सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा व अस्थाना के बीच तनातनी दूर करेंगे सीवीसी
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सीबीआई के नंबर 1 और नंबर 2 अधिकारियों के बीच तनातनी को दूर करने के लिए मध्यस्थता की जिम्मेदारी मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) केवी चौधरी को दी जा सकती है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल इस मामले को लंबा नहीं खिंचने देना चाहते। एजेंसी की छवि बचाने और घूसखोरी का आरोप झेल रहे विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को जल्द उनके मूल कैडर गुजरात भेजा जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक अस्थाना के खिलाफ एफआईआर करने से पहले नियम का पालन नहीं करने के कारण शीर्ष नेतृत्व नाराज है। हालांकि सीबीआई का कहना है कि इस मामले में केंद्र से इजाजत की जरूरत नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद पीएम और एनएसए ने आलोक वर्मा को कानून और नियम के मुताबिक आगे बढ़ने को कहा है।
छह महीने से लगा रहे थे एक दूसरे पर आरोप
सूत्र बताते हैं कि वर्मा और अस्थाना सीवीसी को पिछले छह महीने से लिखित तौर पर एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगा रहे थे। लिहाजा सीवीसी को ही इसकी मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी जा रही है। अस्थाना के खिलाफ एफआईआर के बाद वर्मा ने उनके निलंबन की सिफारिश भी की है, लेकिन सरकार की तरफ से हरी झंडी नहीं मिल रही है।