Coronavirus News: सामुदायिक प्रसार में नहीं पता चलता, कब और कैसे हुआ संक्रमण
Coronavirus in India: देश में कोरोना वायरस के आने के 262 दिन बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने स्वीकार किया है कि देश के कुछ जिलों में इसका सामुदायिक प्रसार हो चुका है।डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सामुदायिक प्रसार की स्थिति बनती है जब संक्रमित या स्वास्थ्य विभाग को यह पता चले कि उसे संक्रमण आखिर कैसे और कहां से हुआ है। यही स्थिति गंभीर होती है जिसमें बीमारी तेजी से अपना पांव पसारती है।
महामारी के अलग-अलग चरण को समझें कोई बीमारी महामारी रूप तब लेती है जब वह एक से दूसरे विदेश में फैलने लगती है। दूसरे चरण में बीमारी का स्थानीय स्तर पर प्रचार होना शुरू होता है इसमें ट्रेसिंग आसान होती है। लॉकडाउन के दौरान देश में यही स्थिति थी तीसरा चरण सामुदायिक प्रचार होता है। डब्ल्यूएचओ की कम्युनिटी ट्रांसमिशन गाइडलाइन के अनुसार, जहां भी कम्युनिटी ट्रांसमिशन का अंदेशा है वहां ट्रेस टेस्ट और ट्रीटमेंट की नीति पर काम करना होगा।
जांच के साथ मरीजों की संख्या बढ़ रही है तो कंटेनमेंट जोन बनाना होगा और उसी अनुपात में चिकित्सकीय व्यवस्था का इंतजाम करना होगा। तभी भयावह स्थिति से बचा जा सकता है।
सिर्फ भीड़भाड़ पर रोक से ही बचाव संभव
प्रिज्म हेल्थ नॉर्थ टैक्सास के पूर्व निदेशक डॉ. जॉन कार्लो का कहना है कि भीड़भाड़ पर पूरी तरह से रोक लगे तो सामुदायिक प्रसार से बचाव संभव है। कोई क्षेत्र जहां मरीजों की संख्या अधिक है और वहां सब कुछ सामान्य तरह से चल रहा है तो आउटब्रेक की संभावना अधिक है। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। जब तक टीका नहीं आ जाता है तब तक लोगों को अपने स्तर पर सावधानी बरतनी होगी।
ऐसे रोक सकते हैं कोरोना वायरस का प्रसार
- मास्क पहने, हाथों को धोते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
- भीड़भाड़ पर रोक, आयोजन पर रोक लगे जिससे लोग एकत्र न हों।
- स्क्रीनिंग पर जोर देना होगा सभी अपने स्तर पर सावधानी बरतें।
- संक्रमित के संपर्क में आने वालों को तुरंत आइसोलेट किया जाए।
- किसी क्षेत्र में 10 से ज्यादा मरीज है तो वह कंटेनमेंट जोन घोषित हो।
- लक्षण आने पर स्वास्थ्य विभाग को फोन करें तब अस्पताल जाएं।