कांग्रेस: सीडब्ल्यूसी ने पहले दिन पारित किया 14 सूत्रीय प्रस्ताव, SC-ST-OBC आरक्षण की सीमा बढ़ाने की भी मांग
Congress: कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने हैदराबाद में शनिवार को शुरू हुई अपनी दो दिवसीय बैठक के पहले दिन 14 सूत्री प्रस्ताव पारित किया है। इसकी शुरुआत जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई है।
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कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने हैदराबाद में शनिवार को शुरू हुई अपनी दो दिवसीय बैठक के पहले दिन 14 सूत्री प्रस्ताव पारित किया है। इसकी शुरुआत जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई है। साथ मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष के रूप में एक साल के कार्यकाल और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तारीफ की गई है। सीडब्ल्यूसी ने केंद्र सरकार से मांग की कि 18 सितंबर से शुरू हो रहे संसद के पांच दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पारित किया जाए। प्रस्ताव में जातिगत जनगणना की मांग भी उठाई गई है और कहा गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण की मौजूदा अधिकतम सीमा को बढ़ाया जाए।
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार के आने के बाद से संसदीय बहस और स्क्रूटनी लगभग गायब ही हो गई है। कई महत्वपूर्ण और दूरगामी कानूनों को उचित स्क्रूटनी और चर्चा के बिना जल्दबाजी में पास कराया गया। संसद में पेश किया गया मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति आदि) विधेयक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से गंभीर समझौता करने वाला है। सीडब्ल्यूसी ने कहा कि सरकार कभी भी अचानक संसद का विशेष सत्र बुला लेती है।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सार्वजनिक चिंता और महत्व से जुड़े नौ गंभीर मुद्दों को उठाया, जिन पर इस विशेष सत्र में चर्चा की आवश्यकता है। कांग्रेस कार्यसमिति महिला आरक्षण बिल को संसद के इस विशेष सत्र में पारित करने की मांग करती है। जाति जनगणना की मांग उठाते हुए कहा कि पूरे देश से जाति जनगणना की मांग उठ रही है। इस मांग को मानने से भाजपा के इन्कार ने सामाजिक और आर्थिक न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की कमी के साथ-साथ पिछड़े वर्गों, दलितों एवं आदिवासियों के प्रति उनकी सोच को सबके सामने ला दिया है।
देश को विभाजनकारी राजनीति से मुक्त कराने का लिया संकल्प
सीडब्ल्यूसी ने एक प्रस्ताव में इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) की निरंतर एकजुटता का स्वागत किया। समिति ने कहा कि विपक्षी गठबंधन की एकजुटता से प्रधानमंत्री और भाजपा बौखलाई हुई हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि सीडब्ल्यूसी इंडिया की पहल को वैचारिक और चुनावी रूप से सफल बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी के संकल्प को दोहराती है ताकि हमारा देश विभाजनकारी और ध्रुवीकरण की राजनीति से मुक्त हो, सामाजिक समानता और न्याय में विश्वास रखने वाली ताकतें मजबूत हों और लोगों को एक उत्तरदायी, संवेदनशील, पारदर्शी, जवाबदेह और जिम्मेदार केंद्र सरकार मिले।
सांप्रदायिक एकता में देशवासियों के साथ खड़े
एक अन्य प्रस्ताव में कहा गया कि सीडब्ल्यूसी सांप्रदायिक एकता, सामाजिक, आर्थिक समानता, नौजवानों की अपेक्षाओं व एक सशक्त भारत की गौरव यात्रा में देशवासियों के साथ मजबूती से खड़ी है। कार्यसमिति यह प्रण लेती है कि वह एक ऐसे देश का निर्माण करेगी जिसमें हर जाति व धर्म के लोग, अमीर, गरीब, नौजवान और बुजुर्ग सब गौरवान्वित महसूस करें। सीडब्ल्यूसी ने बढ़ती बेरोजगारी और विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कहा कि वादे के अनुसार हर साल दो करोड़ नौकरी देने में विफल रहने के बाद प्रधानमंत्री का तथाकथित रोजगार मेला तमाशा के अलावा कुछ नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ और सिर्फ धोखा है।
किसानों से किए एमएसपी के वादे की दिलाई याद
कांग्रेस कार्यसमिति ने मोदी सरकार को एमएसपी और अन्य मांगों के मुद्दों पर किसानों एवं किसान संगठनों से किए गए वादों की याद दिलाई। कहा कि किसान बढ़ते कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। नोटबंदी की मार और सरकार से किसी भी तरह का सपोर्ट न मिलने के कारण एमएसएमई सबसे खराब दौर में हैं। एक्सपोर्ट मार्केट सिकुड़ गया है और निर्यात में गिरावट आई है। निवेश और उपभोग का इंजन मंद पड़ा हुआ है। सरकार अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में विफल रही है। आर्थिक परिदृश्य निराशाजनक बना हुआ है। ऐसा लगता है कि इस सरकार की एकमात्र चिंता सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट है।
अदाणी पर जेपीसी की मांग दोहराई
सीडब्ल्यूसी ने अदाणी कारोबारी समूह के लेनदेन पर अबतक हुए और अभी भी लगातार हो रहे गंभीर एवं चौंकाने वाले खुलासों की जांच के लिए जेपीसी की मांग दोहराई। कहा कि अदाणी समूह प्रधानमंत्री की घनिष्ठ मित्रता और सरकार की पक्षपातपूर्ण नीतियों एवं प्रशासनिक उदारता का प्रमुख लाभार्थी रहा है।
एक देश, एक चुनाव संघीय ढांचे पर हमला
सीडब्ल्यूसी ने कहा कि एक देश, एक चुनाव का प्रस्ताव देश के संघीय ढांचे पर एक और हमला है। मोदी सरकार ने राज्यों के कर राजस्व हिस्सेदारी में कमी कर, राज्यपाल के कार्यालयों का दुरुपयोग कर, विपक्षी दलों के शासित राज्यों में योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने में बाधाएं उत्पन्न कर सुनियोजित ढंग से संघवाद को कमजोर कर दिया है। केंद्र ने विपक्षी राज्यों को इमरजेंसी फंड और आपदा राहत देने से भी इन्कार किया है। हिमाचल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां बाढ़ और भूस्खलन से काफी नुकसान पहुंचा है।
चीन पर पीएम ने देश को गुमराह किया
सीडब्ल्यूसी ने प्रस्ताव में कहा कि वह स्पष्ट शब्दों में चीन के भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ और नक्शे में अरुणाचल प्रदेश तथा भारत के अन्य हिस्से को शामिल करने जैसी उकसावे की नीति की निंदा करती है। यह बेहद अफसोसजनक है कि 19 जून, 2020 को चीन को क्लीनचिट देकर और भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की बात से इन्कार कर प्रधानमंत्री ने देश को गुमराह किया। उनका वह बयान न सिर्फ हमारे जवानों की शहादत का अपमान है बल्कि उससे चीन को सीमा का उल्लंघन जारी रखने के लिए भी प्रोत्साहन मिला है। समिति सरकार से चीन के साथ सीमा विवाद पर स्थिति स्पष्ट करने और भारतीय क्षेत्र की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए किसी भी चुनौती के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने की अपील करती है।