कांग्रेस रख सकती है अखिलेश पर हाथ
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कांग्रेस अधिकारिक तौर पर फिलहाल अकेले ही चुनाव लडने की बात कह रही है। लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निष्कासन के बाद अखिलेश और कांग्रेस के हाथ मिलाने की चर्चा गरम हो गई है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव के साथ अंदरखाने गठबंधन को लेकर जहां बात खत्म हुई थी एक बार फिर शुरू हो सकती है। कांग्रेस ने देश के सबसे बड़े राज्य में अस्थिरिता पर चिंता जताई है।
कांग्रेस की यूपी टीम के नेता गुलाम नबी आजाद, राज बब्बर, शीला दीक्षित, संजय सिंह और प्रमोद तिवारी लगातार समाजवादी पार्टी के साथ किसी भी तरह की बातचीत या गठबंधन से इंकार करते रहे हैं।
बावजूद रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहले मुलायम सिंह यादव और फिर अखिलेश यादव से भी मिले थे। वहीं प्रो. रामगोपाल के निर्देश पर सांसद नरेश अग्रवाल सोनिया गांधी के सलाहकार अहमद पटेल से मिल चुके हैं।
बदले हालात में बदलेगा बातचीत और सीटों का आंकड़ा
सूत्रों की मानें गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस कम से कम सवा सौ सीटों पर चुनाव लडना चाहती है जबकि उस समय सपा 50-60 सीटों के लिए तैयार थी। बताते हैं कि अब बदले हालात में बातचीत और सीटों का आंकड़ा भी बदलेगा।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला कहते हैं कि पार्टी सभी सीटों पर अकेले चुनाव लडने की तैयारी कर रही है और सक्षम भी है। अभी किसी प्रकार की किसी से कोई चर्चा नहीं है। सपा के घमासान पर उनका कहना है कि इस पर टिप्पणी उचित नहीं है, लेकिन राज्य में राजनीतिक अस्थिरिता पर चिंतित हैं।
उनका कहना है कि भाजपा पिछले दरवाजे वहां सरकार बनाने का मंसूबा देख रही है। जिस तरह केंद्र सरकार ने पहले उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार को गिराने का प्रयास किया और फिर अरुणाचल में कांग्रेस सरकार गिराया है वैसा ही यूपी में भी दोहराना चाहती है।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से कांग्रेस अपेक्षा करती है कि केंद्र की शक्तियों और राज्यपाल के दुरुपयोग करने से बाज आएंगे।
प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद का कहना है कि बीजेपी और बीएसपी की तरह हम किसी स्थिति का फायदा नहीं उठाना चाहते हैं। ये उनकी अनदुरुनी लड़ाई है। यह राजनीति खेलने का समय नहीं है परिवार को सबसे पहले हालात सामान्य करने होंगे।