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ED: धोखाधड़ी के लिए बनाया मोबाइल एप, नौकरी चाहने वालों से नकली KYC कराया, फर्जीवाड़े का क्लासिक पोंजी स्टाइल

Thu, 24 Jul 2025 08:48 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 24 Jul 2025 08:48 PM IST
सार

धोखाधड़ी की योजना 'शेयरहैश' मोबाइल एप के माध्यम से संचालित की गई थी। इसमें क्रिप्टो करेंसी माइनिंग के माध्यम से आकर्षक रिटर्न के वादों के साथ सैकड़ों भोले-भाले निवेशकों को लुभाया गया।

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ED: Mobile app created for fraud, fake KYC done from job seekers, classic Ponzi style of fraud
ईडी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बंगलूरू जोनल कार्यालय ने कोटाटा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संस्थाओं के माध्यम से आरोपियों द्वारा किए गए एक तकनीक-सक्षम साइबर निवेश घोटाले के मामले में अस्थायी रूप से 7.02 करोड़ रुपये (लगभग) संलग्न किए हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत संलग्न की जा रही राशि विभिन्न संस्थाओं के 29 बैंक खातों में बैंक बैलेंस के रूप में पड़ी थी।

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धोखाधड़ी की योजना 'शेयरहैश' मोबाइल एप के माध्यम से संचालित की गई थी। इसमें क्रिप्टो करेंसी माइनिंग के माध्यम से आकर्षक रिटर्न के वादों के साथ सैकड़ों भोले-भाले निवेशकों को लुभाया गया। इसका मकसद, शेल कंपनियों और लॉन्ड्रिंग चैनलों के माध्यम से धन का दुरुपयोग करना था। अनजान व्यक्तियों से एकत्र किए गए धन को शुरू में विश्वास बनाने के लिए छोटे हिस्सों में वापस कर दिया गया था। बाद में मालूम हुआ कि आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए एक 'क्लासिक पोंजी रणनीति' इस्तेमाल की थी।
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ईडी ने निवेश कंपनियों से जुड़ी विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 और आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत साइबर अपराध पुलिस, बंगलूरू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। ईडी की जांच से पता चला है कि प्राथमिक निवेश संस्थाएं कोटाटा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, सिरालीन टेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, क्रैम्पिंगटन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, निलीन इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड और मोल्ट्रेस एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड हैं।
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ये कंपनियां कथित तौर पर कोविड-19 महामारी के दौरान बेरोजगार युवाओं और नौकरी चाहने वालों से नकली केवाईसी का उपयोग करके बनाई गई थीं। उनके पंजीकृत पते गैर-कार्यात्मक या काल्पनिक पाए गए। ईडी की जांच में सामने आया है कि प्राथमिक संस्थाओं में जमा धन को भुगतान गेटवे का उपयोग करके निकाला गया था। फिर इन निधियों को द्वितीयक मुखौटा संस्थाओं में भेजा गया। इसका इस्तेमाल, नकद निकासी और सोने की खरीद आदि के लिए किया गया। 


इसके अलावा, जांच से पता चला कि विभिन्न बैंकों के 40 से ज़्यादा बैंक खातों का इस्तेमाल लेयरिंग और छिपाने के लिए किया गया था। ज़्यादातर निदेशक/मालिक/मालिक ईडी के समन का जवाब देने में विफल रहे। कुछ ने मुखौटा और लाभार्थी संस्थाओं के बारे में जानकारी या संलिप्तता से इनकार किया। मामले में आगे की जांच जारी है।

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