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दिल्ली का दम घोट रही है सरकारी एजेंसियों की नाकामी और भ्रष्टाचार

Wed, 31 Oct 2018 08:15 PM IST
अनुमित रॉय चौधरी, कार्यकारी निदेशक विज्ञान एवं पर्यावरण, नई दिल्ली
अनुमित रॉय चौधरी, कार्यकारी निदेशक विज्ञान एवं पर्यावरण, नई दिल्ली Updated Wed, 31 Oct 2018 08:15 PM IST
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Delhi suffocating is the failure of government agencies and corruption
air pollution - फोटो : PTI
दिल्ली वायु प्रदूषण से हाल बेहाल हैं। पिछले साल तो अक्टूबर महीने में ही दशा काफी खराब थी। चार-पांच दिन वायु गुणवत्ता के लिहाज से काफी गंभीर चेतावनी (सीवियर) वाले थे। शुक्र है कि इस बार अक्टूबर में ऐसी स्थिति नहीं है। इसका कारण पिछले साल से उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए कड़े फैसले हैं। इन फैसलों का जितना भी पालन हुआ है, उसका असर दिखाई दे रहा है। दरअसल, इसमें सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण को ध्यान में रखकर इंफोर्समेंट एजेंसियों का तय मानदंडों को लागू न कराना पाना है। इसके पीछे की एक बड़ी वजह भ्रष्टाचार भी है।
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बन रहे हैं भवन, चल रहे हैं वाहन

उच्चतम न्यायालय और पर्यावरण विदों तथा वायु गुणवत्ता की चेतावनी के बाद भी राजधानी क्षेत्र में भवन बन रहे हैं। अनियमित कालोनियों में अब भी तमाम निर्माण कार्य चल रहा है। धूल उड़ रही है, लोग जहां चाह रहे हैं कूड़ा, कचरा जला रहे हैं। इस धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है। हॉट मिक्स प्लांट चल रहे हैं। जो सरकारी हैं वह बंद हो जाते हैं, लेकिन छोटे-मोटे निजी स्तर पर तमाम चलते रहते हैं। 15 अक्टूबर को बदरपुर का प्लांट बंद कर दिया गया है।
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उच्चतम न्यायालय ने केवल आपातकाल सेवाओं के लिए ही डीजल के जनरेटर चलाने की इजाजत दे रखी है। 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहन को सड़क पर न चलने देने का आदेश दिया है। स्टोन क्रशर आदि बंद रखने को कहा है। एनसीआर क्षेत्र के ईंट-भट्टे बंद रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसकी अनुपालना तो लागू कराने वाली सरकारी एजेंसियों पर निर्भर करेगी। इसकी स्थिति निराशा जनक है। उत्साहजनक सुधार नहीं है। पिछले साल उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद भी लोगों ने खूब पटाखे छोड़े। अभी तो दिवाली भी बाकी है।
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वेस्टर्न डिस्टर्वेंस से वढ़ेगा प्रदूषण

अगले सप्ताह तक वेस्टर्न डिस्टर्वेंस का खतरा बढ़ रहा है। हवाओं का रुख कुछ इस तरह होने वाला है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ेगी। इसे केंद्र में रखकर भारतीय मौसम विभाग ने भी चेतावनी जारी की है। किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली भी एक समस्या ही है। हवा के दबाव के कारण सूक्ष्म कण नीचे रह जाते हैं। हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण वायु प्रदूषण बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। लोगों में जागरुकता की भी कमी है। इसके कारण भी दिल्ली का दम घुट रहा है।

क्या होती है परेशानी

नसों के मरीज, हृदय, सांस के रोगी, अस्थमा के पीड़ित का बुरा हाल हो जाता है। पाचन तंत्र प्रभावित होता है, शरीर के तमाम अंगों पर इसका असर पड़ता है। ऐसे समय में इन मरीजों को सुबह न टहलने की सलाह दी जाती है। इनसे भारी व्यायाम न करने को कहा जाता है। सामान्य लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार पांच साल कम उम्र के बच्चों में प्रदूषण का दुष्प्रभाव खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है।

पिछले साल से बेहतर हुए हैं

दिल्ली के वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पहले से बेहतर स्थिति बन पड़ी है। इसका कारण उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद लागू किए गए उपाय हैं। एनजीटी और उच्चतम न्यायालय इस पर लगातार संवेदनशील है। अपने हाल के फैसले में भी न्यायालय ने काफी सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। फिलहाल दो योजना बनी है। एक अपातकाल योजना बनी है। जिसमें तात्कालिक तौर पर निपटने के उपाय हैं। दूसरी दीर्घ अवधि की समग्र योजना है। इसके लिए सरकारी एजेंसियों को चिन्हित किया गया है। यह सब इंपलीमेंट कराने वाली एजेंसियों की सफलता पर निर्भर करेगा।

(शशिधर पाठक की कार्यकारी निदेशक विज्ञान एवं पर्यावरण अनुमित रॉय चौधरी से बातचीत पर आधारित)
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