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मैसेजिंग एप्स पर सख्ती टली: व्हाट्सएप-टेलीग्राम यूजर्स को बड़ी राहत, सिम-बाइंडिंग नियम अब 31 दिसंबर तक टला
Wed, 01 Apr 2026 11:37 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:37 PM IST
सार
सरकार ने मोबाइल मैसेजिंग एप पर लागू होने वाले सिम-बाइंडिंग को नियम 31 दिसंबर तक के लिए टाल दिया है। सरकार इस नियम के जरिए साइबर फ्रॉड रोकना चाहती है, लेकिन कंपनियों और यूजर्स की चिंताओं को देखते हुए फिलहाल इसे लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है।
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दूरसंचार विभाग
- फोटो : ANI
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विस्तार
मोबाइल मैसेजिंग एप्स को लेकर सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एप्स के लिए लागू होने वाला सिम-बाइंडिंग नियम 31 दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है। पहले यह नियम जल्दी लागू होने वाला था, लेकिन कंपनियों की मांग के बाद सरकार ने समय बढ़ा दिया। सरल भाषा में समझें तो सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि आपका मैसेजिंग एप तभी चलेगा जब आपके फोन में एक एक्टिव (चालू) सिम कार्ड मौजूद होगा। अगर सिम हटा दिया गया या बंद हो गया, तो एप भी काम करना बंद कर सकता है। सरकार का कहना है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी कॉल/मैसेज पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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पहले सरकार ने क्या बनाया था नियम?
सरकार ने पहले एक और नियम बनाया था कि व्हाट्सएप वेब या टेलीग्राम वेब जैसे वेब वर्जन पर यूजर को हर छह घंटे में लॉगआउट कर दिया जाएगा। लेकिन अब इस नियम को भी बदल दिया गया है। अब लॉगआउट एआई आधारित जोखिम जांच के आधार पर होगा। यानी अगर सिस्टम को कुछ संदिग्ध लगेगा तभी आपको लॉगआउट किया जाएगा, वरना बार-बार लॉगआउट नहीं होना पड़ेगा।
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अपराधियों को ट्रैक करने की योजना
सरकार का मानना है कि अभी कई साइबर अपराधी ऐसे कमियों का फायदा उठाते हैं, जहां सिम हटाने या विदेश ले जाने के बाद भी एप्स चलते रहते हैं। इससे वे फर्जी कॉल, 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम, निवेश धोखाधड़ी और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी जैसे अपराध करते हैं। सिम-बाइंडिंग से हर अकाउंट को एक केवाईसी वाले असली सिम से जोड़ना जरूरी होगा, जिससे ऐसे अपराधियों को ट्रैक करना आसान हो जाएगा।
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ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने किया था कानून का विरोध
हालांकि, इस फैसले का विरोध भी हुआ है। टेक कंपनियों के संगठन ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने इसे कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि यह नियम मौजूदा कानून से बाहर है और असंवैधानिक भी हो सकता है। इसके अलावा एक सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 80% लोगों को लगता है कि इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर असर पड़ सकता है। सर्वे के मुताबिक, भारत में कई लोग अपने फोन या सिम को परिवार के साथ शेयर करते हैं। ऐसे में अगर हर बार सिम की जरूरत होगी, तो कई बार एप इस्तेमाल करने में दिक्कत आ सकती है।
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पहले सरकार ने क्या बनाया था नियम?
सरकार ने पहले एक और नियम बनाया था कि व्हाट्सएप वेब या टेलीग्राम वेब जैसे वेब वर्जन पर यूजर को हर छह घंटे में लॉगआउट कर दिया जाएगा। लेकिन अब इस नियम को भी बदल दिया गया है। अब लॉगआउट एआई आधारित जोखिम जांच के आधार पर होगा। यानी अगर सिस्टम को कुछ संदिग्ध लगेगा तभी आपको लॉगआउट किया जाएगा, वरना बार-बार लॉगआउट नहीं होना पड़ेगा।
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अपराधियों को ट्रैक करने की योजना
सरकार का मानना है कि अभी कई साइबर अपराधी ऐसे कमियों का फायदा उठाते हैं, जहां सिम हटाने या विदेश ले जाने के बाद भी एप्स चलते रहते हैं। इससे वे फर्जी कॉल, 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम, निवेश धोखाधड़ी और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी जैसे अपराध करते हैं। सिम-बाइंडिंग से हर अकाउंट को एक केवाईसी वाले असली सिम से जोड़ना जरूरी होगा, जिससे ऐसे अपराधियों को ट्रैक करना आसान हो जाएगा।
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ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने किया था कानून का विरोध
हालांकि, इस फैसले का विरोध भी हुआ है। टेक कंपनियों के संगठन ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने इसे कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि यह नियम मौजूदा कानून से बाहर है और असंवैधानिक भी हो सकता है। इसके अलावा एक सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 80% लोगों को लगता है कि इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर असर पड़ सकता है। सर्वे के मुताबिक, भारत में कई लोग अपने फोन या सिम को परिवार के साथ शेयर करते हैं। ऐसे में अगर हर बार सिम की जरूरत होगी, तो कई बार एप इस्तेमाल करने में दिक्कत आ सकती है।