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सार्क के बाद अब आसियान में पाक को अलग-थलग करने की मुहिम  

Fri, 07 Oct 2016 01:21 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Oct 2016 01:21 AM IST
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Delhi nudge to Asean to criticise Pak
पीएम मोदी और डोभाल
आतंकवाद के सवाल पर सार्क देशों में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मिली बड़ी कूटनीतिक सफलता के बाद भारत ने अब आसियान देशों में भी उसे अलग-थलग करने की कूटनीतिक मुहिम छेड़ दी है। इस मुहिम में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह और एमजे अकबर सहित सरकार के कूटनीतिक धुरंधरों ने मोर्चा संभाल लिया है। सिंगापुर के प्रधानमंत्री की चल रही भारत यात्रा के बाद आसियान देशों के कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष जल्द ही भारत दौरे पर आने वाले हैं। भारत ने इस स्थिति का कूटनीतिक लाभ उठाने की योजना बनाई है।
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इस बीच उड़ी आतंकी हमले के जवाब में किए गए सर्जिकल अटैक के बाद पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के दबाव में आने से भारत खासा उत्साहित है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अपने सेना और आईएसआई प्रमुख को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने या विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ने के लिए तैयार रहने की दी गई नसीहत को भारत बड़ी जीत मान रहा है।
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भारत संयुक्त राष्ट्र  में अमेरिका को चीन और रुस से  नजदीकियां बढाने की पाकिस्तान की धमकी को भी खिसिआहट का संकेत मान रहा है। फिलहाल भारत की निगाहें नवाज की नसीहत के बाद पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के भावी रूख पर है। 
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भारत ने आसियान देशों का सहयोग मांगा

Delhi nudge to Asean to criticise Pak
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वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक हालांकि पाकिस्तान पहली बार दबाव में नहीं आया है, मगर इस बार स्थिति अलग है। दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत जनमानस तैयार हुआ है। यही कारण है कि पाकिस्तान के स्वाभाविक मित्र माने जाने वाले चीन और अरब देशों में शामिल सभी महत्वपूर्ण देशों  ने इस मामले में उससे दूरी बना ली। पाक अधिकृत कश्मीर, बलुचिस्तान, बटालिस्तान सहित कई हिस्सों में विरोध चरम पर है।  हालांकि यह देखना बाकी है कि इस स्थिति में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के रुख में बदलाव आता है या नहीं। क्योंकि पाकिस्तान की सत्ता में वास्तविक नियंत्रण इन्हीं का है।

उधर भारत पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम को और धार देने की तैयारी कर रहा है। इस कड़ी में गुरूवार को आसियान रिजनल फोरम के रक्षा शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात में रक्षा मंत्री परिकर आतंकवाद को बड़ा मुद्दा बनाते हुए आतंकवादी नेटवर्कों को ध्वस्त करने में आसियान देशों का सहयोग मांगा। भारत दौरे पर आए सिंगापुर के प्रधानमंत्री से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्तार से बात की। इस क्रम में सिंगापुर के पीएम ने उड़ी आतंकी हमले और आतंकवाद की कड़ी निंदा की। अब जल्द ही म्यांमार की विदेश मंत्री, थाईलैंड के पीएम बिम्सटेक की बैठक में हिस्सा लेने आ रहे हैं। भारत इन देशों के सामने भी आतंकवाद पर सहयोग मांगेगा। इसके अलावा भारत की योजना अपने प्रतिनिधियों को आसियान के सदस्य देशों का दौरा कराने की है। 
 
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