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कश्मीर में ईद की खुशियों की खातिर हमारे जांबाजों ने 24 घंटे तक पलकें भी नहीं झपकीं

Mon, 12 Aug 2019 10:38 PM IST
अमित मंडल जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: अमित मंडल Updated Mon, 12 Aug 2019 10:38 PM IST
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Eid in jammu kashmir security force even did not sleep for 24 hours
जम्मू-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला

अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद कश्मीर में बकरीद का पहला बड़ा त्योहार आया। कश्मीर में ईद की खुशियां दिखें, इसके लिए गृह मंत्रालय ने खास रणनीति बनाई थी। हमारे जांबाजों ने 24 घंटे तक पलक नहीं झपकी। नियंत्रण रेखा से लेकर कश्मीर के लाल चौक तक ईद की खुशियां सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक और बाहरी इंटेलीजेंस एजेंसियां दिन रात अपने काम में लगी रहीं। घाटी के कुछ हिस्सों में फोन की रेंज बढ़ाई गई तो डरावनी बातें सामने आईं। चंद सेकेंड में तोड़फोड़ करने वाले मैसेज आने लगे। कुछ इलाकों में इंटरनेट चालू किया गया तो उसका भी यही हाल। यहां भी अच्छे संदेश नहीं थे। इसके बाद सुरक्षा बलों ने व्यक्तिगत तौर पर गांव और कस्बों में जाकर लोगों से मुलाकात की। उन्हें समझाया कि वे बिना किसी भय के ईद मनाएं। लोगों को बता दिया गया कि उनके आसपास जो भी सुरक्षा बल रहेंगे, वे उन्हीं की हिफाजत के लिए हैं। 

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इंटेलीजेंस एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय का सभी सुरक्षा बलों को यह स्पष्ट आदेश था कि 12 अगस्त को घाटी के सभी हिस्सों में खुशी व उल्लास के साथ ईद मनाना सुनिश्चित किया जाए। चूंकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कहीं न कहीं ये संदेश पहुंचाया जा रहा था कि कश्मीर में सब कुछ सही नहीं है। वहां लोगों को बाहर निकलने से रोका जा रहा है। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल खुद वहां पहुंच गए। वे पिछले तीन दिन से घाटी में ही ठहरे हैं। उन्होंने विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों के साथ बातचीत की। उन्हें भरोसा दिलाया कि वे अपने कामकाज पर लौटें। सरकार उनके विकास के लिए कई तरह की योजनाएं लाने जा रही है। अपने दौरे में वे सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाते हुए नजर आए।
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ईद के लिए सुरक्षा बलों ने बनाई ये रणनीति 

ईद से एक दिन पहले तक ज्यादा लोग सड़कों पर नहीं निकल पा रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय था। धारा 144 हटाई जा चुकी थी। लोग अपने परिचितों के पास फोन कर सकें, इसके मद्देनजर मोबाइल फोन टावर की रेंज बढ़ा दी गई। सूत्र बताते हैं कि सुरक्षा बलों ने एक तरह से कुछ इलाकों में फोन चालू कर लोगों की प्रतिक्रियाएं जानने के लिए टेस्ट किया था। चूंकि वहां पर आईबी, रॉ के अलावा मिलिट्री इंटेलीजेंस और नेशनल टेक्नीकल ऑर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) भी मौजूद था, इसलिए कई फोन कॉल इंटरसेप्ट की गई। सैंपल के तौर पर जुटाए गए आँकड़े शुभ संदेश नहीं दे रहे थे।
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कश्मीर, गांदरबल, बांदीपोरा, बनिहाल और अनंतनाग जैसे इलाकों में सीमा पार से कई कॉल दर्ज की गई।जो बातचीत हुई, वह निराशाजनक थी। यह सब ईद से एक दिन पहले की कार्रवाई है। चूंकि एनएसए घाटी में ही थे, इसलिए उन्होंने मोबाइल इंटरनेट को लेकर कुछ नए दिशानिर्देश जारी कर दिए।जो नई रणनीति बनी, उसमें जम्मू कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को अहम जिम्मेदारी दी गई। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया, दोनों बलों के करीब 48 हजार जवान घाटी के हर इलाके में गए। ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से लेकर दूसरी सामाजिक संस्थाओं से बातचीत की गई। उन्हें समझाया गया कि भले ही हर जगह पर मोबाइल इंटरनेट चालू न हुआ हो, लेकिन वे ईद पर अपने घरों से बाहर निकलें। उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।


जांबाजों ने 24 घंटे तक पलक नहीं झपकी 

करीब 48 हजार जवान, जिन्हें घाटी के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया था, उन्होंने 24 घंटे तक लगातार ड्यूटी दी है। सामान्य तौर पर आठ से दस घंटे की ड्यूटी रहती है, लेकिन ईद से पहले इन सभी जवानों ने 24 घंटे तक ड्यूटी दी है। ईद की दोपहर को ही इनकी ड्यूटी बदली गई। शहरी इलाकों में तैनात रेपिड एक्शन फोर्स के जवान भी 15 से 20 घंटे तक लगातार अपना काम करते रहे। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अलावा सीआरपीएफ और आईटीबीपी के खोजी कुत्ते भी ईद से पहले वाली रात को सड़कों और मस्जिदों के आसपास घूम रहे थे। एक अधिकारी का कहना है कि इस कार्य में 80 खोजी कुत्तों को लगाया गया था। ईद की सुबह से पहले इन कुत्तों ने उन सभी सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की, जहां से लोगों की आवाजाही होनी थी। 
 

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