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खड़से ने 49 लाख कम भरी स्टांप ड्यूटी, जानें कैसे उठाया राजस्व मंत्री होने का फायदा

Thu, 02 Jun 2016 01:12 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 02 Jun 2016 01:12 PM IST
सार

  • खड़से के प्रभाव के चलते रजस्ट्री की हुई अनदेखी
  • अमित शाह ने मांगी एकनाथ पर रिपोर्ट

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Controversy grips Eknath Khadse, Shah seeks report
एकनाथ खड़से - फोटो : फोटो- ट्विटर

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार में राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से के जमीन खरीद मामले में नया खुलासा हुआ है। अबकी बार एक जमीन के लिए स्टांप ड्यूटी चुकाने को लेकर खडसे सवालों के घेरे में आ गए हैं।

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खड़से की पत्नी और दामाद ने मिलकर पुणे के करीब भोसारी में तीन एकड़ जमीन खरीदी थी जिसके लिए उन्होंने 3.75 करोड़ रुपये चुकाए थे। लेकिन अब नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि इस जमीन के लिए 1.37 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी के तौर पर दिए गए। जबकि इतनी स्टांप ड्यूटी 31.01 करोड़ रुपये की जमीन के लिए दी जाती है। दरअसल खड़से की पत्नी मंदाकिनी और दामाद गिरिश चौधरी ने मिलकर इस साल 27 अप्रैल को पुणे में तीन एकड़ की जमीन खरीदी थी। इसके लिए 1.37 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी के तौर पर चुकाए गए थे।
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अब यह सवाल उठ रहा है कि खड़से ने इतनी ज्यादा स्टांप ड्यूटी क्यों दी। हालांकि राज्य सरकार ने इस जमीन की असली कीमत 31.01 करोड़ ही तय की थी। कागजातों के अनुसार इस जमीन को खड़से की पत्नी और दामाद ने 1.25 करोड़ रुपये प्रति एकड़ पर खरीदा। लेकिन सरकार ने इस जमीन की कीमत 25 हजार 630 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर तय की थी।  इसके अलावा महाराष्ट्र में स्टैंप ड्यूटी 6 फीसद के हिसाब से भरी जाती है। इस हिसाब से  खड़से को भरनी  थी 1.86 करोड़ की स्टैंप ड्यूटी लेकिन उन्होंने भरी  1.37 करोड़ जोकि 49 लाख कम है।

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खड़से के प्रभाव के चलते रजस्ट्री की हुई अनदेखी

Controversy grips Eknath Khadse, Shah seeks report
stamp khadse

उल्लेखनीय है कि बाॅम्‍बे स्टांप कानून,1995 में साफ तौर पर लिखा है कि अगर सेल डीड में जो मार्केट वैल्यू लिखी गयी है वह मिनिमम वैल्यू से कम है तो रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी इस मामले को जिले के कलेक्टर के संज्ञान में भेज दें और वह असली रिकॉर्ड देखकर मार्केट वैल्यू तय करे। हालांकि इन दस्तावेजों को देखकर ये साफ हो गया है कि हवेली के सब रजिस्ट्रार दिनकर लोनकर ने रजिस्ट्री के वक्त कानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज किया है। 

रजिस्ट्रेशन के रिकॉर्ड के अनुसार जमीन की असली मार्केट वैल्यू 3.75 करोड़ है जबकि मिनिमम रेट 25630 प्रति स्क्वायर मीटर हैं। गौरतलब है कि सब रजिस्ट्रार का दफ्तर एकनाथ खड़से के मंत्रालय के अधीन काम करता है। नाम न बताने की शर्त पर विभाग के उच्च पदस्‍थ अधिकारी ने माना की ये एक गंभीर चूक है। सब रजिस्ट्रार द्वारा इस मामले जिला कलेक्टर के सामने लाना चाहिए था।

बाॅम्‍बे स्टांप कानून, 1995 में साफ तौर पर लिखा है कि अगर गलत जानकारी दी जाती है तो ये एक दंडनीय अपराध है। जब खड़से से इस बारे में पूछा गया तो वह बोले स्टांप ड्यूटी को मार्केट वैल्यू के हिसाब से ही जमा कराया गया है। लेकिन जमीन की कीमत कम दिखाने के लिए पूछने पर जवाब देने से बचते दिखे। 

अमित शाह ने मांगी एकनाथ पर रिपोर्ट

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अमित शाह - फोटो : PTI

वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र उद्योग विकास निगम ने खड़से के परिजन और जमीन के मालिक के बीच हुए सौदे से इंकार कर दिया है। उसका कहना है कि जमीन के मालिक अब्बास उकानी और खड़से के बीच सौदा इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि अब्बास ने जमीन खुद 1971 में हासिल की है।

इसके अलावा सेल डीड में कई अन्य खामियां भी मिली हैं। इस मामले के सामने आने पर एनसीपी ने खड़से के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने इस मामले में कालेधन के इस्तेमाल से इंकार नहीं किया है और कालेधन के इस्तेमाल पर केंद्र द्वारा कार्रवाई की मांग की है।

सरकार पर दबाव बनाते हुए कांग्रेस ने खड़से को हटाने की मांग की है। कांग्रेस ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीएच विद्यासागर को चिट्ठी लिखकर कार्रवाई की मांग की है। खड़से पर उठे विवाद के चलते भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

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