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CoronaVirus Vaccine: कोविड-19 वैक्सीन के लिए कोल्ड चेन बनाए रखना दूसरी बड़ी चुनौती
Fri, 09 Oct 2020 06:57 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 09 Oct 2020 06:57 AM IST
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कोरोना की वैक्सीन लोगों तक सुरक्षित पहुंचे, इसके लिए भारत को कोल्ड चेन सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर देना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है। नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के वैज्ञानिक डॉक्टर सत्यजीत रथ का कहना है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को बड़े पैमाने पर अतिरिक्त कोल्ड चेन की जरूरत होगी।
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जेनेटिक मैटेरियल से तैयार वैक्सीन अधिक तापमान से होती है खराब
इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों की मदद भी लेनी होगी। तभी सुरक्षित, असरदार वैक्सीन लोगों तक पहुंच सकती है। परीक्षण में शामिल कुछ वैक्सीन को विशेष महत्व तापमान पर ही रखा जा सकता है। ऐसे में कोल्ड चेन टूटने पर वैक्सीन के बनने के बाद बाजार में पहुंचने तक स्थिति बिगड़ सकती है।
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वैक्सीन को चाहिए संतुलित तापमान
बंगलुरू स्थित आईआईएस के प्रो. राघवन वरदराजन का कहना है कि मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन को रेफ्रिजरेशन का एक संतुलित तापमान चाहिए। ऐसा नहीं होने पर वैक्सीन को पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होगा। वैक्सीन को रखने के लिए औसतन दो से आठ डिग्री का तापमान होना चाहिए। वैक्सीन बनने के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि उसे किस स्तर पर तापमान चाहिए।
मॉडर्ना-फाइजर को माइनस तापमान चाहिए
नेशनल सेंटर फॉर कोल्ड चैन डेवलपमेंट के पवन कोहली का कहना है कि मॉडर्ना की वैक्सीन का परिवहन माइनस 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान में होना चाहिए और 2 से 4 डिग्री के तापमान में 7 दिन तक रखा जा सकता है। इसी तरह फाइजर की वैक्सीन को माइनस 70 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी है। देश में कोल्ड स्टोरेज की जो स्थिति है वो सीमित और बेहतर नहीं है।
गर्म से फिर ठंडा करने पर नहीं होगा असर
वैक्सीन के प्रभाव या गुणवत्ता के लिए उचित तापमान पर रखना होता है अगर बहुत अधिक गर्म तापमान के संपर्क में आने के बाद वैक्सीन को दोबारा ठंडा किया जाए तो वह असरदार नहीं होगी। वैक्सीन की सुरक्षा के लिए कोल्ड चेन मेंटेन करने पर जोर देना होगा। प्रोफ़ेसर वरदराजन की टीम 37 डिग्री तापमान पर रखी जाने वाली एक वैक्सीन पर काम कर रही है। जिसके लिए कोल्ड चेन की जरूरत नहीं है।
अधिक तापमान से वैक्सीन इसलिए खराब
प्रोफेसर वरदराजन का कहना है कि मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन कोरोना वायरस के जेनेटिक मैटेरियल का सिंथेटिक रूप हैं। जिसे आरएनए कहते हैं। यह वैक्सीन जब लगेगी तो व्यक्ति कभी वायरस की चपेट में आएगा तो प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो जाएगी। अगर तापमान अधिक होगा तो इससे थीम पर बनी वैक्सीन की गुणवत्ता खराब हो जाएगी और वायरस के जेनेटिक मैटेरियल का स्वरूप भी बिगड़ेगा जिससे भी असरदार नहीं होगी।
देशभर में हैं 27 हजार कोल्ड चेन
वैक्सीन का वितरण केंद्र सरकार के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) के तहत होगा। यूआईपी 2018-22 योजना के तहत देशभर में अभी सक्रिय कोल्ड चेन प्वाइंट की संख्या 27 हजार है। इसमें से 750 जिला स्तर और इसके ऊपर हैं बाकी जिला स्तर से नीचे हैं। सरकार के पास 25 लाख स्वास्थ्यकर्मी, 55 हजार कोल्ड चेन स्टाफ भी हैं। देश में साल भर में 39 करोड़ लोगों को 0.9 करोड़ सत्रों में टीका लगाया जाता है।