Electoral Bonds: ईडी की जांचों पर कांग्रेस ने पूछे सवाल, क्या है मदर ऑफ डेमोक्रेसी में 'चंदा वसूली' की कहानी?
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विस्तार
केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। शुक्रवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को जांच एजेंसियों की कार्यवाही के बाद भाजपा को चंदा देने वालों के बीच हुए 'कुछ के बदले कुछ लेनदेन' के आरोपों की जांच के लिए एक पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उसके बाद भाजपा को चंदा देने वालों के बीच हुए लेनदेन के आरोपों की जांच की जाए। 2014 के बाद से राजनेताओं के खिलाफ ईडी के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है। 95 फीसदी मामले सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं। बतौर वेणुगोपाल, नरेंद्र मोदी अकसर हमारे देश को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' कहते हैं। क्या स्वायत्त जांच एजेंसियों को कमजोर कर सत्ताधारी दल को चंदा देने के लिए जबरन वसूली और ब्लैकमेल करना ही 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' का हिस्सा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक न्यूज पोर्टल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा, इस रिपोर्ट में भाजपा और कई कंपनियों के बीच 'कुछ के बदले कुछ' लेनदेन का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच या छापे के बाद इन कंपनियों ने भाजपा को बड़े पैमाने पर चंदा दिया है। यह एक अजीब तरह का संयोग है। यह रिपोर्ट चुनाव आयोग के डोनेशन से संबंधित डॉक्युमेंट्स और अन्य पुख्ता सबूतों द्वारा प्रमाणित है।
इसके चलते केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्रता, स्वायत्तता और दक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इन तीन में से दो एजेंसियां वित्त मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। पूरा देश जानता है कि केंद्र सरकार द्वारा जांच एजेंसियों को किस रिमोट से और कैसे नियंत्रित किया जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी के महासचिव ने लिखा, इसका प्रमाण यह है कि 2014 के बाद से राजनेताओं के खि्लाफ ईडी के मामलों में 4 गुना वृद्धि हुई है। जांच एजेंसियों ने कुछ कंपनियों के खिलाफ या तो जांच की है, या उनकी संपत्ति जब्त कर ली है। बाद में उन्हें भाजपा को चंदा देने के लिए मजबूर किया गया। वित्त वर्ष 2018-19 और 2022-23 के बीच भाजपा को लगभग 335 करोड़ रुपये का चंदा देने वाली कम से कम 30 कंपनियों को उस अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इन फर्मों में से 23 कंपनियों ने, जिन्होंने इस अवधि के दौरान भाजपा को कुल 187.58 करोड़ रुपये दिए थे, 2014 और छापे के वर्ष के बीच कभी भी इस पार्टी को कोई राशि चंदे के रूप में नहीं दी थी। इनमें से कम से कम चार कंपनियों ने केंद्रीय एजेंसियों की विजिट के चार महीने के भीतर कुल 9.05 करोड़ रुपये का दान दिया।
इनमें से कम से कम छह कंपनियां ऐसी हैं, जो पहले से ही भाजपा को चंदा देती थीं, लेकिन छापेमारी के बाद के महीनों में इन सभी ने काफी ज्यादा पैसा चंदे के रूप में दिया। छह अन्य फर्म्स ऐसी हैं, जो पहले हर साल भाजपा को चंदा दिया करते थे, लेकिन जब एक वित्त वर्ष में इन सभी ने चंदा नहीं दिया, तो इन्हें केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। भाजपा के कम से कम तीन चंदादाताओं, जो 30 की सूची में शामिल नहीं हैं, उन पर मोदी सरकार से अनुचित लाभ प्राप्त करने का आरोप लगा था। इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियां के द्वारा दबाव डालकर सत्तारूढ़ दल के लिए चंदे के रूप में कानूनी रूप से जबरदस्ती वसूली की जा रही है।
यह सब हिमशैल के सिरे जैसा है। जो सामने आया है वह बहुत छोटा हिस्सा है, वसूली का यह काम बड़े पैमाने पर हुआ होगा। बतौर वेणुगोपाल, हम कहीं भी यह आरोप नहीं लगा रहे हैं कि दर्ज किए गए मामले या जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई अवैध है, लेकिन इस बात की जांच जरूरी है कि ये 'संदिग्ध' कंपनियां, जिनके खिलाफ ईडी के मामले हैं, वे अपने खिलाफ ईडी की जांच के बावजूद सत्तारूढ़ दल, भाजपा को चंदा क्यों दे रही हैं। क्या यह महज संयोग है कि ईडी की कार्रवाई के बाद वे भाजपा को ही चंदा दे रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही पीएम मोदी की 'चंदा वसूली' चुनावी बांड योजना को 'असंवैधानिक' और 'अवैध' करार देकर बड़ा झटका दिया है। अब समय आ गया है कि उनकी सरकार और विशेष रूप से वित्त मंत्रालय को भाजपा के खजाने को भरने के लिए जो भ्रष्टाचार किया गया है, उसके लिए जवाबदेह ठहराया जाए। इस बाबत कांग्रेस ने वित्त मंत्री से तीन सवाल पूछे हैं। पहला, क्या आप भाजपा के धन पर एक 'श्वेत पत्र' लाएंगी, न केवल स्रोतों पर, बल्कि इस पर भी कि आपने कॉर्पोरेट कंपनियों के खिलाफ जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर उन्हें चंदा देने के लिए कैसे मजबूर किया है। दूसरा, यदि आपके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो क्या आप उन घटनाओं की 'क्रोनोलॉजी' पर बिंदुवार खंडन पेश करने को तैयार हैं, जिनके कारण भाजपा का खजाना भरा।
तीसरा, यदि आप तथ्यों के आधार पर स्पष्टीकरण देने को तैयार नहीं हैं, तो क्या आप भाजपा के लिए चंदा लूटने के इन संदिग्ध लेन-देन की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के लिए खुद को पेश करने को तैयार हैं। कांग्रेस महासचिव ने पत्र में लिखा, देश देख रहा है कि कैसे आप तुच्छ आरोपों के आधार पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को आयकर नोटिस देकर और वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीयकृत बैंकों को हमसे पैसा वसूलने के लिए मजबूर कर लोकतंत्र को खत्म कर रही हैं।
यह सारा पैसा भारत के लोगों द्वारा दिए गए छोटे-छोटे चंदे से आया है। यह और कुछ नहीं, बल्कि चुनाव से ठीक पहले लोकतंत्र में मिलने वाले समान अवसर को खत्म करने की साजिश है। नरेंद्र मोदी जी अक्सर हमारे देश को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' कहते हैं। क्या स्वायत्त जांच एजेंसियों को कमजोर कर सत्ताधारी दल को चंदा देने के लिए जबरन वसूली और ब्लैकमेल करना 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' का हिस्सा है। क्या छोटे-मोटे आयकर नोटिसों के माध्यम से प्रमुख विपक्षी दल के चंदा का पैसा लूटना 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' का हिस्सा है। हम कानून और जनता की अदालत में जा रहे हैं। हम आपको दोनों तरह से हराएंगे।