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देवरिया शेल्टर होम कांड : मुख्य अभियुक्त गिरिजा त्रिपाठी ने रसूख के बूते कराई थी बेटी की नियुक्ति
ब्यूरो, अमर उजाला, गोरखपुर
Updated Fri, 10 Aug 2018 05:27 AM IST
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गिरिजा त्रिपाठी अपने पति मोहन त्रिपाठी के साथ (फाइल फोटो)।
देवरिया कांड की मुख्य अभियुक्त गिरिजा त्रिपाठी की प्रशासनिक महकमे में भी बहुत ऊपर तक पकड़ थी। अपने रसूख के ही बूते उसने 2013 में गोरखपुर के प्रोबेशन विभाग में अपनी बेटी कंचनलता की परिवीक्षा अधिकारी पद पर संविदा पर तैनाती कराई थी।
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निदेशालय से निकली इस नियुक्ति में गोरखपुर के लिए एक ही पद था। जिले स्तर पर साक्षात्कार के लिए तत्कालीन डीएम ने एक कमेटी गठित की थी। करीब 25 अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल हुए मगर सफलता कंचनलता के हाथ लगी।
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विश्वस्त प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक प्रशासनिक महकमे के एक पूर्व आला अफसर की पैरवी पर कंचनलता की नियुक्ति हुई। यही नहीं बाल अपचारियों के होम स्टडी रिपोर्ट लगाने के नाम पर कंचनलता की तरफ से हर केस में रुपये वसूले जाते थे। स्टेटस के हिसाब से वसूली की रकम तय की जाती थी, जो ऊपर तक जाती थी। इतना ही नहीं मां-बेटी की तकरीबन पूरी कारस्तानी से विभाग का हर अफसर, कर्मचारी परिचित था। मगर गिरिजा के रसूख की वजह से कोई बाहर इसकी चर्चा नहीं कर पाता था।
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यही वजह रही कि गिरिजा की संस्था मां विंध्यवासिनी प्रशिक्षण गृह की ओर से संचालित पालना गृह में घोटाला होने के बाद 2016 में ही प्रशासन ने संस्था का नाम काली सूची में डाल दिया, फंडिंग रोक दी गई। मगर बिना अनुमति के उसी संस्था की ओर से संचालित वृद्धाश्रम पर कार्रवाई करने का किसी ने हौसला नहीं जुटाया।
अब जबकि मामला सबके सामने आ गया है तो गिरिजा के अलावा परिवीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात उसकी बेटी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वृद्धाश्रम सील कर वहां रह रहीं पांच महिलाओं को बरगदवां स्थित राजकीय महिला संरक्षण गृह शिफ्ट कर दिया गया। कंचनलता की संविदा भी खत्म कर दी गई और अवैध तरीके से गिरिजा के घर पर ही संचालित वृद्धाश्रम के लिए भी विभाग ने अलग से उनपर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।