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Fertilizer Crisis: चीन की चाल का दिखने लगा असर, मौसम के साथ खाद के चक्कर में दोहरी मार से जूझ रहा है किसान

Mon, 21 Jul 2025 08:45 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 21 Jul 2025 08:45 PM IST
सार

चीन ने अघोषित रूप से स्पेशल (घुलनशील) उर्वरक (फल, सब्जियों और फसल की उपज बढ़ाने में महत्वपूर्ण) की आपूर्ति रोक दी है। यह उर्वरक मिट्टी के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालते हैं। भारत के अधिकारियों के संपर्क करने पर अभी इसका कोई ठोस जवाब नहीं मिल पा रहा है। जबकि भारत चीन से यूरिया, फास्फेट और पोटाश समेत अन्य ऊर्वरक लेता है।  

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effect of China's move is becoming visible farmers are facing a double whammy due to weather and fertilizers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वाभिमानी शेतकरी संघटन के नेता राजू शेट्टी कहते हैं कि महाराष्ट्र में एक लाख से अधिक किसान डिफाल्टर हो गए हैं। राजू शेट्टी पूर्व सांसद भी हैं। वह इसका कारण सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता, वादा करके उसे पूरा न करने की आदत और खाद की अनुपलब्धता को बताते हैं। यह हाल केवल महाराष्ट्र का नहीं है। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत तमाम राज्यों के किसान खाद(उवर्रक) के लिए कतार में लगे हैं और पुलिस की लाठियां खा रहे हैं।

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बनारस में चंद्रेश कुमार की समस्या यही है। वह पिछले कुछ दिन से उवर्रक के लिए चक्कर लगा रहे हैं। अरुण सांगवान का कहना है कि उर्वरक को लेकर समस्या चल रही है। इसके अलावा सरकार भी किसानों की बात तो बहुत करती है, लेकिन उसकी संवेदनशीलता बस दिखावे की ज्यादा लगती है।  राजू शेट्टी कहते हैं कि महाराष्ट्र में किसान को प्याज के निर्यात पर रोक के कारण उचित मूल्य नहीं मिला। कपास और सोयाबीन तो न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी काफी कम दाम पर मिले। 
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किसानों को क्या पड़ गई है उर्वरक की कमी?
केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के माथे पर बल है। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अफसर भी इस बारे में अधिक नहीं बोल रहे हैं। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भी आने वाला समय थोड़ा परेशान कर रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की टीम के सदस्य का कहना है कि सरकार पूरा प्रयास कर रही है, लेकिन जब तक चीन से उर्वरक की आपूर्ति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक कुछ कहना मुश्किल है। भारत चीन से 150000-160000 टन उर्वरक की आयात करता है। विशेष खाद का मुख्य स्रोत चीन ही है। लेकिन चीन ने अघोषित रूप से स्पेशल (घुलनशील) उर्वरक (फल, सब्जियों और फसल की उपज बढ़ाने में महत्वपूर्ण) की आपूर्ति रोक दी है। यह उर्वरक मिट्टी के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालते हैं। भारत के अधिकारियों के संपर्क करने पर अभी इसका कोई ठोस जवाब नहीं मिल पा रहा है। जबकि भारत चीन से यूरिया, फास्फेट और पोटाश समेत अन्य ऊर्वरक लेता है।  
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सरकार के मंत्रालय की बेबसी का राज समझिए
भारत और चीन के बीच में 2020 में गलवां घाटी में सैनिक झड़प के बाद से रिश्ते सामान्य नहीं हैं। इसे पटरी पर लाने की कोशिश जारी है। समझा जा रहा है कि शंघाई शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान कोई नई राह निकल सकती है। पहले भारत ने चीन की कंपनियों पर नकेल कसनी शुरू की और बाद में चीन ने भी भारत को संदेश देना शुरू कर दिया। चीन ने उच्च गुणवत्ता वाले चुम्बकों की आपूर्ति पर रोक लगाई। उसने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी बुलट ट्रेन परियोजना पर भी अडंगा लगा रखा है। रेअर अर्थ की आपूर्ति पर भी रोक है और इसी क्रम में बिना कोई  स्पष्ट आधिकारिक आदेश के चीन ने विशेष खाद के निर्यात पर रोक लगा रखी है। यह रोक लंबे समय तक रही तो देश में किसानों की मुसीबत बढ़ सकती है। क्योंकि इसके चलते उर्वरक की उपलब्धता कम रहेगी और इसके दाम भी बढ़ेंगे। इसका असर किसान की जेब और सरकार पर पड़ेगा।

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