{"_id":"5a14c0984f1c1b6e548be805","slug":"controversy-in-tamil-and-marathas-on-sambar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सांभर की खोज किसने की, तमिल और मराठियों में बढ़ा विवाद","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सांभर की खोज किसने की, तमिल और मराठियों में बढ़ा विवाद
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Wed, 22 Nov 2017 06:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रसगुल्ला की खोज किसने की? पश्चिम बंगाल को रसगुल्ले का जीआई टैग मिलने से ओडिशा के साथ चल रहा विवाद खत्म हो गया। देश में एक और डिश है, जिसकी खोज को लेकर अभी फैसला नहीं हुआ। यह डिश है, सांभर। तमिल और मराठी इस पर अपना-अपना दावा जताते रहे हैं। ज्यादातर लोग सांभर को द्रविड़ विशेषकर तमिल पाक संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। हालांकि कई रिपोर्ट में दावा किया जाता रहा है कि यह मराठी व्यंजन है। तमिलनाडु के कुछ गांव में सांभर को महाराष्ट्र के सौर दाम आमटी का ही एक रूप माना जाता है।
मराठों ने तीन शताब्दी तक तमिलनाडु के कई हिस्सों पर राज किया
शिवाजी के पिता बीजापुर के सुल्तान शाहजी ने दक्षिणी कर्नाटक पर हमला कर कब्जा किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे वेनकोजी ने 1974 में तमिलनाडु के राजा तंजावुर को अपने अधीन कर लिया। इस तरह मराठों ने 19वीं शताब्दी के मध्य तक तमिलनाडु के पूर्वी तटों पर राज किया। बाद में अंग्रेजों ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
मिश्रित संस्कृति में सांभर और मृदंगम की खोज
मराठा राज के दौरान तमिलनाडु में मराठी बोलने वालों की आबादी बढ़ गई। इस तरह वहां दोनों राज्यों की मिश्रित संस्कृति विकसित हुई। इसी संस्कृति में वाद्य यंत्र मृदंगम विकसित हुआ। वहीं इस संस्कृति की दूसरी खोज सांभर था, जो जल्द ही लोकप्रिय होकर पूरे उपमहाद्वीप में फैल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मराठों ने तीन शताब्दी तक तमिलनाडु के कई हिस्सों पर राज किया
शिवाजी के पिता बीजापुर के सुल्तान शाहजी ने दक्षिणी कर्नाटक पर हमला कर कब्जा किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे वेनकोजी ने 1974 में तमिलनाडु के राजा तंजावुर को अपने अधीन कर लिया। इस तरह मराठों ने 19वीं शताब्दी के मध्य तक तमिलनाडु के पूर्वी तटों पर राज किया। बाद में अंग्रेजों ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
विज्ञापन
मिश्रित संस्कृति में सांभर और मृदंगम की खोज
मराठा राज के दौरान तमिलनाडु में मराठी बोलने वालों की आबादी बढ़ गई। इस तरह वहां दोनों राज्यों की मिश्रित संस्कृति विकसित हुई। इसी संस्कृति में वाद्य यंत्र मृदंगम विकसित हुआ। वहीं इस संस्कृति की दूसरी खोज सांभर था, जो जल्द ही लोकप्रिय होकर पूरे उपमहाद्वीप में फैल गया।
विज्ञापन
कैसे बना सांभर
मराठी दाल आमटी में खट्टेपन के लिए कोकुम डालते हैं। महाद्वीप के बाकी लोग खट्टे के लिए इमली का इस्तेमाल करते हैं। तंजावुर में रहने वाले मराठी समुदाय की नंदिनी विट्ठल के मुताबिक चूंकि तंजावुर में कोकुम नहीं मिलता था, इसलिए मराठियों ने इमली डाल दी और सांभर बना।
विट्ठल के मुताबिक शिवाजी के बेटे सांभाजी के नाम पर ही इस व्यंजन का नाम सांभर पड़ा। पर वेनकोजी और शिवाजी सौतेले भाई थे और दोनों ने एक दूसरे को कभी पसंद नहीं किया। यह कहानी हल्की पड़ जाती है।
इडली पर भी विवाद
कुछ आहार विशेषज्ञों का कहना है कि इडली पर भी विवाद है। इंडोनेशिया में इडली जैसा राइस केक बनता है।
व्यंजन को लेकर कई देशों में विवाद
लेबनान और इस्रायल चिकपी डिप और हम्स पर भिड़ चुके हैं। वहीं बकरी के दूध से बनने वाले नमकीन पनीर फेटा को बुल्गारिया और ग्रीस के लोग अपना-अपना बताते हैं।
विट्ठल के मुताबिक शिवाजी के बेटे सांभाजी के नाम पर ही इस व्यंजन का नाम सांभर पड़ा। पर वेनकोजी और शिवाजी सौतेले भाई थे और दोनों ने एक दूसरे को कभी पसंद नहीं किया। यह कहानी हल्की पड़ जाती है।
इडली पर भी विवाद
कुछ आहार विशेषज्ञों का कहना है कि इडली पर भी विवाद है। इंडोनेशिया में इडली जैसा राइस केक बनता है।
व्यंजन को लेकर कई देशों में विवाद
लेबनान और इस्रायल चिकपी डिप और हम्स पर भिड़ चुके हैं। वहीं बकरी के दूध से बनने वाले नमकीन पनीर फेटा को बुल्गारिया और ग्रीस के लोग अपना-अपना बताते हैं।