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मोदी सरकार के रडार पर आए 39 आईएएस अधिकारी, खतरे में है नौकरी!
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Tue, 27 Jun 2017 05:39 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
केंद्र सरकार के रेडार पर कई बड़े अधिकारी आ चुके हैं, जिनपर वित्तीय अनियमितताओं के साथ ही भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं। ऐसे 39 आईएएस अधिकारियों के साथ ही केंद्रीय सचिव सेवा के भी 29 अधिकारी रेडार पर हैं। कुल मिलाकर शीर्ष पदों पर तैनात ऐसे 68 अधिकारियों की छुट्टी हो सकती है, जो या तो काम नहीं कर पा रहे हैं, या उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायते हैं।
आईएएस अधिकारियों के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करने वाले पर्सनल एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट(डीओपीटी) के पास ऐसे अधिकारियों की लिस्ट पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों में से कुछ तो बेहद शीर्ष पदों पर बैठे हुए हैं। अब इनपर आरोपों की जांच की जाएगी, साथ ही उनके सर्विस रिकॉर्ड को भी खंगाला जाएगा।
केंद्र सरकार का ये कदम नियमित प्रक्रिया के तहत ही है। जिसमें सरकारी अधिकारियों की सेवाओं का दो बार रिव्यू किया जाता है। इसमें पहला रिव्यू सेवा से जुड़ने के 15 साल बाद किया जाता है, तो दूसरा रिव्यू 25 साल के बाद। इस समय जो अधिकारी काम के लायक नहीं रह गए होते हैं, उन्हें सेवा से हटा दिया जाता है।
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केंद्र सरकार ऐसे ही 129 नॉन-परफॉर्मिंग अधिकारियों को पिछले साल चलता कर चुकी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब 67 हजार सरकारी कर्मचारी नॉन-परफॉर्मर साबित हुए हैं। इसमें से करीब पचीस हजार अधिकारी ग्रुप ए के हैं।
खास बात ये है कि कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े ऐसे नियम को पास किया था, जिसमें किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अधिकतम 6 माह के अंदर जांच की रिपोर्ट सौंपनी पड़ेगी। ऐसे में केंद्र सरकार के रेडार पर आए सभी 68अधिकारियों की छुट्टी तय मानी जा रही है।
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आईएएस अधिकारियों के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करने वाले पर्सनल एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट(डीओपीटी) के पास ऐसे अधिकारियों की लिस्ट पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों में से कुछ तो बेहद शीर्ष पदों पर बैठे हुए हैं। अब इनपर आरोपों की जांच की जाएगी, साथ ही उनके सर्विस रिकॉर्ड को भी खंगाला जाएगा।
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केंद्र सरकार का ये कदम नियमित प्रक्रिया के तहत ही है। जिसमें सरकारी अधिकारियों की सेवाओं का दो बार रिव्यू किया जाता है। इसमें पहला रिव्यू सेवा से जुड़ने के 15 साल बाद किया जाता है, तो दूसरा रिव्यू 25 साल के बाद। इस समय जो अधिकारी काम के लायक नहीं रह गए होते हैं, उन्हें सेवा से हटा दिया जाता है।
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केंद्र सरकार ऐसे ही 129 नॉन-परफॉर्मिंग अधिकारियों को पिछले साल चलता कर चुकी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब 67 हजार सरकारी कर्मचारी नॉन-परफॉर्मर साबित हुए हैं। इसमें से करीब पचीस हजार अधिकारी ग्रुप ए के हैं।
खास बात ये है कि कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े ऐसे नियम को पास किया था, जिसमें किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अधिकतम 6 माह के अंदर जांच की रिपोर्ट सौंपनी पड़ेगी। ऐसे में केंद्र सरकार के रेडार पर आए सभी 68अधिकारियों की छुट्टी तय मानी जा रही है।