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एक लाख रुपये की रिश्वत जुटा पाता गरीब तब तक पुलिस वालों ने ले ली बेकसूर की जान
Sat, 29 Dec 2018 09:32 PM IST
अमित मंडल
अवधेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
अवधेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Sat, 29 Dec 2018 09:32 PM IST
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Mandi Dhanaura
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कड़ाके की ठंड में रात के करीब 9 बजे थे। गुड्डी नाम की एक महिला शॉल ओढ़े पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ी बालकिशन उर्फ बाली की लाश का इंतजार कर रही थी। उसने बाली को पिछले करीब 4-5 दिन से नहीं देखा है। लेकिन उसने उससे मिलने की हर कोशिश की। रुपये उधार लिए, घर का सामान बेचा, यानी हर तरीके से पैसे जुटाए ताकी बाली को बचाया जा सके। गुड्डी ने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर ही खड़े होकर वो रुपये दिखाए जिन्हें लेकर वो बाली को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पहुंची थी।
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पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी- परिवार
पीड़ित परिवार का घर
बालकिशन रिश्ते में गुड्डी के जीजा थे। उन्हें बीते रविवार पुलिस ने हिरासत में लिया था। पीड़ित परिवार के मुताबिक पुलिस ने उसे यह कहकर हिरासत में लिया था कि उसकी कार के कागजात फर्जी हैं। इसी आरोप में गांव बसी मुस्तकम निवासी 35 वर्षीय बालकिशन को पुलिस ने थाना धनौरा में बंद कर दिया। परिजनों के मुताबिक बाली ने एक साल पहले हापुड़ जिले से किसी एजेंट के माध्यम से यह कार खरीदी थी।
बालकिशन के साले की पत्नी गुड्डी का आरोप है कि उसे छुड़ाने की एवज में थाना अध्यक्ष ने पांच लाख रुपये की मांग की। उनका कहना है कि हमने जैसे तैसे एक लाख रुपये की व्यवस्था कर मंगलवार को पुलिस को दे दिए। लेकिन पुलिस ने बालकिशन को छोड़ने से मना कर दिया, साथ ही एक लाख रुपये की ओर मांग की। इसके बाद सभी रिश्तेदार और पैसे जुटाने में लग गए।
गुड्डी के मुताबिक, उन्होंने पशु बेचकर, घर का सामान और लोगों से उधर रुपये लेकर एक लाख रुपये की और व्यवस्था की। लेकिन जैसे ही रिश्तेदार रकम लेकर बुधवार सुबह थाने पहुंचे तब तक बाली की पुलिस कस्टडी में मौत हो चुकी थी। मौत के बाद पुलिस ने आनन-फानन में उसकी लाश को अमरोहा पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बालकिशन के साले की पत्नी गुड्डी का आरोप है कि उसे छुड़ाने की एवज में थाना अध्यक्ष ने पांच लाख रुपये की मांग की। उनका कहना है कि हमने जैसे तैसे एक लाख रुपये की व्यवस्था कर मंगलवार को पुलिस को दे दिए। लेकिन पुलिस ने बालकिशन को छोड़ने से मना कर दिया, साथ ही एक लाख रुपये की ओर मांग की। इसके बाद सभी रिश्तेदार और पैसे जुटाने में लग गए।
गुड्डी के मुताबिक, उन्होंने पशु बेचकर, घर का सामान और लोगों से उधर रुपये लेकर एक लाख रुपये की और व्यवस्था की। लेकिन जैसे ही रिश्तेदार रकम लेकर बुधवार सुबह थाने पहुंचे तब तक बाली की पुलिस कस्टडी में मौत हो चुकी थी। मौत के बाद पुलिस ने आनन-फानन में उसकी लाश को अमरोहा पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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बाली की मौत से फूटा गुस्सा, जमकर तोड़फोड़
एसडीएम की गाड़ी में तोड़फोड़
बाली की मौत से पीड़ित परिवार का गुस्सा फूट गया और गांव सहित आस पास के हजारों लोग थाने पहुंच कर हंगामा करने लगे। उग्र भीड़ ने गजरौला-चांदपुर मार्ग को जाम कर दिया। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस प्रशासन को मुरादाबाद, संभल और अमरोहा से पुलिस बुलानी पड़ी।
भीड़ को समझाने पहुंचे एसडीएम की गाड़ी में भी लोगों ने तोड़फोड़ की। लोगों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। पीड़ित परिवार ने कहा कि बालकिशन को थाने में बेरहमी से पीटा गया। उसके पेट में डंडे मारे और गले को भी दबाया गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई। मामला बढ़ता देख अपर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार ने धनौरा थाना के प्रभारी निरीक्षक अरविंद शर्मा और 4 होमगार्ड समेत 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया।
भीड़ को समझाने पहुंचे एसडीएम की गाड़ी में भी लोगों ने तोड़फोड़ की। लोगों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। पीड़ित परिवार ने कहा कि बालकिशन को थाने में बेरहमी से पीटा गया। उसके पेट में डंडे मारे और गले को भी दबाया गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई। मामला बढ़ता देख अपर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार ने धनौरा थाना के प्रभारी निरीक्षक अरविंद शर्मा और 4 होमगार्ड समेत 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया।
अनुसूचित जाति के इस परिवार की माली हालत बेहद खराब
मृतक बालकिशन का घर
अनुसूचित जाति के कम पढ़े लिखे इस परिवार की माली हालत बेहद खराब है। बाली अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गया है। दो बेटी और दो बेटे। सबसे बड़ी बेटी 6वीं में पढ़ती है, दूसरी बेटी तीसरी में और बेटा दूसरी कक्षा में पढ़ता है। जबकि सबसे छोटा बेटा अभी स्कूल भी नहीं जाता है।
मृतक की पत्नी कुंती
बाली की पत्नी कुंती का रो-रोकर बुरा हाल है। अब तो उसके आंसू भी सूख गए हैं। वह सिर्फ इतना ही कहती है कि मेरे बेकसूर पति के साथ ऐसा क्यों किया। उनकी गलती क्या थी, उन्हें पुलिस ने क्यों पीटा? रुंधी हुई आवाज में वह कहती हैं कि अब मेरे बच्चों का क्या होगा। उनका घर कैसे चलेगा?