विमान घोटाला: कोर्ट ने दीपक तलवार की जमानत याचिका की खारिज, सीबीआई ने मांगी न्यायिक हिरासत
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दिल्ली की एक अदालत ने कॉरपोरेट लॉबिस्ट दीपक तलवार की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। सीबीआई उसकी 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत चाहती है। उसे एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के लिए विमान खरीद में वित्तीय अनियमित्ताएं होने के कारण गिरफ्तार किया गया है। यह सभी विमान यूपीए शासनकाल में खरीदे गए थे।
A Delhi Court dismisses Corporate Lobbyist Deepak Talwar's anticipatory bail application in the CBI case against him. CBI has also sought 14 day custody of Talwar (file pic) pic.twitter.com/UmuJC46dLB
— ANI (@ANI) July 26, 2019विज्ञापन
विशेष जज अनिल कुमार सिसोदिया के जब उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी तो उसके बाद सीबीआई ने अदालत परिसर के अंदर से तलवार को गिरफ्तार किया। एजेंसी पूछताछ के लिए तलवार की 14 दिनों की न्यायिक हिरासत चाहती है। जिसके बारे में अदालत आज दिन में फैसला देगी। तलवार वर्तमान में इस घोटाले से जुड़े एक मनी लांड्रिंग (धन शोधन) मामले में न्यायिक हिरासत में है।
तलवार की कथित तौर पर केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान कुछ विमान सौदों में भूमिका रही है। इसी कारण वह एजेंसी की जांच के घेरे में है। तलवार के खिलाफ सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने भ्रष्टाचार के आपराधिक मामलों में केस दर्ज किया है। वहीं आयकर विभाग ने उसपर कर चोरी का आरोप लगाया है।
इससे पहले 19 फरवरी को सीबीआई ने विदेशी अनुदान कानून, एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के कथित उल्लंघन से संबंधित मामले में पूछताछ के लिए दीपक तलवार को हिरासत मे लेने के अनुरोध को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
जिसके बाद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की पीठ ने गैर सकरकारी संगठन (एनजीओ) एडवांटेजेज इंडिया प्राईवेट इंडिया और इसके सचिव मनीष गर्ग से सीबीआई की याचिका पर जवाब मांगा था। तलवार पहले इस संगठन के अध्यक्ष थे।
तलवार को 30 जनवरी को दुबई से स्वदेश लाया गया था। धनशोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार किया था। वह अब तक न्यायिक हिरासत में थे। सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस गैर सरकारी संगठन को 2012 से 2013 और 2015 से 2016 के दौरान 90.72 करोड़ रूपये का विदेशी योगदान मिला था। सीबीआई ने अदालत से कहा था कि जांच में खुलासा हुआ है कि एनजीओ को मिली विदेशी राशि का दुरूपयोग हुआ और कुछ दूसरे उद्देश्यों के लिए इसका इस्तेमाल हुआ।