{"_id":"61941ddc74d2ba0ec618eb7e","slug":"elgar-parishad-case-accused-varavara-rao-unable-to-pay-the-flat-rent-now-he-will-live-in-ashram","type":"story","status":"publish","title_hn":"एल्गार परिषद मामला: फ्लैट का किराया देने में असमर्थ वरवरा राव, अब आश्रम होगा नया ठिकाना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एल्गार परिषद मामला: फ्लैट का किराया देने में असमर्थ वरवरा राव, अब आश्रम होगा नया ठिकाना
Wed, 17 Nov 2021 02:42 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 17 Nov 2021 02:42 AM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राव को चिकित्सीय आधार पर मामले में अंतरिम जमानत दी थी। जेल में बंद रहने के दौरान उनकी तबीयत खराब थी। हालांकि, अदालत ने कुछ शर्तें लगाई थीं जैसे कि उन्हें मुंबई में ही रहना होगा।
विज्ञापन
वरवरा राव
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एल्गार परिषद मामले में आरोपी चल रहे तेलुगु कवि वरवरा राव ने मंगलवार को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत को बताया कि वह मुंबई के एक फ्लैट से बांद्रा स्थित एक आश्रम में रहने जा रहे हैं क्योंकि वह बड़े फ्लैट का किराया देने में असमर्थ हैं। यह आश्रम अभिनेता शाहरुख खान के बंगले मन्नत के ठीक पीछे है।
विज्ञापन
राव की ओर से पेश अधिवक्ता नीरज यादव ने कहा कि वह मलाड में फ्लैट का किराया नहीं दे सकते थे, इसलिए वह बांद्रा में एक आश्रम जैसी सुविधा में जा रहे हैं। इसलिए बांद्रा पुलिस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी उपस्थिति लेने के लिए कहा जाए।
विज्ञापन
वरवरा राव अब तक मुंबई के मलाड पूर्वी इलाके के कुरार पुलिस स्टेशन में व्हाट्सएप कॉल के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। यादव ने अदालत को यह भी बताया कि राव को होली फैमिली अस्पताल में सर्जरी के लिए भर्ती कराया गया था और वह अभी अस्पताल में है और उनको जल्द छुट्टी मिलने की संभावना है।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राव को चिकित्सीय आधार पर मामले में अंतरिम जमानत दी थी। जेल में बंद रहने के दौरान उनकी तबीयत खराब थी। हालांकि, अदालत ने कुछ शर्तें लगाई थीं जैसे कि उन्हें मुंबई में ही रहना होगा।
क्या है एल्गार परिषद मामला
एल्गार परिषद मामला पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एक सभा में कथित भड़काउ भाषण देने से संबंधित है। पुलिस का दावा है किउक्त भाषण के बाद पश्चिमी महाराष्ट्र के बाहरी इलाकों में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि सभा को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। मामले की जांच अब एनआईए कर रही है। इसमें कई कार्यकर्ताओं और अकादमिक जगत के लोगों को आरोपी बनाया गया है।