सपा परिवार की रार के कारण ‘साइकिल’ से उतर सकते हैं कई कद्दावर
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परिवार की रार में कई समाजवादी नेताओं को अपने राजनीतिक कॅरियर पर खतरा मंडराता दिख रहा है। इसमें वे तमाम लोग हैं जो पूर्व में या हाल में सत्ता की चाहत में सपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में वे किनारा तलाशने लगे हैं। चाचा-भतीजे की लड़ाई में ऐसे नेता अपने राजनीतिक सफर को विराम नहीं लगने देना चाहते। प्रत्याशियों के माथे की शिकन बढ़ गई है सो अलग।
वर्ष 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद से भाजपा-बसपा सहित कई दलों के नेता समर्थकों के साथ सपा से जुड़ गए थे। कुछ चुनाव से पहले ही उनके साथ हो लिए। अब तक तो सब ठीकठाक चलता रहा। मगर, अब हुई कलह ने उन्हें विचलित कर दिया है।
वह भी उस वक्त जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में कुछ कद्दावर चेहरे ‘घर वापसी’ की तैयारी में हैं। सूत्रों की मानें तो इनकी पुरानी पार्टी के पुराने संबंधों के माध्यम से नए मुखियाओं से मुलाकात भी हो गई है।
सपाई भी बदलते माहौल में पार्टी से किनारा कर सकते हैं
वहीं, कुछ पुराने महत्वाकांक्षी सपाई भी बदलते माहौल में पार्टी से किनारा कर सकते हैं। कमजोर खेमे का सिपाही होने के चलते उन पर कोई गाज गिरे, इससे पहले वे दूसरी पतवार थाम लेना चाहते हैं। ये लोग भी दूसरे दलों में अपनी ‘स्थिति’ की डिमांड के साथ संपर्क साधने में जुट गए हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा पार्टी प्रत्याशी पसोपेश में है।
क्योंकि कुछ प्रत्याशी शिवपाल के माध्यम से टिकट हासिल में सफल हुए थे तो कुछ मुख्यमंत्री अखिलेश खेमे से। वर्तमान हालातों में अखिलेश यादव का पलड़ा भारी देखते हुए शिवपाल के कोटे से आए प्रत्याशियों के माथे की शिकन बढ़ गई है।
सपा की जिला और महानगर इकाई के अलावा अधिकांश फ्रंटल संगठनों के जिम्मेदार पदों पर अखिलेश यादव के खेमे के लोग बैठे हैं। मुलायम सिंह यादव के करीबियों के पर पहले ही कतरे जा चुके हैं। हालांकि नेताजी के सम्मान के खातिर कुछ को अब तक उनकी जगह तो दी हुई है लेकिन सक्रियता पर ब्रेक लगा रखे हैं।