हौसला रखेंः रिजल्ट के लिए नहीं, जिंदगी की परीक्षा में पास होने के लिए पढ़ें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 31 May 2018 06:10 AM IST
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जब भी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आता है मीडिया, सोशल मीडिया, घर परिवार, पड़ोसी से लेकर स्कूल तक सिर्फ उनकी बात करता है जो सफल हुए हैं या जिन्होंने लीक से हटकर कुछ ज्यादा ही अंक प्राप्त किए हैं। लेकिन इतिहास गवाह है सफल वही है जो जिंदगी में कुछ कर गुजरा है। चाहें वो एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स हों या फिर माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स या फिर बात करें अपने देश के टाटा कंपनी के मालिक रतन टाटा और रिलायंस कंपनी के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की। ये तो महज चंद नाम हैं ऐसे नामों से दुनिया भरी पड़ी है जो शैक्षणिक परीक्षाओं में तो कभी न कभी असफल हुए हैं लेकिन जिंदगी में उन्होंने मिसाल कायम कर दी है। 
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शैक्षणिक परीक्षाएं सिर्फ आपको स्कॉलर बना सकती हैं लेकिन वह बच्चे जो किसी कारण से रटने वाली शैक्षणिक परीक्षा में कुछ नंबर से पीछे रह गए हैं वह कहीं से भी और किसी से भी कमतर नहीं आंके जा सकते हैं।
बस वह इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं लेकिन जिंदगी की कई और परीक्षाएं हैं जिसमें वो अव्वल साबित हो सकते हैं और होते भी हैं। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो हर इंसान में कुछ न कुछ विशेषता होती है। वह कहीं न कहीं अपने मनपसंद काम में अव्वल होता है इसलिए वह परीक्षा परिणामों में असफल होने के बाद भी फेल नहीं आंका जा सकता है। बस जरूरत होती है एक जज्बे की। अगर कोई फेल होता है तो उसमें पास होने और सफल होने के भी किटाणु भरे होते हैं बस उसको आपके अंदर कुलबुलाने भर की देरी है। अब अपने राष्ट्रपिता को ही लें तो उन्हें जिंदगी भर अफसोस रहा कि उनकी हैंडराइटिंग अच्छी नहीं थी लेकिन उसी लेखनी ने देश को आजाद करने में अहम भूमिका निभाई।
 यह मानना बहुत मुश्किल है कि क्यों और कैसे एक कम नंबर पाने वाला या फेल होने वाला बच्चा खुद को कम आंकने लग जाता है या फिर समाज उसे फेल कहने लग जाता है जबकि दुनिया बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स और रिलायंस कंपनी के संस्थापक धीरू भाई अंबानी जैसे लोगों से भरी पड़ी है जिन्होंने स्कूली परीक्षा में कभी न कभी फेल हुए और समाज को नई दिशा और दशा दे दी। अगर इतिहास के पन्नों को पलटें और समाज के सफल व्यक्तियों की जीवनी पढ़ें तो हमें पता चलता है कि विज्ञान, शोध, सिनेमा से लेकर समाज के हर बड़े योगदान में कम नंबर पाने वालों ने ही इतिहास रचा है। 
 
हमारी आज की यह बात उनके लिए नहीं जो सफल हुए हैं बल्कि उनके लिए है जो इस परीक्षा में कहीं न कहीं खुद को हारा हुआ महसूस कर रहे हैं। वह समझें कि यह न तो पहली परीक्षा है और न आखिरी। जिंदगी में कई परीक्षाएं हैं जिसमें वह अव्वल आने की काबिलियत रखते हैं। और हो सकते हैं। जरूरत है आपको आपकी रुचि के काम को तलाशने करने की और उसपर आगे बढ़ कर आप इतिहास रच सकते हैं। बड़े बुजुर्ग ने कहा है कि जिंदगी एक तजुर्बा है जिसे हर दिन सीखा जाता है...लेकिन आप इसे ऐसे समझें कि जिंदगी एक सेल्फी है जिसे फेसबुक पर करने के लिए पोज देना है और हो सकता है कि कभी आपको कई पोज देने के बाद एक अच्छी सेल्फी मिले और हो सकता है कि पहली ही सेल्फी से आप खुश हो जाएं।

**एक अनुरोध**

यदि आपके पास परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन न करने वाले लोगों की ऐसी कहानी या जानकारी हो, जिनसे हमारे आज के छात्र प्रेरणा ले सकें, तो उन्हें अमर उजाला डॉट कॉम के साथ  शेयर करें। हम ऐसे किस्सों को प्रकाशित करेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को इसका लाभ मिले। 
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