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Jaishankar: 'जी20 में संयुक्त घोषणा का एलान करना सबसे संतोषजनक पल', जयशंकर ने करियर का सबसे खास लम्हा भी बताया
Sat, 11 May 2024 11:28 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sat, 11 May 2024 11:28 AM IST
सार
जयशंकर ने करीब एक घंटे तक चले साक्षात्कार में आज से 10 साल में विश्व के बारे में अपना नजरिया, भारत के समक्ष चुनौतियां और अपने कार्यकाल के तहत अंतरराष्ट्रीय जगत में देश के उभरते कद समेत कई मुद्दों पर बात की।
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Jaishankar
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि उनके जीवन का सबसे खास पल क्या था। वहीं उन्होंने दुनियाभर के देशों से संबंध गहरे होने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर उनके करियर का सबसे अच्छा और संतोषजनक पल जी20 शिखर सम्मेलन का समापन था, तो सबसे खास पिछले पांच वर्षों के दौरान अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और जापान जैसे कुछ देशों के साथ गहरे होते संबंधों को देखना था।
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पिछले पांच सालों में इन संबंधों में काफी बदलाव आया
जयशंकर ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा, 'पिछले पांच सालों में इन संबंधों में काफी बदलाव आया है। क्वाड के विकास को लेकर डेढ़ दशक पहले कोशिश की गई थी, लेकिन सफल नहीं हुए थे। हालांकि, इस बार दूसरी बार इसे आजमाया और वास्तव में यह काम कर गया।'
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एक घंटे तक चला साक्षात्कार
जयशंकर ने करीब एक घंटे तक चले साक्षात्कार में आज से 10 साल में विश्व के बारे में अपना नजरिया, भारत के समक्ष चुनौतियां और अपने कार्यकाल के तहत अंतरराष्ट्रीय जगत में देश के उभरते कद समेत कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले साल जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना सिर्फ कठिन काम नहीं था क्योंकि कई मायनों में देश की प्रतिष्ठा इस पर निर्भर थी।
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सबसे संतोषजनक पल वह था जब...
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि सबसे संतोषजनक पल वह था जब हमने वास्तव में जी-20 शिखर सम्मेलन में संयुक्त घोषणा की थी। यह एक बहुत ही कठिन प्रक्रिया थी। उस सुबह तक बहुत से लोग सोच रहे थे कि हम वास्तव में सभी को इस पर सहमत नहीं कर पाएंगे। हालांकि एक मंत्री के तौर पर मुझे यही कहना था कि निश्चित तौर पर ऐसा ही होगा। यह मेरे कार्यकाल का काफी संतोषजनक पल था।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौ मई को नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन को अपनाने की घोषणा की थी। यह भारत की जी20 अध्यक्षता के लिए एक महत्वपूर्ण जीत थी, जो यूक्रेन संघर्ष पर बढ़ते तनाव और अलग-अलग विचारों के बीच आई थी।
सबसे बड़ी कूटनीतिक जिम्मेदारी
जयशंकर ने कहा, 'यह हमारे इतिहास की सबसे बड़ी कूटनीतिक जिम्मेदारी थी। जिस तरह से हमने इसे पूरा किया वह भी बहुत अनूठा था। मैं लंबे समय से इस काम में हूं। मैंने विदेश नीति का ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं देखा, जिससे भारतीय जनता इतनी जुड़ी और निहित हो।'
मंत्री से उनके संतोषजनक पल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'हमने इसे बहुत मुश्किल समय में पूरा किया और यह सुनिश्चित किया कि यह तनावपूर्ण न होकर मजबूत हो। कल्पना कीजिए कि अगर हम नहीं मजबूत नहीं होते, तो क्या होता। मुझे लगता है कि इसमें काफी कुछ दांव पर लगा था, देश के लिए, सरकार के लिए और दुनिया के लिए भी।'
आपने पूछा नहीं कि सबसे खास क्या रहा: जयशंकर
जी-20 का उल्लेख करने के बाद जयशंकर ने कहा, 'आपने मुझसे नहीं पूछा कि सबसे खास क्या रहा। एक मंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण देशों के साथ रिश्तों में भारी बदलाव के साथ जुड़ा होना सबसे महत्वपूर्ण रहा है। अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और कुछ हद तक जापान भी।'