संविधान के दायरे में हो कश्मीर के स्थायी समाधान पर बातचीत- मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के स्थायी समाधान के लिए संविधान के दायरे के भीतर रहकर बातचीत का रास्ता निकालने का संकेत दिया है। घाटी के मौजूदा बिगड़े हालात पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा में जो भी शख्स मारा जा रहा है वह अपना, देश का ही हिस्सा है।
44 दिन के बिगड़े हालात पर कश्मीर केविपक्षी दलों के नेताओं से हुई मुलाकात में प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा में मारे जाने वाले युवक, सुरक्षा और पुलिस कर्मी हमारे बीच के ही हैं।
नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) नेता और राज्य के पूर्व मुख्य मंत्री उमर अबदुल्ला की अगुवाई में आए विपक्षी दल ने पीएम से प्रदर्शनकारियों पर पिलेट गन के इस्तेमाल तुरंत रोकने की मांग की।
सिर्फ विकास कश्मीर समस्या का समाधान नहीं
सोमवार को सौहार्दपूर्ण और खुले माहौल में हुई बातीचीत में उमर ने केंद्र से बिना समय गंवाए समस्या के राजनीतिक समाधान की प्रक्रिया शुरु करने को कहा। उमर ने कहा कि हम कश्मीर में पहले की गई गलतियां ना दोहराएं। इस पेशकश पर पीएम ने कहा कि बातचीत स्थायी और टिकाउ समाधान के उद्देश्य से करनी पड़ेगी।
इसके लिए जरुरी है कि बातचीत संविधान केदायरे में हो। पीएम ने सभी राजनीतिक दलों से इसके समाधान के लिए आगे आने को कहा है। राज्य के विपक्षी नेताओं से मोदी ने कहा कि केंद्र राज्य के विकास के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। लेकिन सिर्फ विकास कश्मीर समस्या का समाधान नहीं है।
गौरतलब है कि यह दल प्रधानमंत्री से पहले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर चुका है। नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान कहा कि उनकी सरकार इस संकट की घड़ी में जम्मू-कश्मीर को लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आवाम तक पहुंचने की अपील की है।