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आपदा जोखिम न्यूनीकरण: पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने एआई-आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियों पर दिया जोर
Tue, 27 Oct 2026 05:59 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 27 Oct 2026 05:59 PM IST
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पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
- फोटो : ANI
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने मंगलवार को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले दशक में लोगों की जान बचाने के साथ-साथ विकास कार्यों की सुरक्षा करने और आर्थिक नुकसान को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (यूएनडीआरआर) द्वारा आयोजित और भारत तथा यूनाइटेड किंगडम की सह-अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए, उन्होंने जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण, बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण के क्षरण के बीच बढ़ते आपसी संबंधों को रेखांकित किया।
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उन्होंने कहा कि हालांकि पूर्व चेतावनी प्रणालियों, तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार से लोगों की जान बचाने में मदद मिली है, लेकिन आर्थिक नुकसान अभी भी काफी अधिक है। उन्होंने विभागों के बीच काम करने के सीमित दायरे (साइलो) से बाहर निकलकर, जोखिमों और उनके व्यापक परिणामों को समग्र रूप से समझने की आवश्यकता पर बल दिया। आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए 'सेंडाई फ्रेमवर्क' का जिक्र करते हुए, डॉ. मिश्रा ने 2030 तक इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने और आपदा की रोकथाम, शमन तथा संस्थागत क्षमता में अधिक निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला, जिनमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर 'दस-सूत्रीय एजेंडा' (2016) व 2025 में 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' में किए गए संशोधन शामिल हैं।
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इस बात पर जोर देते हुए कि आपदा वित्तपोषण से मापने योग्य परिणाम मिलने चाहिए, उन्होंने लचीले बुनियादी ढांचे, मजबूत शहरी संस्थानों और विकास योजनाओं में प्रकृति-आधारित समाधानों को अधिक व्यापक रूप से शामिल करने की वकालत की। डॉ. मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और 'मल्टी-हैज़र्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम' (कई तरह के खतरों की पूर्व चेतावनी देने वाली प्रणालियां) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन चेतावनियों के आधार पर समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए और वित्तपोषण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
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उन्होंने रिकवरी मैकेनिज्म की अग्रिम योजना बनाने पर भी जोर दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुनर्निर्माण कार्य मौजूदा कमजोरियों को कम करें, न कि उन्हें और बढ़ाएं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने 2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर जी20 कार्य समूह' के गठन का उल्लेख किया।
साथ ही, उन्होंने ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भी इस क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। डॉ. मिश्रा ने तीन प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उभरते और आपस में जुड़े जोखिमों की बेहतर समझ, सार्वजनिक वित्त, बुनियादी ढांचे, शहरों और प्राकृतिक प्रणालियों में लचीलापन लाने के लिए अधिक प्रभावी निवेश और व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से समर्थित मजबूत संस्थान। उन्होंने 'सेंडाई फ्रेमवर्क' की उपलब्धियों को सुदृढ़ करने और 2030 तक इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले दशक में न केवल लोगों की जान बचाने की, बल्कि समुदायों द्वारा बनाई गई संपत्तियों, बुनियादी ढांचे और विकास की रक्षा करने की क्षमता भी दिखनी चाहिए।