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सतीशन सरकार का बड़ा फैसला: आरटीआई से छूट मिली, फिर भी नहीं छिपेगा भ्रष्टाचार; गृहमंत्री चेन्निथला क्या बोले?

Tue, 27 Oct 2026 02:05 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 27 Oct 2026 02:05 PM IST
सार

केरलम सरकार ने साफ किया है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के कुछ विभागों को सूचना के अधिकार कानून से छूट मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी जानकारी जांच पूरी होने के बाद सार्वजनिक की जाएगी। वहीं, गृह मंत्री के मुताबिक, यह छूट सभी मामलों पर लागू नहीं होगी।

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decision by Satheesan government in Keralam Exemption from RTI granted yet corruption will not remain hidden
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केरलम सरकार ने कहा है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दो विभागों को सूचना के अधिकार कानून से छूट मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी जांच पूरी होने के बाद दी जाएगी। केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने मंगलवार को कहा कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दो विभागों को सूचना के अधिकार कानून से छूट देने का मकसद भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी छिपाना नहीं है। सरकार का उद्देश्य जांच को प्रभावित किए बिना पारदर्शिता बनाए रखना है। उन्होंने साफ किया कि सरकार सूचना के अधिकार कानून को कमजोर नहीं करना चाहती।

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जांच पूरी होने के बाद मिलेगी जानकारी
विधानसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक के.के. वलसाराज के सवाल का जवाब देते हुए चेन्नीथला ने कहा कि जांच के दौरान संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक करने से आरोपियों को फायदा मिल सकता है। इससे सबूत जुटाने और मामले की तह तक पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक कुछ जानकारियों को गोपनीय रखना जरूरी है।
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दो विभागों को मिली है छूट
विधायक वलसाराज ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के टी-1 और टी-2 विभागों को सूचना के अधिकार कानून से छूट देने पर चिंता जताई। ये विभाग भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों की गोपनीय फाइलें संभालते हैं। विधायक ने सवाल उठाया कि इस फैसले से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है और आम लोगों के सूचना पाने के अधिकार की रक्षा कैसे होगी।
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भ्रष्टाचार के मामलों में देनी होगी जानकारी
चेन्नीथला ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके तहत छूट प्राप्त संस्थानों को भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी देनी पड़ सकती है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

केवल चुनिंदा मामलों में लागू होगी छूट
गृह मंत्री के मुताबिक, यह छूट सभी मामलों पर लागू नहीं होगी। करीब एक से दो प्रतिशत मामलों में ही इसकी जरूरत पड़ती है। उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच, रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि संवेदनशील जानकारी समय से पहले सार्वजनिक होने से जांच प्रभावित हो सकती है।

प्राथमिकी और आरोपपत्र से मिलेगी जानकारी
चेन्नीथला ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी और आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए जाते हैं। इसके बाद नियमानुसार इनसे जुड़ी जानकारी जनता के लिए उपलब्ध हो सकती है। उन्होंने कहा कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संबंधित जानकारी उसकी वेबसाइट पर भी प्रकाशित की गई है।


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पुरानी सिफारिश के आधार पर फैसला
मंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल में सतर्कता निदेशक की ओर से दी गई सिफारिश पर कार्रवाई की है। 11 जनवरी, 2025 को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करने से चल रही जांच पर क्या असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि खुफिया ब्यूरो और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी कई केंद्रीय एजेंसियों को सूचना के अधिकार कानून से छूट मिली हुई है। विधायक वलसाराज ने जोर दिया कि भ्रष्टाचार के बारे में जानना नागरिकों का अधिकार है। चेन्नीथला ने भरोसा दिलाया कि सरकार पारदर्शिता बनाए रखने के साथ जांच की गोपनीयता भी सुरक्षित रखेगी।

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