शरद यादव को लगा झटका, पार्टी सिंबल के दावे को चुनाव आयोग ने किया खारिज
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पार्टी पर अपने उस दावे को लेकर शरद यादव को आयोग से बड़ा झटका मिला है, जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी के चुने हुए नेता और पदाधिकारियों के नीतीश कुमार के साथ होने के बावजूद सभी कार्यकर्ता उनके साथ हैं।
आयोग के सूत्रों के अनुसार, यादव गुट अपने दावे के समर्थन में ठोस दस्तावेज के साथ दूसरा आवेदन देने के लिए स्वतंत्र है। यादव गुट ने 25 अगस्त को चुनाव आयोग को आवेदन देकर पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोका था और कहा था कि राष्ट्रीय परिषद के ज्यादातर सदस्य उसके साथ हैं।
इसके जवाब में जद यू के महासचिव केसी त्यागी और राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने पिछले हफ्ते चुनाव आयोग को हलफनामा देकर कहा था कि पार्टी के नेता और पदाधिकारियों का अपने नेता नीतीश कुमार में पूरा विश्वास है।
त्यागी ने कहा कि उन्होंने नीतीश के समर्थन में आयोग को पार्टी के सभी 71 विधायक, 30 एमएलसी, दो लोकसभा सांसद और 10 राज्यसभा सांसदों और पदाधिकारियों का हलफनामा सौंप दिया है।
राज्यसभा सचिवालय ने शरद, अनवर से मांगा जवाब
जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के भाजपा को राज्य में सहयोगी के तौर पर स्वीकार करने के फैसले के बाद शरद यादव ने उनके खिलाफ आवाज बुलंद की थी और पटना में आयोजित विपक्ष की रैली में शामिल होने का फैसला लिया था। इसके बाद जदयू ने राज्यसभा अध्यक्ष वैंकेया नायडू से आग्रह किया था कि शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता को अयोग्य ठहरा दिया जाए।
जदयू के महासचिव संजय झा ने इस मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद रहे जय नारायण प्रसाद निषाद का उदाहरण दिया, जिनकी सदस्यता दल बदल कानून के तहत रद्द कर दी गई थी।
संजय झा ने कहा कि हमने दोनों नेताओं के खिलाफ पार्टी-विरोधी गतिविधियों से संबंधित सबूत व दस्तावेज सौंप दिए हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का उल्लंघन किया और चुनाव आयोग जाकर पार्टी का चुनाव चिन्ह भा मांगा, जो एक पार्टी विरोधी गतिविधि ही है।
शरद को पहले उच्च सदन में पार्टी नेता के पद से हटाया गया था। गौरतलब है कि शरद यादव ने लालू प्रसाद नीत राजद की पटना रैली में भाग लिया, जिसके बाद जदयू ने उन्हें अयोग्य घोषित करने की याचिका दायर की थी।