डोकलाम विवाद: समझौते से पहले ही पीछे हट गई थी चीनी सेना
भले ही डोकलाम विवाद के हल होने की जानकारी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को दी हो, मगर सच्चाई यह है कि रविवार को ही चीनी सेना ने सहमति के मुताबिक विवादित क्षेत्र से अपने 50 फीसदी जवान वापस बुला लिए थे। दरअसल, विवाद खत्म करने के लिए हुए कूटनीतिक करार के बावजूद भारत और चीन एक दूसरे के रुख के प्रति आश्वस्त नहीं थे।
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यही कारण है कि समझौते की आधिकारिक घोषणा से पहले भारत ने 24 घंटे इंतजार किया और 50 फीसदी चीनी सेना के मोर्चे से हटने के बाद ही इसकी जानकारी सार्वजनिक की। इसकी आधिकारिक घोषणा के कुछ ही घंटे बाद दोनों देशों ने विवादित क्षेत्र में मौजूद सभी सैनिकों को वापस बुला लिया।
शीर्ष स्तर पर हुए सेना हटाने के फैसले की जानकारी रविवार को ही विदेश सचिव एस जयशंकर ने चीनी राजदूत को बुलाकर दी थी। इसी तरह बीजिंग में भी भारतीय राजदूत को चीनी विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। दोनों देशों ने इस फैसले को सार्वजनिक करने में काफी संयम बरता। सेना हटाने का करार किन शर्तों पर हुआ इसकी जानकारी भी दोनों पक्षों ने नहीं दी।
डोभाल ने लिखी थी डोकलाम समझौते की स्क्रिप्ट
उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि डोकलाम पर तानातनी कम करने के लिए दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) ने मुख्य भूमिका निभाई। इसकी शुरुआती स्क्रिप्ट एनएसए अजीत डोभाल की पिछले महीने चीन यात्रा के दौरान लिख ली गई थी।
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डोभाल ब्रिक्स देशों के एनएसए सम्मेलन में हिस्सा लेने बीजिंग गए थे। इसके बाद से विभिन्न कूटनीतिक स्तर पर भारत अपनी बात लगातार रखता रहा। भारत जोर देकर समझाता रहा है कि उसकी सेना जिस जमीन पर खड़ी है, वह भले उसकी नहीं है लेकिन चीन जिस जमीन पर जमा है वह भी चीन की नहीं है।
अब जबकि डोकलाम विवाद खत्म माना जा रहा है, भारत इस तनातनी से सबक लेकर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। सेना समेत कई एजेंसियों ने आशंका जताई है कि डोकलाम जैसी घटना फिर हो सकती है।