पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने आतंक के समर्थकों व प्रायोजकों को अलग-थलग करने की मांग की थी। ब्रिक्स देशों के नेताओं की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि आतंकियों के पास न तो बैंक हैं और न हथियारों की फैक्ट्रियां। साफ है कि कोई उन्हें धन और हथियार मुहैया कराता है। मिलेजुले प्रयासों से इसका मुकाबला करना चाहिए।
"Terrorist is a terrorist"
— Vikas Swarup (@MEAIndia) September 5, 2016
PM:1 single nation in https://t.co/DgmCrOoiUF is spreading agents of terror in our region pic.twitter.com/RcLQMPPkub
आतंकवाद के साथ-साथ भ्रष्टाचार और काले धन की लड़ाई भी है जरुरी: मोदी
चीन के पूर्वी शहर में आयोजित जी 20 सम्मेलन के दूसरे दिन भारतीय पीएम ने कहा कि वित्तीय सुशासन के लिए भ्रष्टाचार, काला धन और टैक्स चोरी के खिलाफ लड़ाई महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा वित्तीय सुशासन हासिल करने के लिए जरूरी है कि हम आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित शरणस्थलियों को खत्म करने, टैक्स चोरों की तलाश और बिना शर्त उनका प्रत्यर्पण, जटिल अंतरराष्ट्रीय नियमों के जाल को तोड़ने होंगे। ऐसे नियमों को खत्म करना होगा जो भ्रष्टाचार करने वालों और उनके काले कारनामों पर पर्दा डालते हों।'
अपने संबोधन के दौरान पीएम ने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया। पीएम ने कहा कि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ), क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाएं और द्विपक्षीय विनिमय व्यवस्थाओं के बीच नियमित बातचीत की जरूरत है।