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लॉकडाउन में फंसे मजदूरों और छात्रों की मदद के लिए विधानसभाओं में बने कंट्रोल रूम: ओम बिरला
Tue, 21 Apr 2020 08:41 PM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Tue, 21 Apr 2020 08:41 PM IST
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फाइल)
- फोटो : Om Birla Twitter
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा है कि लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों और कई जगहों पर फंसे छात्रों की मदद के लिए राज्यों के बीच सही तालमेल बहुत जरूरी है। ऐसे में उन्होंने अनुरोध किया है कि इसके लिए विधानसभाओं में कंट्रोल रूम बनाए जाएं।
ओम बिरला ने मौजूदा हालातों को लेकर विधानसभा अध्यक्षों के साथ ऑनलाइन बातचीत के बाद कहा, ‘‘संसद में भी एक कंट्रोल रूम बनाया जाना चाहिए, जिससे विधायकों और सांसदों को कोरोना वायरस महामारी से पैदा हुई स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने 27 राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष और एक विधान परिषद के सभापति से बात किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस संकट की घड़ी में वे साथ हैं। ’’ कई पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा अध्यक्ष को देश के कई भागों में फंसे हुए कामगारों की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्हें यह भी बताया गया कि कोटा के शैक्षिक केंद्र में बड़ी संख्या में छात्र फंसे हुए हैं, जो बिरला का निर्वाचन क्षेत्र भी है।
ओम बिरला ने पीठासीन अधिकारियों को आश्वासन देते हुए कहा है कि वे खुद इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि फंसे हुए छात्रों और कामगारों को सभी जरूरी मदद मिले। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभाओं में एक नियंत्रण कक्ष बने ताकी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों और अनेक स्थानों पर फंसे छात्रों की मदद के लिये प्रदेशों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके।
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लोकसभा सचिवालय की विज्ञप्ति के मुताबिक, बिरला ने पीठासीन अधिकारियों को जानकारी दी कि सभा में व्यवधान, विधानमंडलों की स्वायत्तता, संविधान की दसवीं अनुसूची और सूचना प्रौद्योगिकी और इससे जुड़े मामलों की जांच के लिए पहले गठित की गई पीठासीन अधिकारियों की चार समितियों ने अपनी रिपोर्टों को अंतिम रूप देने में काफी अच्छा काम किया है। ऐसे में वे समय पर अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे।
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ओम बिरला ने मौजूदा हालातों को लेकर विधानसभा अध्यक्षों के साथ ऑनलाइन बातचीत के बाद कहा, ‘‘संसद में भी एक कंट्रोल रूम बनाया जाना चाहिए, जिससे विधायकों और सांसदों को कोरोना वायरस महामारी से पैदा हुई स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने 27 राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष और एक विधान परिषद के सभापति से बात किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस संकट की घड़ी में वे साथ हैं। ’’ कई पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा अध्यक्ष को देश के कई भागों में फंसे हुए कामगारों की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्हें यह भी बताया गया कि कोटा के शैक्षिक केंद्र में बड़ी संख्या में छात्र फंसे हुए हैं, जो बिरला का निर्वाचन क्षेत्र भी है।
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ओम बिरला ने पीठासीन अधिकारियों को आश्वासन देते हुए कहा है कि वे खुद इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि फंसे हुए छात्रों और कामगारों को सभी जरूरी मदद मिले। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभाओं में एक नियंत्रण कक्ष बने ताकी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों और अनेक स्थानों पर फंसे छात्रों की मदद के लिये प्रदेशों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके।
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लोकसभा सचिवालय की विज्ञप्ति के मुताबिक, बिरला ने पीठासीन अधिकारियों को जानकारी दी कि सभा में व्यवधान, विधानमंडलों की स्वायत्तता, संविधान की दसवीं अनुसूची और सूचना प्रौद्योगिकी और इससे जुड़े मामलों की जांच के लिए पहले गठित की गई पीठासीन अधिकारियों की चार समितियों ने अपनी रिपोर्टों को अंतिम रूप देने में काफी अच्छा काम किया है। ऐसे में वे समय पर अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे।