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कोरोना की जांच में अब नहीं होगी देरी, आधे घंटे में मिलेगी रिपोर्ट

Tue, 16 Jun 2020 08:04 AM IST
श्रीधर मिश्रा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Tue, 16 Jun 2020 08:04 AM IST
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Corona investigation will no longer be delayed, report will be available in half an hour
फाइल फोटो - फोटो : PTI

कोरोना वायरस की जांच को लेकर एक बड़ी राहत की खबर है। अब जांच के लिए लंबी कतारों के साथ रिपोर्ट आने का ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कोरिया की कंपनी ने एक ऐसी एंटीजन किट बनाई है जो कि आधे घंटे में ही परिणाम बता देती है। दिल्ली एम्स और आईसीएमआर ने इन किट्स का परीक्षण करने के बाद जांच की अनुमति दे दी है। नाक से सैंपल लेने के बाद 15 से 30 मिनट में यह किट जांच परिणाम बता देती है। अगर कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित मिलता है तो उसका दोबारा आरटी-पीसीआर जांच कराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कोई निगेटिव मिलता है तो उसके सैंपल की लैब में आरटी-पीसीआर जांच करानी होगी।

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इसके पीछे एक वजह है, दरअसल एम्स और आईसीएमआर की टीम ने जब इन किट्स का परीक्षण किया तो उन्हें 99 से 100 फीसदी तक ट्रू निगेटिव और 50 से 84 फीसदी तक ट्रू पॉजिटिव परिणाम देखने को मिले हैं। साधारण रुप से देखें तो इसका मतलब यह हुआ है कि किट अगर पॉजिटिव रिपोर्ट देती है तो इस पर भरोसा किया जा सकता है। हालांकि, संक्रमण के फैलाव को लेकर निगेटिव की आरटी पीसीआर जांच जरूरी है।
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने किट के इस्तेमाल को लेकर राज्यों को दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। एसडी बायोसेंसर कंपनी की इस किट का इस्तेमाल सख्त चिकित्सीय निगरानी में कराने के अलावा जांच करने वाला पीपीई इत्यादि से कवर होना चाहिए।
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दरअसल मरीजों के उपचार के लिहाज से अभी तक आरटी पीसीआर जांच को बेहतर माना जा रहा है। हालांकि, एक सैंपल में दो से तीन घंटे का वक्त लगने के चलते काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली के अस्पतालों की बात करें तो यहां रिपोर्ट मिलने में लोगों को 10 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके पीछे ज्यादा जांच और प्रति सैंपल में अधिक वक्त लगना है। ऐसी स्थिति में आईसीएमआर इस रैपिड एंटीजन डिटेक्शन किट को एक अहम जांच विकल्प के रुप में देख रहा है।

इन जगहों पर किया जा सकता है इस्तेमाल

कंटेनमेंट जोन या हॉटस्पॉट, इंफ्लूएजा फ्लू ग्रस्त रोगी, संक्रमित मरीज के काफी संपर्क में आए लोग, पहले से किसी बीमारी से प्रभावित मरीज की जांच एंटीजन किट्स के जरिए की जा सकती है।

अस्पताल फ्लू से प्रभावित रोगियों के अलावा संदिग्ध मरीज, बिना लक्षण वाले रोगी, बुजुर्ग, पहले से बीमार, कैंसर, प्रत्यारोपण, डायलिसिस, सर्जरी से पहले बिना लक्षण वाले मरीज और नॉन सर्जिकल केस इत्यादि के मरीजों की जांच एंटीजन किट्स के जरिए संभव है।


किट पर लाल-गुलाबी रंग देगा जानकारी

नाक से सैंपल लेने के बाद वीटीएम में स्वैब को डाला जाता है। इसके बाद किट पर मौजूद एक निश्चित जगह पर सैंपल की तीन बूंद को डाला जाता है। इसके बाद किट को 15 से 30 मिनट के लिए छोड़ दिया जाता है। अगर किट पर एक ही तरह का रंग दिखाई दे तो वह जांच मान्य नहीं है लेकिन अगर एक गहरा और दूसरा हल्का रंग दिखाई दे तो उसे मान्यता दी जा सकती है। लाल और गुलाबी रंग की पट्टियां सैंपल पॉजिटिव या निगेटिव मिलने की जानकारी देंगी।

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